फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   haridwar news: 'I don't want begging, buy masks and socks'

हरिद्वार: मांगने वालों को आइना दिखा रहा विजय, कहता है- ‘मुझे भीख नहीं चाहिए, मास्क व मौजे खरीद लो’

Thu, 26 Aug 2021 03:59 PM IST
देहरादून ब्यूरो न्यजू डेस्क, अमर उजाला, हरिद्वार
न्यजू डेस्क, अमर उजाला, हरिद्वार Published by: देहरादून ब्यूरो Updated Thu, 26 Aug 2021 03:59 PM IST
सार

विजय बेरोजगार लोगों के लिए प्रेरणा और भीख मांगने वालों के लिए आइना है। हरकी पैड़ी से लेकर कनखल और ज्वालापुर की सड़कों पर घूमकर मास्क और मौजे बेचकर गुजर बसर करता है।

विज्ञापन
haridwar news: 'I don't want begging, buy masks and socks'
विजय पाल - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

धर्मनगरी की सड़कों पर कंधे पर थैला टांगे घूमने वाले दिव्यांग विजय पाल को लोग अच्छी तरह जानते और पहचानते भी हैं। विजय दिव्यांगता से हारने के बजाय उससे लड़ रहा है।

विज्ञापन


वह बेरोजगार लोगों के लिए प्रेरणा और भीख मांगने वालों के लिए आइना है। हरकी पैड़ी से लेकर कनखल और ज्वालापुर की सड़कों पर घूमकर मास्क और मौजे बेचकर गुजर बसर करता है। वह बेहद स्वाभिमानी और किसी के आगे हाथ नहीं फैलाता है। उसकी खुद्दारी का हर कोई कायल भी है।
विज्ञापन


26 साल का विजय पाल मुरादाबाद जिले के कांठ का रहने वाला है। एक दशक से हरिद्वार में ही रहता है। हरिद्वार में ही आठ साल पहले सड़क दुर्घटना का शिकार हो गया। इससे उसके बायीं हाथ और पैर ने काम करना बंद कर दिया। दुर्घटना से पहले वह हरकी पैड़ी के आसपास घूमकर प्रसाद और श्रृंगार का सामान बेचता था।
विज्ञापन
विज्ञापन


दुर्घटना के बाद दिव्यांग होने पर भी जिंदगी से हार मानकर भीख नहीं मांगी। हरकी पैड़ी और आसपास में सैकड़ों बच्चे भीख मांगते हैं। इनमें जवान लोग भी शामिल हैं।

सड़कों पर घूम-घूम बेचता है सामान

विजय पाल ने दिव्यांगता से लड़ते हुए सीजन के हिसाब से हरकी पैड़ी और हरिद्वार की सड़कों पर घूम-घूम सामान बेचना शुरू किया। यह सिलसिला बीते आठ सालों से जारी है। विजय पाल एक पैर घसीटकर चलता है।

कई श्रद्धालु दया पात्र समझकर उसे भीख देने की कोशिश भी करते हैं। वह भीख नहीं लेता। दया दिखाने वालों से सामान खरीदने का आग्रह करता है। कोरोना कर्फ्यू में जब बड़े से बड़े व्यापारी घर बैठ गए थे, विजय पाल ने मास्क और सैनिटाइजर की छोटी शीशियां बेचकर पैसे जुटाए।

15 दिन में जाता है घर
 विजय पाल के परिवार में मां-पिता और पांच बहनों के अलावा पत्नी और छोटा बेटा है। पूरे परिवार की जिम्मेदारी विजय पाल के कंधों पर है। परिवार कांठ में रहता है। वह 15 दिन में एक बार घर जाता है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed