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लेखपालों के बगैर किसान सीधे बेच सकेंगे धान
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इस बार किसानों को धान की फसल को सरकारी दामों पर बेचने के लिए लेखपालों से मुक्ति मिल जाएगी। जिला प्रशासन धान की खेती करने वाले किसानों की सूची बना रहा है। इसी सूची के आधार पर किसान सीधे अपनी फसल को सरकारी खरीद केंद्रों पर बेच सकेंगे। किसानों केे धान बेचने के लिए लेखपालों से सत्यापन रिपोर्ट लगवाने में पीछा छूट जाएगा।
किसानों के धान को सरकारी दामों पर खरीदने के लिए खाद्य विभाग की ओर से सरकारी खरीद केंद्र खोले जाते हैं। किसानों को धान बेचने से पहले अपने क्षेत्र के लेखपाल से फसल का सत्यापन कराना पड़ता था। इसके बाद ही केंद्रों पर किसानों का धान खरीदा जाता है। लेखपालों के तहसील में नहीं मिलने और कभी क्षेत्र में न आने के कारण किसानों को कई-कई दिन सत्यापन रिपोर्ट के इंतजार करना पड़ जाता है। ऐसे में किसान समय पर धान की फसल नहीं बेच पाते थे।
इस बार जिला प्रशासन लेखपालों से सत्यापन रिपोर्ट लगवाने की व्यवस्था को ही खत्म करने जा रहा है। जिला प्रशासन की ओर से लेखपालों से पहले ही गांव-गांव में लगाए गए धान का सर्वे कराया जा रहा है। जिसमें लेखपाल एक प्रपत्र पर किसानों की ओर से लगाए गए धान के रकबे की सूची बना रहे हैं। सूची को तैयार करके सीधे खाद्य विभाग को उपलब्ध करा दिया जाएगा। खाद्य विभाग की ओर से सूचियों को केंद्रों पर भेज दिया जाएगा। सूची के आधार पर ही किसानों के धान की खरीदारी की जाएगी। संवाद
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14 हजार हेक्टेयर धान, 25 हजार किसान
जनपद में धान की खेती क्षेत्रफल में तीसरे नंबर पर आती है। इस साल भी 14 हजार हेक्टेयर में धान की रोपाई की गई है। मुख्य कृषि अधिकारी डॉ. विकेश कुमार सिंह यादव ने बताया कि लगभग 25 हजार हजार किसानों की ओर से धान की रोपाई की है। ऐसे में योजना के लागू होने से सरकारी केंद्रों पर धान बेचने वाले किसानों को फायदा होगा।
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बाहर के धान बेचने के खेल पर भी लगेगा अंकुश
सरकारी केंद्रों पर कई बार धान बेचने में खेल भी होता है। कुछ व्यापारी खुले बाजार में कीमत कम होने पर किसानों के नाम पर सरकारी केंद्रों पर धान बेचते हैं। किसानों की सूची बनने से इस खेल पर भी अंकुश लग जाएगा।
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किसानों की सूची तैयार करने के निर्देश भगवानपुर, रुड़की, लक्सर और हरिद्वार के समस्त एसडीएम और तहसीलदार को जारी कर दिए गए हैं। ताकी अक्तूबर से शुरू होने वाली सरकारी धान खरीद के लिए नई व्यवस्था शुरू कर काश्तकारों को लाभ दिया जा सके।
- बीर सिंह बुदियाल, अपर जिलाधिकारी, वित्त एवं राजस्व हरिद्वार
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किसानों के धान को सरकारी दामों पर खरीदने के लिए खाद्य विभाग की ओर से सरकारी खरीद केंद्र खोले जाते हैं। किसानों को धान बेचने से पहले अपने क्षेत्र के लेखपाल से फसल का सत्यापन कराना पड़ता था। इसके बाद ही केंद्रों पर किसानों का धान खरीदा जाता है। लेखपालों के तहसील में नहीं मिलने और कभी क्षेत्र में न आने के कारण किसानों को कई-कई दिन सत्यापन रिपोर्ट के इंतजार करना पड़ जाता है। ऐसे में किसान समय पर धान की फसल नहीं बेच पाते थे।
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इस बार जिला प्रशासन लेखपालों से सत्यापन रिपोर्ट लगवाने की व्यवस्था को ही खत्म करने जा रहा है। जिला प्रशासन की ओर से लेखपालों से पहले ही गांव-गांव में लगाए गए धान का सर्वे कराया जा रहा है। जिसमें लेखपाल एक प्रपत्र पर किसानों की ओर से लगाए गए धान के रकबे की सूची बना रहे हैं। सूची को तैयार करके सीधे खाद्य विभाग को उपलब्ध करा दिया जाएगा। खाद्य विभाग की ओर से सूचियों को केंद्रों पर भेज दिया जाएगा। सूची के आधार पर ही किसानों के धान की खरीदारी की जाएगी। संवाद
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14 हजार हेक्टेयर धान, 25 हजार किसान
जनपद में धान की खेती क्षेत्रफल में तीसरे नंबर पर आती है। इस साल भी 14 हजार हेक्टेयर में धान की रोपाई की गई है। मुख्य कृषि अधिकारी डॉ. विकेश कुमार सिंह यादव ने बताया कि लगभग 25 हजार हजार किसानों की ओर से धान की रोपाई की है। ऐसे में योजना के लागू होने से सरकारी केंद्रों पर धान बेचने वाले किसानों को फायदा होगा।
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बाहर के धान बेचने के खेल पर भी लगेगा अंकुश
सरकारी केंद्रों पर कई बार धान बेचने में खेल भी होता है। कुछ व्यापारी खुले बाजार में कीमत कम होने पर किसानों के नाम पर सरकारी केंद्रों पर धान बेचते हैं। किसानों की सूची बनने से इस खेल पर भी अंकुश लग जाएगा।
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किसानों की सूची तैयार करने के निर्देश भगवानपुर, रुड़की, लक्सर और हरिद्वार के समस्त एसडीएम और तहसीलदार को जारी कर दिए गए हैं। ताकी अक्तूबर से शुरू होने वाली सरकारी धान खरीद के लिए नई व्यवस्था शुरू कर काश्तकारों को लाभ दिया जा सके।
- बीर सिंह बुदियाल, अपर जिलाधिकारी, वित्त एवं राजस्व हरिद्वार