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मिड डे मिल की रसोई पर संकट
अमर उजाला ब्यूरो हरिद्वार
Updated Wed, 30 Nov 2016 10:47 PM IST
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जिले के प्राथमिक और जूनियर हाईस्कूल में मिड डे मिल का चावल नहीं मिलने से रसोई पर संकट खड़ा हो गया। 80 फीसदी स्कूलों में नवंबर माह का चावल नहीं पहुंचा है। फिलहाल कुछ स्कूलों में भोजन उधार के सहारे परोसा जा रहा है। जबकि अधिकांश स्कूलों से बच्चे भूखे ही लौट रहे हैं।
सर्व शिक्षा अभियान के तहत सरकारी स्कूलों में पहली से आठवीं तक के छात्र छात्राओं को दोपहर का भोजन मुफ्त दिया जाता है। हरिद्वार जनपद में कुल 914 प्राइमरी और जूनियर स्कूल हैं, जिनमें करीब 1.25 लाख छात्र छात्राएं इस योजना से लाभान्वित होते हैं। चावल न मिलने से कई स्कूलों की रसोई का चूल्हा ही नहीं जल रहा है। 80 प्रतिशत स्कूलों में नवंबर का पूरा महीना चावल के इंतजार में ही बीत गया। कुछ स्कूलों में शिक्षक अपने दम पर उधार के सहारे भोजन खिला रहे हैं।
स्कूलों में मिड डे मिल पर संकट सिर्फ नवंबर माह में ही नहीं रहा, कुछ स्कूलों में अक्तूबर के महीने में भी चावल नहीं पहुंच सका। ताज्जुब की बात यह है कि सवा लाख छात्र छात्राओं से जुड़ी इस योजना में लापरवाही की जिम्मेदारी कोई लेने को तैयार नहीं है। शिक्षा विभाग इसके लिए पूर्ति विभाग को जिम्मेदार ठहरा रहा है तो पूर्ति विभाग पीछे से ही चावल न आने की मजबूरी जता रहे हैं।
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हर महीने जाती है डिमांड
सर्व शिक्षा अभियान कार्यालय की ओर से हर महीने राशन की डिमांड पूर्ति विभाग को भेजी जाती है। विभाग अपनी औपचारिकताएं पूरी कर सीनियर मार्केटिंग इंस्पेक्टर को भेजता है। इसके बाद राशन डीलरों की सूची शिक्षा विभाग को भेजी जाती है। शिक्षा विभाग ये तय करता है कि किस स्कूल में कौन राशन डीलर चावल भेजेगा।
विभाग की ओर से हर महीने चावल की डिमांड पूर्ति विभाग को समय से भेजी जा रही है, लेकिन चावल की सप्लाई नहीं हो पा रही है। जिस कारण स्कूलों में मिडडे मिल बनाने में दिक्कत आ रही है।
- दीपक पंवार, प्रभारी मिड डे मिल, सर्व शिक्षा अभियान हरिद्वार
सर्व शिक्षा अभियान के तहत सरकारी स्कूलों में पहली से आठवीं तक के छात्र छात्राओं को दोपहर का भोजन मुफ्त दिया जाता है। हरिद्वार जनपद में कुल 914 प्राइमरी और जूनियर स्कूल हैं, जिनमें करीब 1.25 लाख छात्र छात्राएं इस योजना से लाभान्वित होते हैं। चावल न मिलने से कई स्कूलों की रसोई का चूल्हा ही नहीं जल रहा है। 80 प्रतिशत स्कूलों में नवंबर का पूरा महीना चावल के इंतजार में ही बीत गया। कुछ स्कूलों में शिक्षक अपने दम पर उधार के सहारे भोजन खिला रहे हैं।
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स्कूलों में मिड डे मिल पर संकट सिर्फ नवंबर माह में ही नहीं रहा, कुछ स्कूलों में अक्तूबर के महीने में भी चावल नहीं पहुंच सका। ताज्जुब की बात यह है कि सवा लाख छात्र छात्राओं से जुड़ी इस योजना में लापरवाही की जिम्मेदारी कोई लेने को तैयार नहीं है। शिक्षा विभाग इसके लिए पूर्ति विभाग को जिम्मेदार ठहरा रहा है तो पूर्ति विभाग पीछे से ही चावल न आने की मजबूरी जता रहे हैं।
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हर महीने जाती है डिमांड
सर्व शिक्षा अभियान कार्यालय की ओर से हर महीने राशन की डिमांड पूर्ति विभाग को भेजी जाती है। विभाग अपनी औपचारिकताएं पूरी कर सीनियर मार्केटिंग इंस्पेक्टर को भेजता है। इसके बाद राशन डीलरों की सूची शिक्षा विभाग को भेजी जाती है। शिक्षा विभाग ये तय करता है कि किस स्कूल में कौन राशन डीलर चावल भेजेगा।
विभाग की ओर से हर महीने चावल की डिमांड पूर्ति विभाग को समय से भेजी जा रही है, लेकिन चावल की सप्लाई नहीं हो पा रही है। जिस कारण स्कूलों में मिडडे मिल बनाने में दिक्कत आ रही है।
- दीपक पंवार, प्रभारी मिड डे मिल, सर्व शिक्षा अभियान हरिद्वार