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नाजिम के बहाने चर्चा में आए राजनीति के कुख्यात
अमर उजाला ब्यूरो हरिद्वार
Updated Sun, 05 Mar 2017 10:39 PM IST
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मुख्यमंत्री हरीश रावत के चुनाव में हरिद्वार ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेसी कार्यकर्ता के रूप में काम करने की स्वीकारोक्ति कर चुके हिस्ट्रीशीटर नाजिम सलमानी की ओर से बसपा प्रत्याशी मुकर्रम अंसारी से अपनी जान को खतरा बताने और सुरक्षा की मांग उठाने के बाद राजनीति में सक्रिय अपराधी फिर चर्चा में आ गए हैं।
किसी भी दल को कुख्यातों से कोई परहेज नहीं है। चाहे भाजपा हो या कांग्रेस। इन दलों की छतरी के नीचे अपराधी छवि वाले लोग बेहद महफूज है। सियासतदां कुख्यातों को लेकर अब एक दूजे की टांग खिचाई में जुटे हुए है। नब्बे के दशक में अपराध जगत में तेजी से उभरे ज्वालापुर के नाजिम सलमानी की लंबे समय तक तूती बोलती रही। कई हत्याकांड को अंजाम देने के आरोप के छींटे उसके दामन पर पड़े।
पचास की उम्र पूरी कर चुके नाजिम ने हाल में मुख्यमंत्री हरीश रावत के चुनाव के दौरान कांग्रेस के सिपाही के तौर पर पसीना बहाया। मुसलमानों को कांग्रेस के प्रति लामबंद करने की कोशिश की। संभवत ये ही बात बसपा प्रत्याशी मुकर्रम अंसारी कैंप को नागवार गुजरी। बात इतनी बिगड़ी कि नाजिम ने पुलिस से गुहार लगा दी। बड़ा सवाल ये है कि अकेले नाजिम ही राजनीतिक दलों की पसंद नहीं है। बल्कि सीएम के चुनाव की कमान संभालने वाले चंद चेहरों में से हिस्ट्रीशीटर ठाकुर रतन सिंह भी रहे हैं। वे सीएम के इर्द गिर्द मंडराते रहते हैं। भाजपा की गोद में भी हिस्ट्रीशीटर सुशील चौहान है। शुचिता, अनुशासन के दम भरने वाली भाजपा ने सुशील चौहान को मुख्य संगठन का जिलाध्यक्ष बनाया था। अब एक दूसरे हिस्ट्रीशीटर संजय चोपडा भी हरक सिंह रावत के नाम की माला जपने के साथ ही अब मोदी नाम की माला जप रहे हैं। अपराध जगत का बड़ा नाम रहे प्रताप पाल और जसवंत चौहान भी कांग्रेस में सक्रिय हैं। ये पूर्व विधायक अंबरीष कुमार के खासमखास माने जाते है। लंबे समय तक ज्वालापुर कोतवाली के हिस्ट्रीशीटर रहे मकबूल कुरैशी की हिस्ट्रीशीटर एनडी तिवारी सरकार के कार्यकाल में खत्म हो गई थी और वे दर्जाधारी मंत्री भी रहे।
किसी भी दल को कुख्यातों से कोई परहेज नहीं है। चाहे भाजपा हो या कांग्रेस। इन दलों की छतरी के नीचे अपराधी छवि वाले लोग बेहद महफूज है। सियासतदां कुख्यातों को लेकर अब एक दूजे की टांग खिचाई में जुटे हुए है। नब्बे के दशक में अपराध जगत में तेजी से उभरे ज्वालापुर के नाजिम सलमानी की लंबे समय तक तूती बोलती रही। कई हत्याकांड को अंजाम देने के आरोप के छींटे उसके दामन पर पड़े।
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पचास की उम्र पूरी कर चुके नाजिम ने हाल में मुख्यमंत्री हरीश रावत के चुनाव के दौरान कांग्रेस के सिपाही के तौर पर पसीना बहाया। मुसलमानों को कांग्रेस के प्रति लामबंद करने की कोशिश की। संभवत ये ही बात बसपा प्रत्याशी मुकर्रम अंसारी कैंप को नागवार गुजरी। बात इतनी बिगड़ी कि नाजिम ने पुलिस से गुहार लगा दी। बड़ा सवाल ये है कि अकेले नाजिम ही राजनीतिक दलों की पसंद नहीं है। बल्कि सीएम के चुनाव की कमान संभालने वाले चंद चेहरों में से हिस्ट्रीशीटर ठाकुर रतन सिंह भी रहे हैं। वे सीएम के इर्द गिर्द मंडराते रहते हैं। भाजपा की गोद में भी हिस्ट्रीशीटर सुशील चौहान है। शुचिता, अनुशासन के दम भरने वाली भाजपा ने सुशील चौहान को मुख्य संगठन का जिलाध्यक्ष बनाया था। अब एक दूसरे हिस्ट्रीशीटर संजय चोपडा भी हरक सिंह रावत के नाम की माला जपने के साथ ही अब मोदी नाम की माला जप रहे हैं। अपराध जगत का बड़ा नाम रहे प्रताप पाल और जसवंत चौहान भी कांग्रेस में सक्रिय हैं। ये पूर्व विधायक अंबरीष कुमार के खासमखास माने जाते है। लंबे समय तक ज्वालापुर कोतवाली के हिस्ट्रीशीटर रहे मकबूल कुरैशी की हिस्ट्रीशीटर एनडी तिवारी सरकार के कार्यकाल में खत्म हो गई थी और वे दर्जाधारी मंत्री भी रहे।
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