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Haridwar News: कांवड़ मेला ड्यूटी नहीं करने पर चार डॉक्टरों को नोटिस

Tue, 04 Aug 2026 12:38 AM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Tue, 04 Aug 2026 12:38 AM IST
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Notices issued to four doctors for not reporting for duty.
आयुर्वेद विश्वविद्यालय से कांवड़ मेला के लिए नियुक्त चार डॉक्टरों ने चौथे दिन भी अपनी सेवा नहीं दी। इस मामले को स्वास्थ्य विभाग ने गंभीरता से लिया है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. आरके सिंह ने उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय के निदेशक को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। उन्होंने भेज पत्र में दो दिन की अवधि तय किया है।
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बता दें कि नोडल अधिकारी कांवड़ मेला कार्यालय से तीन अगस्त को जारी एक पत्र में यह जानकारी दी गई है कि एमडी स्कॉलर नेहा, हिमाद्री, कोमल और सविता को 4 अगस्त से अलकनंदा घाट पर अस्थायी चिकित्सा शिविर में ड्यूटी के लिए नियुक्त किया गया था। उनके तैनाती स्थल पर नहीं पहुंचने के बाद दूरभाष व कई माध्यमों से संपर्क किया गया, लेकिन वह नहीं पहुंचे। इन डॉक्टरों ने अपनी योगदान आख्या भी संबंधित अधिकारी के समक्ष प्रस्तुत नहीं की।
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स्वास्थ्य विभाग के कॉल पर जब डॉक्टरों ने जवाब नहीं दिया तो ऐसी इस स्थिति को देखते हुए मुख्य चिकित्साधिकारी ने परिसर निदेशक ऋषिकुल आयुर्वेद कॉलेज को पत्र लिखा। उन्हें यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि चारों डॉक्टरों से योगदान आख्या प्रस्तुत करावें। यही नहीं इसमें दो दिन की अवधि भी निर्धारित की गई है। इस आदेश का अनुपालन नहीं करने पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने कार्रवाई से अवगत कराने का निर्देश दिया है।
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आयुर्वेद विश्वविद्यालय के शिक्षक ने जताया ऐतराज
एमडी स्कॉलर और चिकित्सकों की ड्यूटी मेला अवधि में लगाने को लेकर शिक्षक शैलेंद्र प्रधान ने आपत्ति दर्ज कराई है। उनका कहना है कि जिला प्रशासन किसी भी हाल में यह अधिकार नहीं रखता है कि वह स्कॉलर को सेवा के लिए बाध्य करे। उन्होंने इसे नियम विरुद्ध और एनसीआईएसएम के मानकों के विपरीत बताया। उन्होंने कहा कि कुछ लोग विश्वविद्यालय के ही प्रशासन को नियमों से भ्रमित कर रहे हैं। इसका असर है कि विश्वविद्यालय पर अनावश्यक रूप से भार डाला जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में परिसर निदेशक से वार्ता की जाएगी। वहीं विश्वविद्यालय से जुड़े कई अन्य शिक्षकों का कहना है कि कांवड़ या कुंभ में यह ड्यूटी पूर्व से लगती आ रही है। इसमें सेवा भावना के साथ विषम परिस्थितियों में कार्य करने की सीख मिलती है। किसी स्कॉलर को अगर आपत्ति है तो उसे स्वयं पहले ही अपनी शिकायत दर्ज करानी चाहिए।
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