हरिद्वार: राजाजी नेशनल पार्क में लगे कैमरा ट्रैप में नजर आया पैंगोलिन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
राजाजी टाइगर रिजर्व पार्क की कांसरो रेंज के जंगलों में विलुप्त प्रजाति का जानवर पैंगोलिन नजर आया है। रेंज में लगाए गए कैमरा ट्रैप में पैंगोलिन की तस्वीर कैद हुई है। चार साल में पहली बार पैंगोलिन दिखाई दिया है। इसको लेकर वन महकमे के अधिकारी काफी उत्साहित हैं।
राजाजी टाइगर रिजर्व पार्क के वन्य जीव प्रतिपालक पवन सिंह ने बताया कि पार्क के हरिद्वार और देहरादून डिवीजन में करीब ढाई सौ कैमरा ट्रैप लगाए गए हैं। राजाजी टाइगर रिजर्व पार्क की कांसरो रेंज में लगे कैमरा ट्रैप में पैंगोलिन की तस्वीर कैद हुई है।
उन्होंने बताया कि यह एक विलुप्त श्रेणी का जानवर है। वार्डन कोमल सिंह ने बताया कि राजाजी टाइगर रिजर्व पार्क में पैंगोलिन जैसे विलुप्त प्रजाति के जानवरों के संरक्षण पर ज्यादा फोकस किया जाता है।
कई देशों में है पैंगोलिन की मांग
चीन और वियतनाम सहित कई देशों में दवाएं बनाने और मांस के लिए इनकी बहुत डिमांड है। पैंगोलिन की त्वचा का ऊपरी शल्क केरेटिन से बनी होती है। माना जाता है कि बहुत सी बीमारियों के इलाज में इसकी मदद ली जा सकती है।
एक साल में खाता है सात करोड़ चींटियां
जानकार बताते हैं कि पैंगोलिन चींटिया खाते हैं। एक अनुमान के अनुसार एक पैंगोलिन साल में करीब सात करोड़ चींटियां खा लेता है। वो चींटियां जो फसलों के लिए नुकसान पहुंचा सकती हैं। साथ ही बड़े पशुओं के लिए भी बड़ी मुसीबत खड़ी कर सकती हैं। इसलिए पैंगोलिन को पर्यावरण एवं जैव विविधता के लिए बहुत जरूरी बताया जाता है।