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रिश्तेदार की पैरवी से पंत दंपति को मिला था कोरोना जांच का ठेका

Mon, 08 Nov 2021 08:39 PM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Mon, 08 Nov 2021 08:39 PM IST
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Pant couple got the contract by lobbying of relative
पुलिस गिरफ्त में कुंभ में हुए कोरोना जांच फर्जीवाड़ा घोटाले के आरोपी पंत दंपति । - फोटो : HARIDWAR
कुंभ में कोरोना जांच फर्जीवाड़े की स्क्रिप्ट देहरादून में बैठकर लिखी गई थी। फर्जीवाड़े के दस्तावेज हरिद्वार में ही तैयार हुए थे। अब दस्तावेज तैयार करने के साथ ही पंत दंपती को ठेका दिलवाने वाले रिश्तेदारों एवं कुछ प्रशासनिक अधिकारियों की तरफ भी जांच की सुई घूम रही है।
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धर्मनगरी में महाकुंभ 2021 के दौरान हुए कोरोना जांच फर्जीवाड़े का ताना-बाना कई महीनों पहले ही कोरोना संक्रमण को देखते हुए देहरादून में बुनना शुरू कर दिया गया था। पंत दंपति की मैक्स कारपोरेट सर्विस डेटा प्रोवाइडर कंपनी है। ऐसे में पहली बार कोरोना जांच ठेका पंत दंपति के देहरादून में रहने वाले एक रिश्तेदार ने दिलवाया था। वहीं फर्जीवाड़े को पूरा करने के लिए हरिद्वार तहसील का सहारा लिया गया। तहसील से 100 रुपये के स्टांप मार्च माह में तैयार कराए गए थे। इसके बाद जनवरी माह की तारीख डालकर इन्हें टेंडर प्रक्रिया में डाला गया और फिर टेंडर अपनी कंपनी के नाम ले लिया गया। मार्च माह में एफिडेविट तैयार कराकर उन्हें बैक डेट में दिखाकर जमा कराया गया था। ऐसे में फर्जी दस्तावेज तैयार करने व उनकी जांच करने वाले अधिकारियों से भी एसआईटी पूछताछ करेगी। वहीं पुलिस की जांच अब पंत दंपती के उस रिश्तेदार की तरफ भी घूम गई है, जिसने ठेका दिलवाने में मदद की थी।
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पूछताछ में पांच आरोपियों के नाम आए सामने
एसआईटी द्वारा तीन घंटे तक पंत दंपती से पूछताछ के बाद पांच अन्य आरोपियों के नाम भी सामने आए हैं। इसके बाद अब एसआईटी की टीम इन पांच लोगों पर भी अब अपना शिकंजा कसेगी। इन पांच नामों में कई राजनेता व अधिकारी भी बताए जा रहे हैं, जिनसे पूछताछ होगी।
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फर्जी दस्तावेजों की क्यों नहीं हुई जांच
कोरोना जांच ठेके में इस्तेमाल किए गए फर्जी दस्तावेजों की टेंडर निकालने वाले अधिकारियों ने यदि उस समय ही जांच कर ली होती तो घोटाला शुरू में ही खुल सकता था, लेकिन अधिकारियों ने उस वक्त इस तरफ कोई ध्यान नहीं दिया।
कोरोना जांच का ठेका लेने के लिए दस्तावेज फर्जी लगाए गए थे। इसके बाद पुलिस ने इस मामले में भी अलग से मुकदमा दर्ज किया था।
-डॉ. योगेंद्र सिंह रावत, एसएसपी हरिद्वार।
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