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तीर्थ के शंकराचार्य बताने पर जताई आपत्ति
अमर उजाला ब्यूरो हरिद्वार
Updated Mon, 22 May 2017 11:21 PM IST
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द्वारिका शारदा एवं ज्योर्तिपीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने स्वामी अच्युतानंद तीर्थ की ओर से पीठ पर स्वयं को शंकराचार्य लिखने या बताने पर आपत्ति की है। उन्होंने बताया कि स्वामी अच्युतानंद तीर्थ के खिलाफ फर्जी तरीके से स्वयं को शंकराचार्य घोषित करने पर मुकदमा दर्ज कराया गया है, जिसकी जांच जारी है।
कनखल स्थित शंकराचार्य मठ में सोमवार को पत्रकार वार्ता में शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने कहा कि सनातन धर्म को बदनाम करने की साजिश रची जा रही है। कुछ लोग स्वयं को शंकराचार्य बता रहे हैं, जबकि देश में चार पीठ ज्योर्तिमय, गोवर्द्धन,श्रृंगेरी तथा द्वारिका -शारदा पीठ है। उनमें से दो पीठ ज्योर्तिमय एवं द्वारिका शारदा पर वे आसीन हैं, लेकिन कुछ लोग इन पीठों पर गलत तरीके से स्वयं को शंकराचार्य बता रहे हैं। उन्होंने स्वामी अच्युतानंद तीर्थ के गुरु भूमानंद पर भी सवाल उठाए। कहा कि क्या ये लोग कभी पीठ पर गए और शंकराचार्य की मर्यादा के बारे में क्या उन्हें पता है। उन्होंने बताया कि अच्युतानंद तीर्थ पर जिला देवभूमि द्वारका स्थित पुलिस थाने में ब्रह्मचारी नारायणानंद ने मुकदमा दर्ज कराया हुआ है। जिसकी जांच जारी है।
चारधाम को जोड़ने वाले रेलमार्ग से होगी बड़ी क्षति
द्वारिका शारदा एवं ज्योर्तिपीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने चारधामों को जोड़ने वाले रेलमार्ग का विरोध किया है।
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शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने कहा कि पहाड़ों को काटकर सुरंग बनाने से या मार्ग बनाने के लिए पहाड़ों को काटने के लिए डायनामाइट के ब्लास्ट किए जाते हैं। अब रेल मार्ग बनाने के लिए बड़े स्तर पर पहाड़ों के साथ छेड़छाड़ की जाएगी। इससे पहाड़ों के जलस्रोत बंद हो जाएंगे। इससे लोगों को फसल उगाने के साथ-साथ पीने के लिए भी पानी मयस्सर नहीं होगा, तो ऐसे क्षेत्रों की जनता को पलायन से रोकना असंभव होगा। दूसरे पहाड़ों में सुरंग बनाने और काटने से दरार आ जाती हैं। दरार आने से पहाड़ खिसकने लगता है और कंपन या भूकंप आने से बड़ी क्षति उठानी पड़ती है। उन्होंने चारधाम को 12 महीने की बनाने का विरोध किया। बोले कि चारधाम वर्ष में केवल 4 महीने ही यात्रा चलनी चाहिए। पर्यटन और विकास के नाम पर विभिन्न यात्राएं शुरू कर दी गई है, जोकि पूरे वर्ष चलती है। उन्होंने इसे धर्म के खिलाफ बताते हुए यात्रा को व्यावसायिक करने के बजाय प्राचीन नियमों पर ही यात्रा चलाने को कहा।
कनखल स्थित शंकराचार्य मठ में सोमवार को पत्रकार वार्ता में शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने कहा कि सनातन धर्म को बदनाम करने की साजिश रची जा रही है। कुछ लोग स्वयं को शंकराचार्य बता रहे हैं, जबकि देश में चार पीठ ज्योर्तिमय, गोवर्द्धन,श्रृंगेरी तथा द्वारिका -शारदा पीठ है। उनमें से दो पीठ ज्योर्तिमय एवं द्वारिका शारदा पर वे आसीन हैं, लेकिन कुछ लोग इन पीठों पर गलत तरीके से स्वयं को शंकराचार्य बता रहे हैं। उन्होंने स्वामी अच्युतानंद तीर्थ के गुरु भूमानंद पर भी सवाल उठाए। कहा कि क्या ये लोग कभी पीठ पर गए और शंकराचार्य की मर्यादा के बारे में क्या उन्हें पता है। उन्होंने बताया कि अच्युतानंद तीर्थ पर जिला देवभूमि द्वारका स्थित पुलिस थाने में ब्रह्मचारी नारायणानंद ने मुकदमा दर्ज कराया हुआ है। जिसकी जांच जारी है।
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चारधाम को जोड़ने वाले रेलमार्ग से होगी बड़ी क्षति
द्वारिका शारदा एवं ज्योर्तिपीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने चारधामों को जोड़ने वाले रेलमार्ग का विरोध किया है।
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शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने कहा कि पहाड़ों को काटकर सुरंग बनाने से या मार्ग बनाने के लिए पहाड़ों को काटने के लिए डायनामाइट के ब्लास्ट किए जाते हैं। अब रेल मार्ग बनाने के लिए बड़े स्तर पर पहाड़ों के साथ छेड़छाड़ की जाएगी। इससे पहाड़ों के जलस्रोत बंद हो जाएंगे। इससे लोगों को फसल उगाने के साथ-साथ पीने के लिए भी पानी मयस्सर नहीं होगा, तो ऐसे क्षेत्रों की जनता को पलायन से रोकना असंभव होगा। दूसरे पहाड़ों में सुरंग बनाने और काटने से दरार आ जाती हैं। दरार आने से पहाड़ खिसकने लगता है और कंपन या भूकंप आने से बड़ी क्षति उठानी पड़ती है। उन्होंने चारधाम को 12 महीने की बनाने का विरोध किया। बोले कि चारधाम वर्ष में केवल 4 महीने ही यात्रा चलनी चाहिए। पर्यटन और विकास के नाम पर विभिन्न यात्राएं शुरू कर दी गई है, जोकि पूरे वर्ष चलती है। उन्होंने इसे धर्म के खिलाफ बताते हुए यात्रा को व्यावसायिक करने के बजाय प्राचीन नियमों पर ही यात्रा चलाने को कहा।