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शराब के धंधे में भी मातृ शक्ति आगे
hridwar uttrakhanda india
Updated Tue, 22 Mar 2016 11:32 PM IST
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हरिद्वार। भले ही शराब का नाम सुनकर मातृ शक्ति नाक भौं सिकोड़ती हो पर हकीकत ये है कि जिले की 37 देसी एवं अंग्रेजी शराब की दुकानों की अधिकृत ठेका उनके नाम छूटा है। यह अलग बात है कि शराब के इस व्यवसाय में पर्दे के पीछे कोई और है। यानी की 33 फीसदी से भी अधिक की हिस्सेदारी इस बार शराब के व्यवसाय में मातृ शक्ति की होगी।
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महिलाएं हमेशा से ही शराब के खिलाफ झंडा बुलंद करती रही हैं। जिले में शराब विरोधी आंदोलन के तहत महिलाओं ने धरना-प्रदर्शन करने के साथ कई जगह पर ठेकों में तोड़फोड़ तक की। महिला वर्ग का तर्क होता है कि शराब ने उनके घर को उजाड़कर दिया है। लेकिन सोमवार को जिले के देसी एवं अंग्रेजी शराब की 104 दुकानों के बाद जो तस्वीर सामने आई है उससे महिला वर्ग का दूसरा पक्ष भी सामने आया है। अंग्रेजी शराब की 36 में से 10 दुकानों की ठेकेदार अब महिलाएं हैं और देशी शराब की 68 में से 27 दुकानों की लॉटरी महिलाओं के नाम की निकली है।
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ये आंकड़ा कुल दुकानों के के हिसाब से 33 प्रतिशत से भी अधिक बैठता है। हालांकि, शराब के व्यवसाय से केवल नाम ही महिला का होता है असल में तो पूरे धंधे की कमान पुरुष ही संभालते हैं। जिला आबकारी अधिकारी एनआर जोशी का कहना है कि महिलाओं ने भी खूब आवेदन किए थे। जिले में 37 दुकानों की लॉटरी महिलाओं के नाम निकली है।
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