फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Haridwar News ›   Government intervention in charity

दान में अब शासन का दखल

Mon, 27 Feb 2017 10:31 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो हरिद्वार
अमर उजाला ब्यूरो हरिद्वार Updated Mon, 27 Feb 2017 10:31 PM IST
विज्ञापन

विज्ञापन
सुप्रीम कोर्ट ने हरिद्वार के प्रसिद्ध मनसा देवी और चंडी देवी मंदिरों में प्राप्त दान पर अब शासन के नियंत्रण को स्वीकार कर लिया है। हरिद्वार के डीएम और एसएसपी लिए जाने वाले दान पर निगरानी करेंगे। सुप्रीम कोर्ट ने नैनीताल हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के आदेश को मान्य कर दिया है। मंदिर समिति की सभी याचिकाएं सिरे से खारिज कर दी गईं।              

हरिद्वार के समाजसेवी जेपी बड़ोनी ने वर्ष 2011 में नैनीताल उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर की थी। इस याचिका में कहा गया था कि हरिद्वार की तीन प्रमुख यात्री बाहुल्य संस्थाएं लिए जाने वाले दान में भारी हेराफेरी करती है। ये संस्थाएं यात्री को दान की रसीद देने के बजाय दर्जनों गुल्लकों में धनराशि लेती रही हैं। जिसे संस्था के पदाधिकारी ठिकाने लगा देते हैं। नैनीताल उच्च न्यायालय ने शिकायत को सही पाया और तीन जनवरी 2012 को आदेश पारित किया था कि हरकी पैड़ी की प्रबंधकारिणी संस्था गंगा सभा, मनसा देवी मंदिर कमेटी तथा चंडी देवी मंदिर कमेटी तत्काल प्रभाव से गुल्लकें हटाएं। इनके स्थान पर दान देने वाले यात्रियों को बकायदा रसीद दी जाए। संस्थाओं के कार्यों में जिलाधिकारी एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक की उपस्थिति निर्धारित करे। ये दोनों अधिकारी इन संस्थाओं की नियमित बैठकों में भी या तो खुद भाग लें या अपने प्रतिनिधियों को भेजें। यदि संस्थाएं अनियमितताएं बरतती हैं तो तत्काल उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए। तब से सरकारी प्रतिनिधियों ने तीनों स्थलों से गुल्लकें हटवा दी।              
विज्ञापन


मनसा देवी और चंडीदेेवी मंदिर समिति उच्च न्यायालय के आदेश के विरुद्ध वर्ष-2012 में सर्वोच्च न्यायालय पहुंची। दोनों की याचिकाएं सुनवाई से पूर्व ही खारिज कर दी गई। तब दोनों कमेटियों ने तीन न्यायाधीशों की बैंच के सम्मुख याचिका दायर की। वे याचिकाएं भी निरस्त हो गई। चंडी देवी मंदिर समिति तो इसके बाद घर बैठ गई, लेकिन मनसा देवी कमेटी ट्रस्ट सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के सम्मुख 2013 में पहुंची। मुख्य न्यायाधीश से गुहार लगाई गई कि धार्मिक कार्यों में जुटी मनसा देवी को न्याय दिया जाए तथा नैनीताल उच्च न्यायालय का आदेश अमान्य कर दिया जाए। लंबी सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने 16 जनवरी को वादी तथा उसके अधिवक्ताओं को भी अपना पक्ष रखने को बुलाया। मंदिर समिति ने अलग-अलग बिंदु उठाते हुए चार याचिकाएं दायर की थी। जिन सभी पर विद्वान मुख्य न्यायाधीश ने सुनवाई की। न्यायाधीश ने किसी भी याचिका में दम नहीं पाया। सुनवाई में न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ भी मुख्य न्यायाधीश के साथ बैठे। दोनों न्यायाधीशों ने तमाम याचिकाओं को तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया। अब नैनीताल उच्च न्यायालय का आदेश पूर्णतया लागू हो गया है। मंदिर कमेटियों के प्रबंधन में जिले के वरिष्ठ अधिकारियों अब बराबर दखल देंगे।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed