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आचार संहिता में दर्ज मुकदमों की कार्रवाई में लेट-लतीफी
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आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन करने के मामले में दर्ज हुए 34 मुकदमों में कार्रवाई करने के मामले में पुलिस की लेटलतीफी नजर आ रही है। इस मामले में कार्रवाई को लेकर पुलिस असमंजस की स्थिति में है। यदि पुलिस ने प्रत्याशियों पर कार्रवाई की और उसकी दल की सरकार बन गई तो थाना प्रभारी व कोतवालों को अपनी कुर्सी हिलने का खतरा दिख रहा है। ऐसे में पुलिस बहुत ही सोच समझकर कदम उठा रही है।
जनपद की 11 विधानसभाओं में 14 फरवरी को मतदान संपन्न हो गया। जिले में आठ जनवरी से लगी आदर्श आचार संहिता के बाद एक फरवरी से शुरू हुए प्रचार के दौरान प्रत्याशियों पर आचार संहिता के 34 मुकदमे दर्ज हुए थे। वहीं मतगणना में दो दिन शेष बचे हैं। मगर पुलिस ने आचार संहिता का उल्लंघन करने के मामले में अभी तक अपनी कार्रवाई को आगे नहीं बढ़ाया है। चुनाव आचार संहिता उल्लंघन और चुनाव से जुड़े दूसरे मुकदमों में कार्रवाई को लेकर पुलिस असमंजस की स्थिति में है। अधिकारी से लेकर कर्मचारी तक अब नई सरकार का इंतजार कर रहे हैं।
यही कारण है कि किसी भी प्रकरण में प्रतिवादी को नोटिस तक तामील नहीं कराया गया है। सिर्फ जांच और विवेचना करने का ही हवाला दिया जा रहा है। इस मामले में कोई भी अधिकारी आधिकारिक बयान देने से बच रहे हैं, लेकिन अनौपचारिक रूप से यही कह रहे हैं कि जिले के विभिन्न थानों में दर्ज मुकदमों में कार्रवाई 11 मार्च के बाद की जाएगी। कार्रवाई का दायरा भी नई सरकार के रुख के अनुसार तय किया जाएगा। उस वक्त तक पुलिस बल उहापोह की स्थिति से बाहर निकल चुके होंगे और नियमानुसार कार्रवाई अमल में लाई जाने लगेगी। एसएसपी डॉ. योगेंद्र सिंह रावत का कहना है कि यदि इस तरह का मामला है तो उसको दिखवाया जाएगा। हालांकि पुलिस अपनी कार्रवाई में जुटी है। पुलिस के लिए आम और खास सभी समान है।
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जनपद की 11 विधानसभाओं में 14 फरवरी को मतदान संपन्न हो गया। जिले में आठ जनवरी से लगी आदर्श आचार संहिता के बाद एक फरवरी से शुरू हुए प्रचार के दौरान प्रत्याशियों पर आचार संहिता के 34 मुकदमे दर्ज हुए थे। वहीं मतगणना में दो दिन शेष बचे हैं। मगर पुलिस ने आचार संहिता का उल्लंघन करने के मामले में अभी तक अपनी कार्रवाई को आगे नहीं बढ़ाया है। चुनाव आचार संहिता उल्लंघन और चुनाव से जुड़े दूसरे मुकदमों में कार्रवाई को लेकर पुलिस असमंजस की स्थिति में है। अधिकारी से लेकर कर्मचारी तक अब नई सरकार का इंतजार कर रहे हैं।
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यही कारण है कि किसी भी प्रकरण में प्रतिवादी को नोटिस तक तामील नहीं कराया गया है। सिर्फ जांच और विवेचना करने का ही हवाला दिया जा रहा है। इस मामले में कोई भी अधिकारी आधिकारिक बयान देने से बच रहे हैं, लेकिन अनौपचारिक रूप से यही कह रहे हैं कि जिले के विभिन्न थानों में दर्ज मुकदमों में कार्रवाई 11 मार्च के बाद की जाएगी। कार्रवाई का दायरा भी नई सरकार के रुख के अनुसार तय किया जाएगा। उस वक्त तक पुलिस बल उहापोह की स्थिति से बाहर निकल चुके होंगे और नियमानुसार कार्रवाई अमल में लाई जाने लगेगी। एसएसपी डॉ. योगेंद्र सिंह रावत का कहना है कि यदि इस तरह का मामला है तो उसको दिखवाया जाएगा। हालांकि पुलिस अपनी कार्रवाई में जुटी है। पुलिस के लिए आम और खास सभी समान है।
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