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‘इलाज’ को तरसे सरकारी अस्पताल
ब्यूरो/अमर उजाला, हरिद्वार
Updated Wed, 23 Dec 2015 12:05 AM IST
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हरिद्वार। दवाई समेत अन्य सामान की खरीद न होने से सरकारी अस्पतालों में इलाज करवाने पहुंच रहे मरीज परेशान हैं। हालत यह है कि पहले अस्पतालों में ऑपरेशन का सामान समाप्त हुआ तो अब प्लास्टर सहित इंजेक्शन लगाने के लिए सीरिंज तक नहीं है।
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सरकारी अस्पतालों में दवाई सहित अन्य सामान की खरीद के टेंडर नवंबर के अंतिम सप्ताह में होने थे। लेकिन टेंडर प्रक्रिया के नियम सख्त होने के चलते किसी भी ठेकेदार ने टेंडर नहीं डाला। जनपद स्तर पर दवाइयों की खरीद प्रक्रिया को समाप्त करते हुए महानिदेशालय स्तर से दवाई एवं अन्य सामान खरीद की प्रक्रिया का नियम लागू कर दिया गया है। जिसमें 70 प्रतिशत महानिदेशालय और 30 प्रतिशत जनपद स्तर से दवाइयां खरीदी जाएंगी। प्रक्रिया की शुरूआत महानिदेशालय से शुरू होगी। लेकिन टेंडर न डालने से अभी तक एक भी दवा नहीं खरीदी गई। जबकि सरकारी अस्पतालों में आवश्यक दवाइयां, ऑपरेशन, प्लास्टर आदि का सामान पूरी तरह समाप्त हो गया है।
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कर्मी खाली बैठने को मजबूर
ब्लड, यूरिन, शुगर, किडनी आदि जांच के लिए पैथोलॉजी में रीजेंट समाप्त हो चुके हैं। जांच की एक मशीन करीब एक माह से खराब है। काम न होने से कर्मी भी खाली बैठने को मजबूर हैं।
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रेडियोलॉजिस्ट को नोटिस
जिला अस्पताल में दवा के साथ-साथ एक्स-रे एवं अल्ट्रासाउंड फिल्म समाप्त होने के कगार पर हैं। एक्स-रे की फुल साइज फिल्म तो समाप्त हो गई है। छोटी एवं हाफ फिल्म से काम चलाया जा रहा है। अल्ट्रासाउंड की रील नाममात्र बची है। रील बचाने के चक्कर में सीएमओ कार्यालय से रेडियोलॉजिस्ट को नोटिस जारी किया है। रेडियोलॉजिस्ट अल्ट्रासाउंड में कम रील का उपयोग कर रहे थे, लेकिन नोटिस के बाद वह नियमानुसार कार्य करने लगे हैं।
इनका कहना है
दवाइयां एवं अन्य सामान की खरीद प्रक्रिया महानिदेशालय देहरादून स्तर से शुरू होगी। वहीं से प्रक्रिया अटकी हुई है। जनपद स्तर से कुछ भी नहीं खरीदा जा सकता। ऐसे में जनपद स्तरीय अधिकारी मजबूर हैं।
डा. सुषमा गुप्ता मुख्य चिकित्सा अधिकारी