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बारिश से धान को फायदा, सब्जियों के नुकसान
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गंगा का जलस्तर बढ़ने और बारिश के बाद खेतों में जलभराव से धान की फसल को भले ही फायदा होगा, लेकिन सब्जियों के लिए पानी नुकसानदेह है। जस्वावाला निवासी किसान सुलेख चंद ने बताया कि बारिश ने धान की फसल में जान डाल दी है, लेकिन हरी मिर्च और टमाटर के लिए नुकसान होगा। तेलीवाला के किसान पंकज ने बताया कि खेतों में पानी भर गया है। सब्जियों के पौधे गल जाएंगे। सब्जियां खराब होने से काश्तकारों को आर्थिक नुकसान झेलना पड़ेगा।
कृषि विज्ञान केंद्र धनौरी के प्रभारी डॉ. पुरुषोत्तम कुमार ने बताया कि धान की फसल के लिए बारिश लाभकारी है। खेतों में जमा पानी से पौधे मजबूत होंगे और दाने बनने में भी यह मददगार साबित होगा, लेकिन जलभराव से सब्जियां खराब हो जाएंगी। सब्जयों के खेतों में जल निकासी की समुचित व्यवस्था जरूर करें ताकि फसल को बचाया जा सके। संवाद
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आम और लीची के बगीचों में अभी डालें खाद
संवाद न्यूज एजेंसी
धनौरी। आम और लीची के बगीचों में खाद और उर्वरक डालने का आजकल सही समय है। सितंबर पहले सप्ताह तक बागवान बागों की जुताई और पौधे की कटाई-छटाई कर लें।
कृषि विज्ञान केंद्र धनौरी के प्रभारी डॉ. पुरुषोत्तम कुमार का कहना है कि आम और लीची पौधों में खाद एवं उर्वरक डालना फायदेमंद होता है। क्योंकि सितंबर के प्रथम सप्ताह बाद आम और लीची के पेड़ वानस्पतिक वृद्धि की अवस्था से निकलकर प्रजननकारी अवस्था मे चले जाते हैं। पेड़ के अंदर फूल बनने की प्रक्रिया शुरू हो जाती है। समय पर खाद और उर्वरक नहीं मिलने पर फूल कम निकलते हैं और असर उत्पादन पर पड़ता है।
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डॉ. पुरुषोत्तम कुमार ने बताया कि 10 वर्ष या उससे अधिक पुराने आम और लीची के पेड़ों को प्रति पेड़ 550 ग्राम डाई अमोनियम फास्फेट, 850 ग्राम यूरिया और 750 ग्राम म्यूरेट ऑफ पोटाश को मिलाकर पेड़ के जड़ों से करीब 2 मीटर की दूरी पर एक रिंग आकार का 9 इंच चौड़ा और 9 इंच गहरा गड्ढा खोदकर उसमे डाल दें। उर्वरक के साथ पेड़ों में बीस से पच्चीस किलो प्रति पेड़ के अनुसार अच्छी तरह से गाय के गोबर या वर्मी कंपोस्ट डालें।
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कृषि विज्ञान केंद्र धनौरी के प्रभारी डॉ. पुरुषोत्तम कुमार ने बताया कि धान की फसल के लिए बारिश लाभकारी है। खेतों में जमा पानी से पौधे मजबूत होंगे और दाने बनने में भी यह मददगार साबित होगा, लेकिन जलभराव से सब्जियां खराब हो जाएंगी। सब्जयों के खेतों में जल निकासी की समुचित व्यवस्था जरूर करें ताकि फसल को बचाया जा सके। संवाद
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आम और लीची के बगीचों में अभी डालें खाद
संवाद न्यूज एजेंसी
धनौरी। आम और लीची के बगीचों में खाद और उर्वरक डालने का आजकल सही समय है। सितंबर पहले सप्ताह तक बागवान बागों की जुताई और पौधे की कटाई-छटाई कर लें।
कृषि विज्ञान केंद्र धनौरी के प्रभारी डॉ. पुरुषोत्तम कुमार का कहना है कि आम और लीची पौधों में खाद एवं उर्वरक डालना फायदेमंद होता है। क्योंकि सितंबर के प्रथम सप्ताह बाद आम और लीची के पेड़ वानस्पतिक वृद्धि की अवस्था से निकलकर प्रजननकारी अवस्था मे चले जाते हैं। पेड़ के अंदर फूल बनने की प्रक्रिया शुरू हो जाती है। समय पर खाद और उर्वरक नहीं मिलने पर फूल कम निकलते हैं और असर उत्पादन पर पड़ता है।
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डॉ. पुरुषोत्तम कुमार ने बताया कि 10 वर्ष या उससे अधिक पुराने आम और लीची के पेड़ों को प्रति पेड़ 550 ग्राम डाई अमोनियम फास्फेट, 850 ग्राम यूरिया और 750 ग्राम म्यूरेट ऑफ पोटाश को मिलाकर पेड़ के जड़ों से करीब 2 मीटर की दूरी पर एक रिंग आकार का 9 इंच चौड़ा और 9 इंच गहरा गड्ढा खोदकर उसमे डाल दें। उर्वरक के साथ पेड़ों में बीस से पच्चीस किलो प्रति पेड़ के अनुसार अच्छी तरह से गाय के गोबर या वर्मी कंपोस्ट डालें।