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जीवन जीना सीखें और सिखाएं : पंड्या
अमर उजाला ब्यूरो हरिद्वार
Updated Thu, 11 May 2017 10:41 PM IST
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शांतिकुंज प्रमुख डा. प्रणव पंड्या ने कहा कि सही अर्थों में जीवन जीना सीख जाएं तो परिवार, समाज के साथ राष्ट्र की प्रगति में योगदान दे सकते हैं। गायत्री परिवार देशभर में विभिन्न प्रशिक्षण शिविरों और आंदोलनों के माध्यम से विद्यार्थियों व युवाओं को प्रेरित कर रहा है। शिक्षक इस दिशा की प्रथम कड़ी है।
डा. पंड्या बृहस्पतिवार को शांतिकुंज में आयोजित भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा के ओड़िशा प्रांत के जिला व तहसील समन्वयकों व शिक्षकों की दो दिवसीय शिक्षक गरिमा शिविर को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने विद्यालय में संस्कृति मंडलों का गठन के माध्यम से युवाओं में संस्कृति, संस्कार एवं सत्प्रवृत्तियों के संवर्द्घन के लिए विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने शांतिकुंज की ओर से चलाए जा रहे आंदोलनों. वृक्षारोपण, बाल संस्कार, कन्या कौशल शिविर आदि का जिक्र करते हुए इनमें सक्रिय भागीदारी करने का आवाहन किया। इससे पहले शांतिकुंज के वरिष्ठ कार्यकर्त्ता केसरी कपिल ने कहा कि चरित्रवान शिक्षक ही राष्ट्र निर्माता छात्र का निर्माण करते हैं।
भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा प्रकोष्ठ के प्रभारी प्रदीप दीक्षित ने बताया कि गायत्री परिवार विद्यार्थियों और युवाओं को भारतीय संस्कृति की ओर आकर्षित करने के उद्देश्य से वर्ष 1994 से देशभर में प्रत्येक वर्ष भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा आयोजित करता आ रहा है। इसके लिए प्रत्येक राज्य में अलग-अलग टीमें बनाई गई हैं। इस अवसर पर डा. पीडी गुप्ता, सीडी थपलियाल, मोहन सिंह भदौरिया, राजेश मिश्रा, पीसी वर्मा आदि मौजूद थे।
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डा. पंड्या बृहस्पतिवार को शांतिकुंज में आयोजित भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा के ओड़िशा प्रांत के जिला व तहसील समन्वयकों व शिक्षकों की दो दिवसीय शिक्षक गरिमा शिविर को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने विद्यालय में संस्कृति मंडलों का गठन के माध्यम से युवाओं में संस्कृति, संस्कार एवं सत्प्रवृत्तियों के संवर्द्घन के लिए विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने शांतिकुंज की ओर से चलाए जा रहे आंदोलनों. वृक्षारोपण, बाल संस्कार, कन्या कौशल शिविर आदि का जिक्र करते हुए इनमें सक्रिय भागीदारी करने का आवाहन किया। इससे पहले शांतिकुंज के वरिष्ठ कार्यकर्त्ता केसरी कपिल ने कहा कि चरित्रवान शिक्षक ही राष्ट्र निर्माता छात्र का निर्माण करते हैं।
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भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा प्रकोष्ठ के प्रभारी प्रदीप दीक्षित ने बताया कि गायत्री परिवार विद्यार्थियों और युवाओं को भारतीय संस्कृति की ओर आकर्षित करने के उद्देश्य से वर्ष 1994 से देशभर में प्रत्येक वर्ष भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा आयोजित करता आ रहा है। इसके लिए प्रत्येक राज्य में अलग-अलग टीमें बनाई गई हैं। इस अवसर पर डा. पीडी गुप्ता, सीडी थपलियाल, मोहन सिंह भदौरिया, राजेश मिश्रा, पीसी वर्मा आदि मौजूद थे।
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