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कैसे लड़ेंगे कुपोषण से जंग, पोषाहार बांटने में हाथ है तंग

Tue, 19 Apr 2022 08:15 PM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Tue, 19 Apr 2022 08:15 PM IST
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How to fight against malnutrition, hand in hand distribution is tight
सरकार की ओर से कुपोषण मुक्त भारत के लिए योजनाएं तो चलाई जा रही हैं। पर जिनको कुपोषण से जंग लड़ने की जिम्मेदार दी गई है। उन आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के हाथ तंग है। क्योंकि सरकार की ओर से पांच-पांच माह तक का पोषाहार के लिए बजट नहीं भेजा गया है। उधार में अब तक पोषाहार बांटा जा रहा है।
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महिला सशक्तीकरण एवं बाल विकास विभाग सरकार की ओर से टेक होम राशन (टीएचआर) योजना चलाई जा रही है। कुपोषण, रक्ताल्पता, शिशु मृत्यु दर जैसी समस्याओं के समाधान के उद्देश्य से संचालित टीएचआर योजना का संचालन आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से किया जा रह है। आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से गर्भवती महिलाओं, धात्री महिलाओं और छह साल तक के बच्चों को कुपोषण से जंग लड़ने के लिए टेक पोषाहार दिया जाता है। योजना के तहत हर माह जनपद की करीब 3200 आंगनबाड़ी कार्यकर्ता की ओर से लाभार्थियों को पोषाहार बांटा जाता है।
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सरकार की ओर से पोषाहार के लिए आंगनबाड़ी केंद्रों पर खुलवाए गए माता समितियों के खातों में बजट जारी करने में खूब कंजूसी की जा रही है। हालत यह है कि पांच-पांच महीने से केंद्रों पर खोले गए माता समितियों के खातों में पोषाहार के लिए पैसा नहीं डाला जा रहा है। जिससे कार्यकर्ताओें को उधार में पोषाहार बांटना पड़ रहा है। किसी तरह से अप्रैल तक का तो पोषाहार कार्यकर्ताओं ने बांट दिया है। पर अब पैसा नहीं दिए जाने से उधार देने वाले वाले भी आंख दिखा रहे हैं। इसके कारण मई से मिलने वाले पोषाहार को लेकर संकट खड़ा हो सकता है। संवाद
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ये मिलता है पोषाहर
टेक होम राशन योजना के तहत दिए जाने वाले पोषाहार में दाल, गुड़, गजक, दलिया, आईयोडीनयुक्त नमक का पैकेट दिया जाता है। ये पोषाहार आंगनबाड़ी केंद्रों पर हर महीने की पांच तारीख को बच्चों का वजन करने के बाद दिया जाता है।

पहले बजट के अभाव में माता-समितियों के खातों में पोषाहार का पैसा नहीं भेजा जा सका था। अब पैसा ट्रांसफर करने के लिए एक पोर्टल शुुरू किया गया। पर उसमें तकनीकी दिक्कत आने से पैसा ट्रांसफर नहीं हो पा रहा है। उम्मीद है कि मई के प्रथम सप्ताह में पोषाहार का पैसा ट्रांसफर हो जाएगा। जिससे पोषाहार बांटने में कोई दिक्कत नहीं आएगी।
- सुलेखा, प्रभारी, जिला कार्यक्रम अधिकारी
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