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डिजिटल इंडिया में इंटरनेट नहीं, जूते चले
ब्यूरो, अमर उजाला/रुड़की
Updated Wed, 08 Jul 2015 03:02 AM IST
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जिले में चल रहे डिजिटल इंडिया सप्ताह कार्यक्रम के तहत मंगलवार को सालियर गांव में उस समय ग्रामीणों ने जमकर हंगामा किया। जब इंटरनेट में न तो कनेक्टिविटी आई और न ही उनकी समस्याएं सुनने के लिए अधिकारी पहुंचे। अपनी समस्याएं सुनाने के लिए करीब 300 ग्रामीण पंचायत घर में मौजूद थे।
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ग्रामीणों ने प्रशासन पर गांववालों की अनदेखी करने का आरोप लगाया। इसके बाद मामला इतना बढ़ा कि दो पक्षों में जमकर चप्पल-जूते चले। जिले में इन दिनों डिजिटल वीक के कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। कई दिन से प्रचार किया जा रहा था कि मंगलवार को सालियर गांव में इस सप्ताह के तहत डिजिटल कार्यक्रम का आयोजन पंचायत घर में किया जाएगा।
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इसके लिए सोमवार सुबह से ही बड़ी संख्या में ग्रामीण, जिनमें काफी महिलाएं भी शामिल थीं पंचायत घर में एकत्र हो गई। डिजिटल इंडिया कार्यक्रम के तहत स्क्रीन आदि बीबीएनएल के कर्मचारियों ने लगा दी थी। ग्रामीणों को इंतजार इस बात का था कि प्रशासन के अधिकारी भी वहां आएंगे और उनकी समस्याएं सुनेंगे।
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लेकिन, जिले स्तर से कोई अधिकारी नहीं आया। रुड़की की खंड विकास अधिकारी शिवरानी चौहान, लेखपाल और ग्राम विकास सचिव करीब 11 बजे आए। उन्होंने बीबीएनएल के कर्मचारियों से बातचीत की। बताया गया कि इंटरनेट में कनेक्टिविटी नहीं आ रही है।
इस कारण शिवरानी चौहान भी वहां थोड़ी देर बैठकर चलीं आई। इस पर ग्रामीण भड़क उठे। अंबेडकर सर्व समाज समिति के अध्यक्ष करम सिंह बर्मन, बिजेंद्र सैनी आदि के नेतृत्व में ग्रामीणों ने प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन किया। आरोप था कि उन्हें मौके पर ही समस्याओं के निराकरण कराने, इंटरनेट पर उनकी मुख्यमंत्री से बात कराने की बात कही गई थी, जिस कारण बहुत से कामकाजी लोग अपना काम छोड़कर पंचायत घर में कई घंटे से जमा थे।
ग्रामीणों ने सड़क जाम करने की चेतावनी भी दी, हालांकि बाद में उन्होंने जाम नहीं लगाया। आरोप-प्रत्यारोप का मामला ग्रामीणों के दो पक्षों में व्यक्तिगत झगड़े में बदल गया। दो गुटों में जमकर मारपीट हुई और जूते-चप्पल भी चले। कुछ ग्रामीणों ने बीच-बचाव कर उन्हें शांत कराया।
सूचना पर पुलिस भी मौके पर पहुंची, लेकिन तब तक मामला शांत हो चुका था। प्रदर्शनकारियों में जनार्दन प्रेमी, मोनी कुमार, मुजम्मिल, हनीफ, परवेज असलम, अरविंद, खुर्शीद अहमद आदि शामिल थे।
बोले ग्रामीण
गांव में समस्याओं का अंबार है। हमें बताया गया था कि कई प्रशासनिक अधिकारी पंचायत घर में आएंगे। पूरा गांव अतिक्रमण की चपेट में हैं। कब्जे हटवाकर रास्तों को चौड़ा कराया जाना चाहिए। - रफल सिंह सैनी।
चार साल से मेरा राशन कार्ड नहीं बना। ग्राम पंचायत सचिव लगातार चक्कर कटवा रहा है। आज समस्या अधिकारियों को सुनाते, लेकिन कोई आया ही नहीं। -मोहम्मद अमजद अली।
गांव में हमारे घर के सामने पांच साल से सड़क नहीं बनी। आज हमें बताया गया कि सीएम से बात कराकर समस्या का समाधान कराया जाएगा। लेकिन, यहां तो कोई सुनवाई हुई ही नहीं। - मोहम्मद शहजान।
किसानों को बर्बाद हुई फसल के मुआवजे का निस्तारण नहीं किया जा रहा है। यही समस्या अधिकारियों को बताते, लेकिन कोई सुनवाई करने नहीं आया। - तरुण कुमार।
बोले अधिकारी
समस्याएं सुनने की तो कोई बात नहीं थी। हमें तो बीबीएनएल के अफसरों ने कार्यक्रम की सूचना दी थी, जिस पर पंचायत घर में गई थी। बाकी कोई सूचना नहीं है। - शिवरानी चौहान, खंड विकास अधिकारी, रुड़की।