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Hindi News ›   Uttarakhand ›   Haridwar News ›   Give a final farewell to the martyr every eye was moist

शहीद को अंतिम विदाई देते नम हुई हर आंख

Thu, 24 Dec 2015 12:06 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, हरिद्वार
ब्यूरो/अमर उजाला, हरिद्वार Updated Thu, 24 Dec 2015 12:06 AM IST
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हरिद्वार। दिल्ली में बीएसएफ का विमान दुर्घटनाग्रस्त होने पर शहीद हुए भगवती प्रसाद भट्ट की पार्थिव देह का हरिद्वार खड़खड़ी शमशान घाट पर अंतिम संस्कार किया गया। उनके चार वर्षीय बेटे वरंयम और भतीजे अभिषेक ने चिता को मुखाग्नि दी तो मौके पर मौजूद हर आंख नम हो गई। बीएसएफ के जवानों ने 24 राउंड फायर कर अपने जाबांज साथी को अंतिम सलामी दी।

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नई दिल्ली से बीएसएफ के स्पेशल विमान से देहरादून निवासी शहीद भगवती प्रसाद भट्ट का शव बुधवार दोपहर करीब ढाई बजे जौलीग्रांट पहुंचा। वहां से बीएसएफ के जवान शव को लेकर करीब चार बजे खड़खड़ी स्थित शमशान घाट पहुंचे। शहीद भगवती प्रसाद भट्ट के कई परिजन पहले से हरिद्वार पहुंचे हुए थे जबकि कुछ परिजन अंतिम यात्रा के साथ पहुंचे। पति के शव को देखकर दिवंगत की पत्नी स्वाति भट्ट और परिजन फूट-फूटकर रोने लगे। उन्हें ढांढस बंधाने वालों की भी आंखें नम हो गई। बीएसएफ जवानों ने गमगीन माहौल में 24 राउंड फायर कर अपने जांबाज शहीद साथी अफसर को अंतिम सलामी दी।
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इस दौरान बीएसएफ के कमांडेंट परमिंदर सिंह, डिप्टी कमांडेंट मनोज कुमार, सुनील कुमार, राहुल कुमार, हुकम सिंह, लवराज सिंह, असिस्टेंट मेडिकल आफिसर भूपेंद्र सिंह आदि मौजूद रहे। स्थानीय प्रशासन की ओर से जिलाधिकारी हरबंस सिंह चुघ, एसएसपी सेंथिल अबुदई कृष्णराज एस, सिटी मजिस्ट्रेट जयभारत सिंह, मेयर मनोज गर्ग, कांग्रेस के महानगर अध्यक्ष अंशुल श्रीकुंज, पूर्व मंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत समेत आदि ने शव पर पुष्प चक्र अर्पित कर श्रद्धासुमन अर्पित किए। बीएसएफ में सेवाएं दे चुके उत्तराखंड पुलिस के एडीजी अशोक कुमार भी श्रद्धांजलि देने पहुंचे।   
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पुष्पचक्र अर्पित करते फूट पड़े ससुर
मूल रूप से रुद्रप्रयाग के ऊखीमठ तहसील के पटमा गांव निवासी शहीद भट्ट के शव पर ससुर हरि सिंह कर्णवाल पुष्प चक्र अर्पित करते समय फूट-फूटकर रोने लगे। पिता को मुखाग्नि देते वक्त चार वर्षीय बेटे वरंयम तो पिता के खोने से बिल्कुल अंजान था। उनका दूसरा लड़का तिजी डेढ़ साल का है। शहीद भट्ट के चचेरे ससुर नरसिंह कर्णवाल ने बताया कि वह अपने परिवार में चार भाइयों में सबसे छोटे थे। उनकी पढ़ाई-लिखाई देहरादून में हुई थी।


जांबाज अधिकारी थे भट्ट: एडीजी
एडीजी अशोक कुमार ने भट्ट को श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए बताया कि वह जांबाज अधिकारी थे। उनकी शहादत सदैव प्रेरणा बनेगी। अशोक कुमार के अनुसार वह भी चार साल बीएसएफ में रहे। भगवती और उनके परिवार से उनकी जानपहचान देहरादून में हुई थी। उन्होंने अपनी जान देकर विमान को रिहायशी इलाके से गिरने से बचाया और कई जानें बचाई।

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