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भारत से अधिक विदेशों में अपनाई जा रही है प्राकृतिक चिकित्सा
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शुक्रवार को जिला अस्पताल में योग प्राकृतिक चिकित्सा दिवस पर गोष्ठी में प्रभारी आयुर्वेदिक चिकित्सा अधिकारी डॉ. हेमलता पांगती ने कहा कि प्राकृतिक चिकित्सा को विदेशों में अपनाया जा रहा है। जबकि भारतवर्ष में कम लोग इसे अपना रहे हैं।
गोष्ठी की शुरूआत करते हुए अस्पताल के सीएमएस डॉ. सीपी त्रिपाठी ने कहा कि योग प्राकृतिक चिकित्सा सनातन विज्ञान और वैदिक विज्ञान है। हमें प्राकृतिक चिकित्सा को बढ़ावा देना चाहिए। योग करने से हमारे कई रोग जड़ से समाप्त हो जाते हैं।
डॉ. हेमलता पांगती ने कहा कि आयुर्वेद चिकित्सा 3 हजार वर्ष पुरानी है। प्राकृतिक चिकित्सा भी आयुर्वेद का अभिन्न अंग है। प्राकृतिक चिकित्सा पंचतत्वों से मिलकर बनी है। जल सेवन, व्रत, सन बाथ, शुद्ध हवा भी योग प्राकृतिक चिकित्सा में आता है। योग प्राकृतिक चिकित्सा सहायक निशा भट्ट ने कहा कि प्रकृति में तरीकों का उपयोग करके दी जाने वाली चिकित्सा ही प्राकृतिक चिकित्सा है। जैसे पंचतत्व, जल, वायु, अग्नि, पृथ्वी, आकाश हैं। जिससे हमारा शरीर बना है। इनसे उपचार करना ही प्राकृतिक चिकित्सा है। जैसे हम व्रत रखते हैं, सुबह की सैर, धूप सेकना, जल और निर्जल उपवास, प्राणायाम ये सब प्राकृतिक चिकित्सा में आता है। कार्यक्रम में सभी अधिकारियों कर्मचारियों को आयुष किट भी भेंट की। इस अवसर पर वरिष्ठ नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. चंदन कुमार मिश्रा, बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. शशिकांत वशिष्ठ, डॉ. हितेन जंगपांगी, रेडियोलॉजिस्ट डॉ. संजय त्यागी आदि मौजूद रहे। संचालन दिनेश लखेड़ा ने किया।
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गोष्ठी की शुरूआत करते हुए अस्पताल के सीएमएस डॉ. सीपी त्रिपाठी ने कहा कि योग प्राकृतिक चिकित्सा सनातन विज्ञान और वैदिक विज्ञान है। हमें प्राकृतिक चिकित्सा को बढ़ावा देना चाहिए। योग करने से हमारे कई रोग जड़ से समाप्त हो जाते हैं।
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डॉ. हेमलता पांगती ने कहा कि आयुर्वेद चिकित्सा 3 हजार वर्ष पुरानी है। प्राकृतिक चिकित्सा भी आयुर्वेद का अभिन्न अंग है। प्राकृतिक चिकित्सा पंचतत्वों से मिलकर बनी है। जल सेवन, व्रत, सन बाथ, शुद्ध हवा भी योग प्राकृतिक चिकित्सा में आता है। योग प्राकृतिक चिकित्सा सहायक निशा भट्ट ने कहा कि प्रकृति में तरीकों का उपयोग करके दी जाने वाली चिकित्सा ही प्राकृतिक चिकित्सा है। जैसे पंचतत्व, जल, वायु, अग्नि, पृथ्वी, आकाश हैं। जिससे हमारा शरीर बना है। इनसे उपचार करना ही प्राकृतिक चिकित्सा है। जैसे हम व्रत रखते हैं, सुबह की सैर, धूप सेकना, जल और निर्जल उपवास, प्राणायाम ये सब प्राकृतिक चिकित्सा में आता है। कार्यक्रम में सभी अधिकारियों कर्मचारियों को आयुष किट भी भेंट की। इस अवसर पर वरिष्ठ नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. चंदन कुमार मिश्रा, बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. शशिकांत वशिष्ठ, डॉ. हितेन जंगपांगी, रेडियोलॉजिस्ट डॉ. संजय त्यागी आदि मौजूद रहे। संचालन दिनेश लखेड़ा ने किया।
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