{"_id":"56ed9d284f1c1bd3618b4f6f","slug":"jnu-insulting-the-country-jagadguru","type":"story","status":"publish","title_hn":"जेएनयू में हुआ देश का अपमान: जगद्गुरु","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जेएनयू में हुआ देश का अपमान: जगद्गुरु
ब्यूूराो/ अमर उजाला, हरिद्वार
Updated Sun, 20 Mar 2016 12:10 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हरिद्वार। जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी राजराजेश्वराश्रम महाराज ने कहा कि जेएनयू में देश विरोधी नारे लगाए जाना और आतंकवादियों को महिमा मंडित किया जाना भारत की अस्मिता, गरिमा और संविधान का अपमान है। इस तरह की गतिविधि देश में कदापि बर्दाश्त नहीं की जा सकती।
विज्ञापन
शनिवार को जारी एक बयान में जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी राजराजेश्वराश्रम ने कहा कि सनातन काल से ही देश में देव और दानव दो प्रवृतियां रही है। आज भी देश में दोनों ही संस्कृति विद्यमान है। एक संस्कृति के संवाहक वे लोग हैं जो इस देश को अपनी मातृभूमि मानते हैं और पूजते हैं। दूसरे वे लोग हैं जो इस देश में रहते हैं, देश का ही खाते हैं और इसके बाद भी इस देश को गाली देते हैं।
विज्ञापन
कोई भारत माता को डायन कहता है तो कोई भारत माता की जय बोलना भी पाप समझता है। जेएनयू प्रकरण की चर्चा करते हुए शंकराचार्य ने कहा कि वहां जिस तरह से कन्हैया नाम के कंस ने भारत माता के विरोध में नारे लगाए और आतंकवादियों को महिमा मंडित किया यह निश्चित रूप से देश की अस्मिता, गरिमा और संविधान के खिलाफ है। जेएनयू में लंबे समय से पल रहे इस पाप को समाप्त करने के लिए भारत सरकार को अपनी संवैधानिक इच्छा शक्ति के आधार पर कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए ताकि भविष्य में इस तरह की राष्ट्रविरोधी गतिविधि करने का कोई साहस न जुटा सकें।
विज्ञापन