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स्वतंत्रता संग्राम सेनानी शुकलचंद का निधन
ब्यूरो/अमर उजाला, हरिद्वार
Updated Sun, 22 Nov 2015 11:33 PM IST
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श्यामपुर (हरिद्वार)। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी मास्टर शुकलचंद का रविवार की तड़के करीब साढ़े तीन बजे उनके पैतृक आवास पर निधन हो गया। वे 92 साल के थे और कुछ दिनों से बीमार चल रहे थे। राजकीय सम्मान के साथ उनकी अंत्येष्टि चंडीघाट स्थित श्मशान घाट पर की गई। प्रशासन की ओर से उनके शव को राष्ट्रीय ध्वज में लपेटा गया और पुलिस की गारद ने सलामी दी।
मास्टर शुकलचंद ने श्यामपुर कांगड़ी गांव स्थित अपने आवास पर रविवार की तड़के करीब साढ़े तीन बजे अंतिम सांस ली। निधन की सूचना पर बड़ी संख्या में लोगों ने उनके घर पहुंचे। शोक संतप्त परिजनों से सांत्वना और दिवंगत स्वतंत्रता संग्राम सेनानी को श्रद्धासुमन अर्पित किए।
शुक्लचंद का जन्म वर्ष 1923 में हुआ था और वे स्वतंत्रता संग्राम के दौरान 1942 में जेल गए थे। वे अपने पीछे तीन पुत्र, तीन पुत्रियां और कई पोते और नातियों का भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं। प्रशासन की ओर से एसडीएम प्रत्यूष सिंह, तहसीलदार दिनेश मोहन उनियाल, सीओ सिटी चंद्रमोहन सिंह ने गांव में पहुंचकर दिवंगत सेनानी को श्रद्धासुमन अर्पित किए। उनके शव को तिरंगे में लपेटा गया और पुष्पचक्र अर्पित किए गए।
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चंडीघाट स्थित श्मशान घाट पर उनके छोटे बेटे मनोज दिवाकर ने उनकी चिता को मुखाग्नि दी। विधायक स्वामी यतीश्वरानंद, जिला पंचायत सदस्य अजय चौधरी, प्रधान श्यामपुर, नंदराम, सत्यप्रकाश, शमशेर अली भड़ाना, सोमपाल, तेजपाल, शेखर समेत बड़ी संख्या में लोग अंतिम यात्रा में शामिल हुए। शुकलचंद के बेटे चंद्रप्रकाश मगन और अशोक कुमार दिवाकर ने बताया कि उनके पिता श्यामपुर स्थित जूनियर हाईस्कूल के प्रधानाध्यापक पद से सेवानिवृत्त हुए थे। वे ग्राम प्रधान भी रहे और जीवन के अंतिम पड़ाव तक समाजसेवा से जुड़े रहे। विधायक स्वामी यतीश्वरानंद ने कहा कि क्षेत्र के विकास में उनका योगदान हमेशा याद किया जाएगा।
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मास्टर शुकलचंद ने श्यामपुर कांगड़ी गांव स्थित अपने आवास पर रविवार की तड़के करीब साढ़े तीन बजे अंतिम सांस ली। निधन की सूचना पर बड़ी संख्या में लोगों ने उनके घर पहुंचे। शोक संतप्त परिजनों से सांत्वना और दिवंगत स्वतंत्रता संग्राम सेनानी को श्रद्धासुमन अर्पित किए।
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शुक्लचंद का जन्म वर्ष 1923 में हुआ था और वे स्वतंत्रता संग्राम के दौरान 1942 में जेल गए थे। वे अपने पीछे तीन पुत्र, तीन पुत्रियां और कई पोते और नातियों का भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं। प्रशासन की ओर से एसडीएम प्रत्यूष सिंह, तहसीलदार दिनेश मोहन उनियाल, सीओ सिटी चंद्रमोहन सिंह ने गांव में पहुंचकर दिवंगत सेनानी को श्रद्धासुमन अर्पित किए। उनके शव को तिरंगे में लपेटा गया और पुष्पचक्र अर्पित किए गए।
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चंडीघाट स्थित श्मशान घाट पर उनके छोटे बेटे मनोज दिवाकर ने उनकी चिता को मुखाग्नि दी। विधायक स्वामी यतीश्वरानंद, जिला पंचायत सदस्य अजय चौधरी, प्रधान श्यामपुर, नंदराम, सत्यप्रकाश, शमशेर अली भड़ाना, सोमपाल, तेजपाल, शेखर समेत बड़ी संख्या में लोग अंतिम यात्रा में शामिल हुए। शुकलचंद के बेटे चंद्रप्रकाश मगन और अशोक कुमार दिवाकर ने बताया कि उनके पिता श्यामपुर स्थित जूनियर हाईस्कूल के प्रधानाध्यापक पद से सेवानिवृत्त हुए थे। वे ग्राम प्रधान भी रहे और जीवन के अंतिम पड़ाव तक समाजसेवा से जुड़े रहे। विधायक स्वामी यतीश्वरानंद ने कहा कि क्षेत्र के विकास में उनका योगदान हमेशा याद किया जाएगा।