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Haridwar News: गुलाब की वैज्ञानिक खेती किसानों की आय बढ़ाएगी, आयुर्वेद व चिकित्सा में भी महत्व

Thu, 22 Oct 2026 05:21 PM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Thu, 22 Oct 2026 05:21 PM IST
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Rose cultivation will increase farmers' income.
फोटो :
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- औद्योगिक संभावनाओं से भरपूर गुलाब की पंखुड़ियां, तेल और पारंपरिक उत्पाद बदलेंगे गांवों की तकदीर
- आयुष विशेषज्ञ गुलाब को औषधीय गुणों के कारण मानते हैं अत्यंत महत्वपूर्ण
गुलाब की वैज्ञानिक खेती से बढ़ेगी किसानों की आय, मिलेंगे स्वरोजगार के नए अवसर
माई सिटी रिपोर्टर
हरिद्वार। गुलाब की वैज्ञानिक खेती किसानों की आय बढ़ा सकती है। यह ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार के नए रास्ते भी खोल सकती है। इसकी पंखुड़ियां, सुगंधित तेल और अन्य भाग कई उत्पादों के निर्माण में उपयोगी हैं।
दिसंबर 2023 में प्रकाशित एक समीक्षा शोध ने गुलाब के औषधीय प्रभावों और औद्योगिक संभावनाओं का विश्लेषण किया है। आयुष विशेषज्ञ गुलाब को औषधीय गुणों के कारण अत्यंत महत्वपूर्ण मानते हैं। आयुष विशेषज्ञ अवनीश कुमार उपाध्याय का कहना है कि गुलाब आयुर्वेद की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। भारतीय परंपरा में इसकी पंखुड़ियों का उपयोग गुलकंद और गुलाब जल जैसे पारंपरिक उत्पादों में लंबे समय से होता रहा है। गुलाब की पंखुड़ियों में फ्लेवोनॉयड्स और पॉलीफेनोल जैसे प्राकृतिक यौगिक होते हैं, जिनमें एंटीऑक्सीडेंट गतिविधि देखी गई है।
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गुलाब के आवश्यक तेल का उपयोग अरोमाथेरेपी में मानसिक विश्राम और चिंता कम करने के लिए किया जाता है। वैज्ञानिक शोधों में गुलाब के संभावित सूजनरोधी गुणों और हृदय की मांसपेशियों पर इसके प्रभावों का भी अध्ययन किया गया है।
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अवनीश कुमार उपाध्याय के अनुसार, गुलाब की खेती को केवल ताजे फूलों की बिक्री तक सीमित नहीं रखना चाहिए। इसे मूल्य संवर्धन से जोड़ना अधिक उपयोगी है। किसान इसकी पंखुड़ियों से गुलकंद, गुलाब जल और अन्य उपयुक्त उत्पाद तैयार कर सकते हैं। रोजा डैमास्केना सुगंधित तेल उत्पादन के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध है।

गुलाब जल का उपयोग त्वचा की देखभाल और सौंदर्य प्रसाधनों में व्यापक रूप से होता है। गुलाब के फल, जिन्हें रोज हिप्स कहा जाता है, विटामिन सी और अन्य एंटीऑक्सीडेंट यौगिकों के अच्छे स्रोत हैं। अवनीश उपाध्याय के अनुसार, पारंपरिक ज्ञान को वैज्ञानिक अनुसंधान और बाजार व्यवस्था से जोड़कर गुलाब की उपयोगिता बढ़ाई जा सकती है। योजनाबद्ध खेती और प्रभावी विपणन से यह ग्रामीण क्षेत्रों में नए स्वरोजगार के अवसर विकसित करने में सहायक बन सकता है। किसान उत्पादक समूह और ग्रामीण उद्यमी प्रसंस्करण, पैकेजिंग और विपणन अपनाकर अतिरिक्त आय और रोजगार पा सकते हैं।
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