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जमीन के बदले मांगी नौकरी या बढ़ा मुआवजा
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डीएम दीपेंद्र चौधरी की अध्यक्षता में कलक्ट्रेट सभागार में रुड़की-देवबंद रेल लाइन के संबंध में आयोजित बैठक में किसानों ने जमीन के बदले परिवार के एक सदस्य को नौकरी नहीं मिलने नाराजगी जताई। साथ ही कहा कि अगर नौकरी या वर्तमान सर्किल रेट के हिसाब से उन्हें जमीन का मुआवजा नहीं दिया मिला तो आंदोलन तेज किया जाएगा और रेल लाइन नहीं बिछने दी जाएगी। यही नहीं किसानों ने 30 अगस्त को मंगलौर स्थित गुड़ मंडी में महापंचायत कर हाईवे जाम करने की चेतावनी दी है।
शनिवार को आयोजित बैठक में किसान संगठनों के प्रतिनिधियों ने कहा कि रुड़की-देवबंद रेल लाइन के लिए वर्ष 2011 में प्रदेश के चार गांवों भिस्तीपुर, पनियाला, रहीमपुर और शाहलापुर में जमीन का अधिग्रहण किया गया था। उस समय जमीन अधिग्रहण के बदले परिवार के एक सदस्य को रेलवे में नौकरी दिए जाने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन अभी तक किसी को नौकरी नहीं दी गई। यही नहीं अब तो रेलवे की ओर से नौकरी देने से इनकार किया जा रहा है। लिहाजा किसानों ने नौकरी के बदले वर्तमान सर्किल रेट के अनुसार, जमीन का मुआवजा दिलाने की मांग की। रेलवे की ओर से उपस्थित उप मुख्य अभियंता (निर्माण) शैलेंद्र कुमार ने बताया कि जमीन अधिग्रहण एक्ट के अनुसार उस किसान के परिवार को नौकरी देने का प्रावधान है, जो अधिग्रहण के बाद भूमिहीन हो गया हो।
उन्होंने कहा कि रेलवे के प्रावधान के अनुसार पुराना मुआवजा बढ़ाकर नहीं दिया जा सकता है। इस संबंध में कुछ किसानों ने न्यायालय में वाद भी दायर किया है। डीएम दीपेंद्र चौधरी ने कहा कि प्रशासन किसानों के हितों की अनदेखी नहीं होनेे देगा। उन्होंने किसानों से मांगों का प्रस्ताव बनाकर देने को कहा। साथ ही आश्वासन दिया कि रेलवे बोर्ड को किसानों की समस्याओं और मांगों को भेजकर उनका निराकरण कराएगा। उन्होंने किसानों से जनहित में परियोजना को बाधा न पहुंचाने का अनुरोध किया। वहीं, बैठक में भारतीय किसान यूनियन के मंडल अध्यक्ष संजय चौधरी, जिलाध्यक्ष विजय शास्त्री ने किसानों की मांगें पूरी नहीं होने पर रेलवे परियोजना को पूरा नहीं होने देने की चेतावनी दी।
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शनिवार को आयोजित बैठक में किसान संगठनों के प्रतिनिधियों ने कहा कि रुड़की-देवबंद रेल लाइन के लिए वर्ष 2011 में प्रदेश के चार गांवों भिस्तीपुर, पनियाला, रहीमपुर और शाहलापुर में जमीन का अधिग्रहण किया गया था। उस समय जमीन अधिग्रहण के बदले परिवार के एक सदस्य को रेलवे में नौकरी दिए जाने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन अभी तक किसी को नौकरी नहीं दी गई। यही नहीं अब तो रेलवे की ओर से नौकरी देने से इनकार किया जा रहा है। लिहाजा किसानों ने नौकरी के बदले वर्तमान सर्किल रेट के अनुसार, जमीन का मुआवजा दिलाने की मांग की। रेलवे की ओर से उपस्थित उप मुख्य अभियंता (निर्माण) शैलेंद्र कुमार ने बताया कि जमीन अधिग्रहण एक्ट के अनुसार उस किसान के परिवार को नौकरी देने का प्रावधान है, जो अधिग्रहण के बाद भूमिहीन हो गया हो।
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उन्होंने कहा कि रेलवे के प्रावधान के अनुसार पुराना मुआवजा बढ़ाकर नहीं दिया जा सकता है। इस संबंध में कुछ किसानों ने न्यायालय में वाद भी दायर किया है। डीएम दीपेंद्र चौधरी ने कहा कि प्रशासन किसानों के हितों की अनदेखी नहीं होनेे देगा। उन्होंने किसानों से मांगों का प्रस्ताव बनाकर देने को कहा। साथ ही आश्वासन दिया कि रेलवे बोर्ड को किसानों की समस्याओं और मांगों को भेजकर उनका निराकरण कराएगा। उन्होंने किसानों से जनहित में परियोजना को बाधा न पहुंचाने का अनुरोध किया। वहीं, बैठक में भारतीय किसान यूनियन के मंडल अध्यक्ष संजय चौधरी, जिलाध्यक्ष विजय शास्त्री ने किसानों की मांगें पूरी नहीं होने पर रेलवे परियोजना को पूरा नहीं होने देने की चेतावनी दी।
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