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Haridwar News: गन्ने का दाम कम बढ़ने पर किसानों ने जताई नाराजगी, 50 से 55 रुपये प्रति क्विंटल की थी उम्मीद

Mon, 01 Dec 2025 11:49 PM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Mon, 01 Dec 2025 11:49 PM IST
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Farmers expressed displeasure over the low price of sugarcane, having expected a hike of Rs 50 to 55 per quintal.
संवाद न्यूज़ एजेंसी
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बहादराबाद। उत्तराखंड सरकार ने गन्ने के राज्य परामर्शित मूल्य में 30 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की घोषणा की है। सरकार के अनुसार अब अगेती प्रजाति के गन्ने का मूल्य 405 रुपये प्रति क्विंटल और सामान्य प्रजाति का मूल्य 395 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है। किसान इसे पर्याप्त नहीं मान रहे हैं। किसानों का कहना है कि बढ़ती लागत, महंगे खाद और डीजल ने उनकी जेब पर पहले से ही भारी दबाव डाल रखा है। पिछले पेराई सत्र 2024–25 में अगेती प्रजाति का मूल्य 375 रुपये और सामान्य का 365 रुपये प्रति क्विंटल था, लेकिन इस बार किसान 50 से 55 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की उम्मीद लगाए बैठे थे। उनका कहना है कि लागत में अधिक उछाल के बीच मात्र 30 रुपये की वृद्धि उनके हितों के अनुकूल नहीं है।
किसानों ने बताया कि डीएपी खाद का भाव 1300 रुपये प्रति बोरी, एनपीके का दाम लगभग 1700 रुपये प्रति 50 किलो तक पहुंच चुका है। इससे गन्ने की खेती का खर्च पिछले वर्षों की तुलना में काफी बढ़ गया है। उन्होंने कहा है कि यदि सरकार वास्तव में खेती को लाभकारी बनाना चाहती है, तो एसएपी में इतनी वृद्धि होनी चाहिए कि लागत निकलने के साथ किसान को उपयुक्त मुनाफा भी मिल सके। किसान संगठन जल्द ही सरकार से दुबारा मूल्य पुनरीक्षण की मांग करने की तैयारी में हैं।सरकार ने मूल्य बढ़ाया है, लेकिन बढ़ती महंगाई के मुकाबले यह नाकाफी है। हमें खेती बचानी है तो गन्ने के दाम लागत से ऊपर तय करने होंगे। सरकार उनकी वास्तविक लागत को ध्यान में रखते हुए मूल्य में और सुधार करेगी, ताकि गन्ना किसान आर्थिक रूप से मजबूत हो सकें और खेती को लाभकारी बनाए रखा जा सके।
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सरकार ने बढ़ोतरी तो कर दी, लेकिन 30 रुपये से हमारा कुछ नहीं होने वाला। खाद, मजदूरी, सिंचाई सबका खर्च दोगुना हो चुका है। गन्ने का रेट कम से कम 50–55 रुपये बढ़ना चाहिए था। -भगवानदास
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डीएपी 1300 और एनपीके 1700 रुपये में मिल रहा है। ऐसे में गन्ना किसान कैसे टिकेगा? सरकार को हमारी वास्तविक लागत देखकर फैसला लेना चाहिए। -राजेश
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उत्तराखंड सरकार जो 30 रुपये बढ़ाए गए हैं, वह महंगाई के आगे बहुत कम है। हमारे खेतों में लगने वाली लागत पहले से लगभग डेढ़ गुना हो चुकी है। हम चाहते हैं कि सरकार दुबारा बैठकर मूल्य तय करे। - राजेश कुमार
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महिलाओं पर खेती का बोझ ज्यादा है। हर बार हम बढ़ी लागत झेलते हैं, लेकिन गन्ने का रेट उम्मीद के अनुसार नहीं बढ़ता। सरकार ने अगर खेती बचानी है, तो किसानों के हक का पूरा सम्मान करना होगा। -प्रियव्रत
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गन्ना हमारी मुख्य फसल है। अगर लागत के मुकाबले रेट नहीं बढ़ा तो किसान कर्ज में ही डूबे रहेंगे। सरकार को 30 रुपये की बजाय 55 रुपये तक बढ़ोतरी करनी चाहिए थी। - जितेश

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किसानों की हालत समझने की जरूरत है। लागत लगातार बढ़ रही है, लेकिन गन्ने का मूल्य संतुलित नहीं है। हम सरकार से दोबारा मूल्य पुनरीक्षण की मांग करेंगे। खेती तभी बचेगी जब किसान बचेगा। - राजवीर
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