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ऑनलाइन नामांकन पर नहीं नेताजी का विश्वास
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कोविड संक्रमण की पाबंदियों के बीच हो रहे विधानसभा चुनाव में हर राजीतिक दल और प्रत्याशी डिजिटल प्लेटफार्म का सहारा ले रहा है। प्रचार प्रसार के लिए भी वर्चुअल किया जा रहा है। इसके बाद भी चुनाव मैदान में उतरने वाले नेताजी को नामांकन के मामले में आज भी ऑनलाइन की बजाय ऑफलाइन लाइन ही पसंद आई। जनपद की 11 विधानसभा सीटों पर 131 दावेदारों ने से केवल एक ने ही ऑनलाइन पर्चा भरा। लेकिन इन्होंने भी ऑनलाइन नामांकन में त्रुटियां होने की आशंका पर दूसरा सेट ऑफलाइन जमा करवाया है। खास बात यह है कि चुनाव में मैदान में एमएससी से लेकर इंजीनियरिंग तक की शिक्षा ग्रहण करने वाले लोग हैं।
मार्च 2020 में कोरोना के केस बढ़ने पर देशभर में लॉकडाउन लगाना पड़ा था। पहले चरण के लॉकडाउन में सबकुछ बंद हो गया था। इसके बाद ही वर्चुअल और ऑनलाइन जैसों शब्दों का प्रचलन शुरू हुआ। सबसे पहले नकदी की जगह ईपेमेंट ने लिया। स्कूल-कॉलेजों में ऑनलाइन कक्षाएं और सरकारी बैठकें वर्चुअल होने लगी। राजनीतिक दल भी अपने कार्यकर्ताओं के साथ वर्चुअल बैठक और संवाद करने लगे। ऑनलाइन की व्यवस्था खास से लेकर आमजन तक में दिखाई दे रही है। अब चुनाव प्रचार प्रसार भी डिजिटल तौर तरीके से हो रहा है।
चुनाव आयोग की ओर से विधानसभा चुनाव के लिए कोरोना संक्रमण को देखते हुए ऑनलाइन नामांकन कराने की व्यवस्था शुरू की थी। इसमें प्रत्याशियों को कलक्ट्रेट आने की जरूरत नहीं थी। जनपद 11 विधानसभा सीटों पर 131 प्रत्याशियों ने नामांकन कराए। सभी प्रत्याशियों ने नामांकन कलक्ट्रेट में ही आकर कराए हैं। इनमें से एक सेट नामांकन का जरूर रुड़की से भाजपा प्रत्याशी प्रदीप बत्रा की ओर से ऑनलाइन कराया गया है। पर उन्हें भी ऑनलाइन नामांकन पर पूरी तरह से विश्वास नहीं रहा। इसलिए उन्होंने 24 जनवरी को भी कलक्ट्रेट में पहुंचकर नामांकन का अलग से ऑफलाइन सेट भी जमा कराया।
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हालांकि, उनका ऑनलाइन किया गया नामांकन स्वीकार कर लिया गया है। संवाद
प्रत्याशियों को ऑफलाइन के साथ ही ऑनलाइन नामांकन की सुविधा भी दी गई थी। उन्हें कलक्ट्रेट आने की जरूरत नहीं थी। प्रत्याशियों ने ऑनलाइन की बजाय ऑफलाइन नामांकन में अधिक रुचि दिखाई है।
- पीएल शाह, उप जिला निर्वाचन अधिकारी हरिद्वार
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मार्च 2020 में कोरोना के केस बढ़ने पर देशभर में लॉकडाउन लगाना पड़ा था। पहले चरण के लॉकडाउन में सबकुछ बंद हो गया था। इसके बाद ही वर्चुअल और ऑनलाइन जैसों शब्दों का प्रचलन शुरू हुआ। सबसे पहले नकदी की जगह ईपेमेंट ने लिया। स्कूल-कॉलेजों में ऑनलाइन कक्षाएं और सरकारी बैठकें वर्चुअल होने लगी। राजनीतिक दल भी अपने कार्यकर्ताओं के साथ वर्चुअल बैठक और संवाद करने लगे। ऑनलाइन की व्यवस्था खास से लेकर आमजन तक में दिखाई दे रही है। अब चुनाव प्रचार प्रसार भी डिजिटल तौर तरीके से हो रहा है।
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चुनाव आयोग की ओर से विधानसभा चुनाव के लिए कोरोना संक्रमण को देखते हुए ऑनलाइन नामांकन कराने की व्यवस्था शुरू की थी। इसमें प्रत्याशियों को कलक्ट्रेट आने की जरूरत नहीं थी। जनपद 11 विधानसभा सीटों पर 131 प्रत्याशियों ने नामांकन कराए। सभी प्रत्याशियों ने नामांकन कलक्ट्रेट में ही आकर कराए हैं। इनमें से एक सेट नामांकन का जरूर रुड़की से भाजपा प्रत्याशी प्रदीप बत्रा की ओर से ऑनलाइन कराया गया है। पर उन्हें भी ऑनलाइन नामांकन पर पूरी तरह से विश्वास नहीं रहा। इसलिए उन्होंने 24 जनवरी को भी कलक्ट्रेट में पहुंचकर नामांकन का अलग से ऑफलाइन सेट भी जमा कराया।
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हालांकि, उनका ऑनलाइन किया गया नामांकन स्वीकार कर लिया गया है। संवाद
प्रत्याशियों को ऑफलाइन के साथ ही ऑनलाइन नामांकन की सुविधा भी दी गई थी। उन्हें कलक्ट्रेट आने की जरूरत नहीं थी। प्रत्याशियों ने ऑनलाइन की बजाय ऑफलाइन नामांकन में अधिक रुचि दिखाई है।
- पीएल शाह, उप जिला निर्वाचन अधिकारी हरिद्वार