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आर्थिक कटौतियों के बहाल न होने पर भड़के कर्मचारी, किया प्रदर्शन

Thu, 30 Jul 2020 11:18 PM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Thu, 30 Jul 2020 11:18 PM IST
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Employees agitated after economic cuts were not restored
भेल स्टेडियम के पास केंद्र सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करते भारतीय मजदूर संघ के पदाधिकारी । - फोटो : HARIDWAR
भेल श्रमिक संघर्ष यूनियन ने आर्थिक कटौतियों के विरोध में भेल कॉरपोरेट प्रबंधन के खिलाफ प्रदर्शन किया। उन्होंने प्रबंधक के माध्यम से ज्ञापन भेजकर समस्याओं का शीघ्र समाधान किए जाने की मांग की। साथ ही चेतावनी दी कि यदि उनकी समस्याओं का अनसुना किया गया तो आंदोलन किया जाएगा।
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बृहस्पतिवार को भेल के पश्चिमी गेट के सामने भेल श्रमिक संघर्ष यूनियन के पदाधिकारियों ने प्रदर्शन किया। यूनियन के महामंत्री प्रशांत दीप गुप्ता ने कहा कि कॉरपोरेट प्रबंधन के साथ हुई केंद्रीय नेताओं की वीडियो कांफ्रेंस में श्रमिकों की किसी भी समस्या का समाधान नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि केंद्रीय नेता प्रबंधन से श्रमिकों की जायज और ज्वलंत मांगों को पूरा करवा पाने में विफल रहे हैं। उन्होंने पिछले वर्षों में थर्मल क्षेत्र में आर्डरों में आई भारी गिरावट के कारण कॉरपोरेट प्रबंधन से बीएचईएल, हरिद्वार को विविधीकरण का लाभ देते हुए अन्य क्षेत्र सोलर, ट्रांसपोर्टेशन, डिफेंस, रेलवे आदि में भरपूर आर्डर देने की मांग को जोर शोर से उठाया। यूनियन अध्यक्ष जसविंदर सिंह ने लॉकडाउन का बहाना कर उनके लाभों की गई कटौतियों को बहाल करने की मांग उठाई। प्रदर्शन में रवि दूबे, लव कुमार, सोहन सिंह, मुदित तायल, रविंद्र पाल सिंह, नितिन सिंघल, अमर सिंह, संजीव बाली, शिवकुमार बख्शी, विवेक सक्सेना, दीपक कुमार प्रजापति, सुमित कुमार, चंदन वाधवानी, मनोज धीमान आदि उपस्थित रहे।
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निजीकरण के विरोध में उतरे नौ यूनियनों के पदाधिकारी
हरिद्वार। भारतीय मजदूर संघ के राष्ट्रीय आह्वान पर सरकार जगाओ सप्ताह के अंतिम दिन भेल के मुख्य गेट के सामने नौ यूनियनों के पदाधिकारियों ने प्रदर्शन करते हुए निजीकरण के खिलाफ प्रदर्शन किया। कर्मचारिायों ने आर्थिक कटौतियों को बहाल करने की मांग उठाई।
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बीएमएस हीप के महामंत्री संदीप कुमार ने बताया कि 24 से 30 जुलाई के अंतर्गत चरणबद्ध आंदोलन किए गए। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार भी 1991 की नरसिम्हा राव की सरकार द्वारा लाई गई उदारीकरण की नीतियों को आगे बढ़ाने का कार्य कर रही है। देश के पब्लिक सेक्टर देश की रीढ़ है, लेकिन सेक्टरों के निजीकरण से देश की अर्थव्यवस्था की कमर टूट सकती है। उन्होंने कहा कि देश के किसी भी पब्लिक सेक्टर में कर्मचारियों के पर्क्स आदि भत्तों में कटौती नहीं की गई है, भेल कारपोरेट द्वारा पर्क्स एवं अन्य कटौतियां करना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। पूर्व विधायक रामयश सिंह ने कहा कि प्रदेश और केंद्र सरकार कोरोना की आड़ में मजदूरों के श्रम अधिकारों का हनन कर रही है। इस मौके पर भारतीय मजदूर संघ के प्रदेश कोषाध्यक्ष सुभाष पुरोहित, भेल के अध्यक्ष अरुण गुप्ता, महामंत्री विकास सिंह, हेमू के महामंत्री मोहित शर्मा, कर्मचारी परिषद के महामंत्री अमित चौहान, आशीष सैनी, अरविंद कुमार, अमित गोगना, जय शंकर, रविंद्र कुमार, अतुल राय, चंद्रशेखर चौहान, आदेश धीमान, परितोष कुमार, सत्यशील वत्स, महेंद्र बिष्ट, मनमीत, सीपी सिंह, धर्मेंद्र लोधी, संजय सैनी, प्रमोद प्रजापति, बलबीर रावत, नीरज भटनागर, चमनलाल, प्रहलाद चौहान,सुनित अरोड़ा आदि शामिल हुए।
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