फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   harish rawat will face challenge in haridwar election 2019

पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के रास्ते में इस बार स्थानीय प्रत्याशी की मांग का स्पीड ब्रेकर

Sat, 05 Jan 2019 12:34 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal राजेश शर्मा, अमर उजाला, हरिद्वार
राजेश शर्मा, अमर उजाला, हरिद्वार Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Sat, 05 Jan 2019 12:34 PM IST
विज्ञापन
harish rawat will face challenge in haridwar election 2019
harish rawat

वर्ष 2009 में हरिद्वार से सांसद चुने गए और वर्ष 2014 में अपनी पत्नी को यहां से प्रत्याशी बनाने वाले पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत को इस बार स्थानीय दावेदारों के रूप में बड़ी चुनौती मिल रही है। कांग्रेस के कई स्थानीय नेता इस बार चाहते हैं कि टिकट किसी स्थानीय को मिले इसलिए रावत की सक्रियता इन नेताओं को रास नहीं आ रही है। लोकल प्रत्याशी का दावा रावत की राह में स्पीड ब्रेकर बनकर सामने आ रहा है। चुनाव लड़ेगा कौन यह तो अभी समय के गर्भ में है, लेकिन रावत की राह अपनी ही पार्टी में आसान नहीं दिख रही है।

विज्ञापन


अपनी मूल राजनीतिक भूमि अल्मोड़ा में लगातार हार का सामना करने के बाद हरीश रावत ने उत्तराखंड राज्य बनने पर पहले प्रदेश अध्यक्ष बनने के साथ ही हरिद्वार को अपनी कर्मभूमि बनाने का निर्णय ले लिया था। प्रदेश अध्यक्ष के रूप में रावत ने हरिद्वार में कांग्रेस की जमीन तैयार करने के लिए कड़ी मेहनत की थी। इसी का नतीजा रहा कि रावत ने वर्ष 2009 में हरिद्वार संसदीय सीट से चुनाव लड़ा और भारी अंतर से जीतने के बाद केंद्र में पहले राज्यमंत्री और बाद में कैबिनेट मंत्री चुने गए। यह रावत के डगमगाते राजनीतिक जीवन को हरिद्वार द्वारा दिया गया जीवनदान था जिसे वे खुद भी अपने भाषणों में स्वीकार करते हैं।
विज्ञापन


बाद में मुख्यमंत्री बनने पर यह माना जा रहा था कि हरिद्वार हमेशा के लिए उनकी कर्मभूमि बन जाएगी, लेकिन वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में वे हरिद्वार ग्रामीण तथा किच्छा दोनों ही सीट से चुनाव हारे तो हरिद्वार से उनकी राजनीतिक विदाई की चर्चा होने लगी। इसके बाद कई स्थानीय नेता चुनाव लड़ने की तैयारी भी करने लगे। हरिद्वार में कांग्रेस से काजी निजामुद्दीन, डॉ. संजय पालीवाल, ब्रह्मस्वरूप ब्रह्मचारी, अंबरीष कुमार समेत कई नेताओं को संभावित दावेदार के तौर पर देखा जा रहा है। इसी बीच फिर तेजी से बढ़ रही हरीश रावत की सक्रियता लोगों को बेचैन भी कर रही है। हालांकि इस बार स्थानीय प्रत्याशी की मांग उनके रास्ते में स्पीड ब्रेकर की तरह आ खड़ी हुई है।
विज्ञापन
विज्ञापन


उधर, पूर्व विधायक अंबरीष कुमार ने स्थानीय प्रत्याशी की मांग का समर्थन करते हुए कहा कि स्थानीय जनता की जरूरतों और क्षेत्र के विकास की मांग के हिसाब से स्थानीय प्रत्याशी ज्यादा मुफीद है। अगर स्थानीय प्रत्याशी आता है तो उसका स्वागत करेंगे। पार्टी हाईकमान से इस मांग को पुरजोर तरीके से उठाया जाएगा। प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. संजय पालीवाल ने भी स्थानीय प्रत्याशी की मांग को उचित बताया। कहा कि पार्टी जिसे भी प्रत्याशी बनाएगी उसका स्वागत किया जाएगा।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed