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मन को नियंत्रित और एकाग्र रखें युवा: प्रणव पंड्या
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देव संस्कृति विश्वविद्यालय में मृत्युंजय सभागार में गीता कध कक्षा में उपस्थित छात्राएं ।
- फोटो : HARIDWAR
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अपनी मनोकामनाओं को नियंत्रित करने वाले को प्राज्ञ कहते हैं। आज मनुष्य मानसिक विकार का शिकार हो गया है, जिसके कारण व्यक्ति में अस्थिरता आ गई है। उसका मन और चित्त चंचल प्रवृत्ति का हो गया है। इसलिए व्यक्ति बाधाओं से घिरता जा रहा है। ऐसे में जरूरी है कि व्यक्ति अपने मन को नियंत्रित करे।
ये बातें देव संस्कृति विश्वविद्यालय के कुलाधिपति डॉ. प्रणव पंड्या ने विश्वविद्यालय के मृत्युंजय सभागार में गीता की कक्षा में विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कही। उन्होंने गीता के श्लोक के माध्यम से मन को एकाग्र करने की विधि बताई। उन्होंने कहा कि अपनी बुद्धि और विवेक का प्रयोग करना चाहिए। उन्होंने छत्रपति शिवाजी और औरंगजेब के उदाहरण देते हुए बताया कि शिवाजी का जीवन तपस्वी और योगी का जीवन था और औरंगजेब भोगी और आसक्त था। हमें शिवाजी के व्यक्तित्व से प्रेरणा लेनी चाहिए। उन्होंने कनाडा प्रवास से लौटे डॉ. शिवनारायण प्रसाद और संदीप कुमार का भी स्वागत किया।
इसके पूर्व विश्वविद्यालय के कुलपति शरद पारधी ने उनका स्वागत किया। इस दौरान प्रतिकुलपति डॉ चिन्मय पंड्या, कुलसचिव बलदाऊ देवांगन के अलावा सभी विभागों के विभागाध्यक्ष, शिक्षक और छात्र-छात्राओं सहित शांतिकुंज के कार्यकर्ता मौजूद रहे।
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ये बातें देव संस्कृति विश्वविद्यालय के कुलाधिपति डॉ. प्रणव पंड्या ने विश्वविद्यालय के मृत्युंजय सभागार में गीता की कक्षा में विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कही। उन्होंने गीता के श्लोक के माध्यम से मन को एकाग्र करने की विधि बताई। उन्होंने कहा कि अपनी बुद्धि और विवेक का प्रयोग करना चाहिए। उन्होंने छत्रपति शिवाजी और औरंगजेब के उदाहरण देते हुए बताया कि शिवाजी का जीवन तपस्वी और योगी का जीवन था और औरंगजेब भोगी और आसक्त था। हमें शिवाजी के व्यक्तित्व से प्रेरणा लेनी चाहिए। उन्होंने कनाडा प्रवास से लौटे डॉ. शिवनारायण प्रसाद और संदीप कुमार का भी स्वागत किया।
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इसके पूर्व विश्वविद्यालय के कुलपति शरद पारधी ने उनका स्वागत किया। इस दौरान प्रतिकुलपति डॉ चिन्मय पंड्या, कुलसचिव बलदाऊ देवांगन के अलावा सभी विभागों के विभागाध्यक्ष, शिक्षक और छात्र-छात्राओं सहित शांतिकुंज के कार्यकर्ता मौजूद रहे।
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