फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Haridwar News ›   kalyan dev to make Hindi welfare research backs

कल्याण देव चाहते थे हिंदी शोध पीठ बनाना

Mon, 27 Feb 2017 10:23 PM IST
कौशल सिखौला हरिद्वार
कौशल सिखौला हरिद्वार Updated Mon, 27 Feb 2017 10:23 PM IST
विज्ञापन
हिंदी के उत्थान के लिए सत्यज्ञान निकेतन के स्वामी सत्यदेव परिव्राजक ने अपना भव्य आश्रम काशी नागरी प्रचारिणी सभा काशी को सौंप दिया था। उन्हें क्या मालूम था कि उनके दान के करीब 80 वर्ष बाद यह संस्था बिकने के कगार पर पहुंच जाएगी। प्रबंधक सर्वजीत न बचाते तो करोड़ों की यह भूमि कब से बिक गई होती।   
विज्ञापन

 
वीतराग स्वामी कल्याण देव महाराज जिस समय इस संस्था पर प्रचारिणी सभा की सहमति से हिंदी शोध पीठ की स्थापना करना चाहते थे तब दुर्भाग्य से वे संसार से ही विदा हो गए।   वर्ष 1934 में गंगा नहर के तट पर स्थित पंद्रह बीघा भूमि पर स्वामी सत्यदेव महाराज सत्यज्ञान निकेतन बनाकर रह रहे थे। उन्होंने चाहा कि उनके जीवन काल में यह संस्था हिंदी के उत्थान के लिए काशी नागरी प्रचारिणी सभा के पास चली जाए। प्रचारिणी सभा के तत्कालीन अध्यक्ष सुधाकर पांडे को उन्होंने यह कीमती भूमि सौंप दी। इस भूमि पर अनेक वृक्ष और बगीचे मौजूद थे। प्रचारिणी सभा ने यहां करीब एक हजार पुस्तकों का पुस्कालय भी स्थापित किया। संस्था की दीवारों पर काशी नागरिक प्रचारिणी सभा का नाम आज भी उकेरा हुआ है। कालांतर में यह समूचा क्षेत्र भवनों से भरता चला गया। आजादी के बाद यहां जबरदस्त विस्तार हुआ और आज यह क्षेत्र आर्यनगर नाम से जाना जाता है।
विज्ञापन


यह क्षेत्र इस समय बेहद कीमती हो गया है। काशी नागरिक प्रचारिणी सभा ने प्रबंधक के रुप में सर्वजीत मिश्रा को यहां का कामकाज सौंप दिया था। वे अपने दम पर संस्था को चलाते रहे। इसी बीच आर्यनगर के खचाखच भर जाने पर भू-माफियाओं की निगाहें इस भूमि पर पड़ गई। नेताओं के काकस ने प्रापर्टी डीलरों के साथ मिलकर अनेक बार संस्था को हड़पना चाहा। सर्वजीत मिश्रा दीवार बनकर सामने आ गए। उन्हें अनेक प्रलोभन भी दिए गए, लेकिन मिश्रा नहीं माने। इस बीच सुधाकर पांडे नहीं रहे तथा दिल्ली में रहने वाले उनके पुत्रों पदमाकर पांडे एवं कुसुमाकर पांडे ने संस्था के काम में रुचि लेना बंद कर दिया। इस प्रकार संस्था का जिम्मा सर्वजीत पर आ गया और वे लगातार संघर्ष करते रहे।       
विज्ञापन
विज्ञापन


उन पर पार न पाते देख आह्वान अखाड़े के एक श्रीमहंत शिवशंकर गिरि ने कुछ लोगों के साथ मिलकर संस्था पर अपना अधिकार जता दिया। इस संबंध में उन्होंने हरिद्वार के जिला न्यायाधीश की अदालत में सन 2000 में वाद दायर किया। जिसमें कहा गया था कि इस संस्था को नागरी प्रचारिणी सभा के सिद्धांतों पर चलाना चाहते हैं। न्यायालय में उन्हें विजय मिली तो पदमाकर पांडे सन 2004 में नैनीताल उच्च न्यायालय में जिला न्यायालय के खिलाफ वाद दायर किया। उच्च न्यायालय ने जिला न्यायालय का आदेश निरस्त कर पदमाकर पांडे को ही संस्था का वैध उत्तराधिकारी माना। उच्च न्यायालय के आदेश के विरुद्घ श्रीमहंत शिवशंकर गिरि आदि सर्वोच्च अदालत पहुंचे। सर्वोच्च न्यायालय ने माना कि शिवशंकर गिरि संस्था को बचाने का प्रयत्न कर रहे हैं। उच्चतम न्यायालय ने उच्च न्यायालय के निर्णय को अमान्य कर शिवशंकर गिरि की याचिका स्वीकार कर ली। उच्चतम न्यायालय ने सुनवाई करते हुए आदेश दिया कि यह मामला पुन: नए सिरे से हरिद्वार जिला न्यायालय में शुरू किया जाए। शिवशंकर गिरि ने बताया कि वे शीघ्र उच्चतम न्यायालय का संदर्भ लेकर जिला न्यायालय में वाद दायर करेंगे।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed