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देखरेख के लिए दिया मकान, कर लिया कब्जा
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मकान को देखरेख के लिए देना भवन स्वामी को भारी पड़ गया। देखरेख करने वाले व्यक्ति ने उस पर कब्जा कर किरायेदार भी रख लिया। पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है।
सिडकुल थाना प्रभारी प्रमोद उनियाल के मुताबिक विद्या सागर निवासी धीरवाली ने शिकायत देकर बताया कि उसने गांव रावली महदूद निवासी मांगेराम पाल निवासी रावली महदूद से एक लाख तीस हजार रुपये नकद देकर एक प्लाट का बैनामा कराकर कब्जा प्राप्त किया था। विद्या सागर ने बताया कि उसने प्लाट पर स्टेट बैंक ऑफ इंडिया से 9 लाख 85 हजार रुपये का ऋण 15 वर्ष के लिए लिया था।
मकान बनवाने के दौरान मांगेराम पाल से अच्छी जान पहचान हो गई थी। इसलिए मकान बनाने के बाद देखरेख करने की जिम्मेदारी मांगेराम पाल को सौंप दी। बताया कि वह अपने अन्य व्यवसाय कार्यों आदि में व्यस्त हो गया था और राजस्व रिकार्ड में भी अपना नाम अंकित नही करा पाया था।
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विद्यासागर का कहना है कि मांगेराम पाल से जब भी वह मोबाइल फोन पर मकान के बारे में पता करता रहता था तो मांगेराम पाल सब ठीक होने की बात कहकर फोन काट देता था। जब विद्यासागर अपने मकान पर गया तो वहां पर रमेश अपने परिवार के साथ रहता मिला। पूछने पर रमेश ने बताया कि मकान मांगेराम पाल ने किराये पर दे रखा है। जब विद्यासागर ने इस मामले में मांगेराम पाल से बातचीत की तो उसने गाली-गलौच व अभद्रता करते हुए जान से मरवाने की धमकी देते हुए गंगनहर में फिकवाने की धमकी दी। आरोप है कि आरोपी मांगेराम पाल ने अपने परिजनों के नाम मकान की रजिस्ट्री कर दी। थाना प्रभारी प्रमोद उनियाल ने बताया कि मुकदमा दर्ज कर मामले की जांच की जा रही है।
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सिडकुल थाना प्रभारी प्रमोद उनियाल के मुताबिक विद्या सागर निवासी धीरवाली ने शिकायत देकर बताया कि उसने गांव रावली महदूद निवासी मांगेराम पाल निवासी रावली महदूद से एक लाख तीस हजार रुपये नकद देकर एक प्लाट का बैनामा कराकर कब्जा प्राप्त किया था। विद्या सागर ने बताया कि उसने प्लाट पर स्टेट बैंक ऑफ इंडिया से 9 लाख 85 हजार रुपये का ऋण 15 वर्ष के लिए लिया था।
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मकान बनवाने के दौरान मांगेराम पाल से अच्छी जान पहचान हो गई थी। इसलिए मकान बनाने के बाद देखरेख करने की जिम्मेदारी मांगेराम पाल को सौंप दी। बताया कि वह अपने अन्य व्यवसाय कार्यों आदि में व्यस्त हो गया था और राजस्व रिकार्ड में भी अपना नाम अंकित नही करा पाया था।
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विद्यासागर का कहना है कि मांगेराम पाल से जब भी वह मोबाइल फोन पर मकान के बारे में पता करता रहता था तो मांगेराम पाल सब ठीक होने की बात कहकर फोन काट देता था। जब विद्यासागर अपने मकान पर गया तो वहां पर रमेश अपने परिवार के साथ रहता मिला। पूछने पर रमेश ने बताया कि मकान मांगेराम पाल ने किराये पर दे रखा है। जब विद्यासागर ने इस मामले में मांगेराम पाल से बातचीत की तो उसने गाली-गलौच व अभद्रता करते हुए जान से मरवाने की धमकी देते हुए गंगनहर में फिकवाने की धमकी दी। आरोप है कि आरोपी मांगेराम पाल ने अपने परिजनों के नाम मकान की रजिस्ट्री कर दी। थाना प्रभारी प्रमोद उनियाल ने बताया कि मुकदमा दर्ज कर मामले की जांच की जा रही है।