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ड्राफ्ट रिपोर्ट पर ले ली खनन की एनओसी

Sun, 21 Aug 2016 11:52 PM IST
hridwar uttrakhanda india
hridwar uttrakhanda india Updated Sun, 21 Aug 2016 11:52 PM IST
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हरिद्वार। सरकारी अधिकारी खनन कराने के लिए तरह-तरह के षड्यंत्र रच रहे हैं। बिशनपुर और भोगपुर में दो खनन पट्टे खोलने के लिए वन विकास निगम के अधिकारियों ने ही गड़बड़ी की सारी हदें पार कर दी। वन विकास निगम ने एफआरआई देहरादून से पर्यावरणीय आंकलन की ड्राफ्ट रिपोर्ट बनवाई और इस रिपोर्ट को गलत तथ्यों के आधार पर केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय से एनओसी ले ली। अब एनजीटी कोर्ट में एफआरआई दून को पक्षकार बनाने पर पता चला है कि संस्थान ने फाइनल रिपोर्ट दी ही नहीं थी। इसके अलावा कई निजी कंपनियों के नाम से फर्जी पर्यावरणीय आंकलन रिपोर्ट बनाने का खुलासा भी हुआ है। जिससे वन निगम सहित राज्य और केंद्र के कई अधिकारियों व नेताओं की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में है।

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बिशनपुर और भोगपुर में गढ़वाल मंडल विकास निगम और वन विकास निगम की देखरेख में खनन किया जाता है। पिछले साल पट्टे खोलने के लिए वन विकास निगम ने 15.60 लाख रुपये की लागत से एफआरआई देहरादून से पर्यावरणीय आंकलन की ड्राफ्ट रिपोर्ट बनवाई और केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय में क्लीयरेंस के लिए आवेदन कर दिया। मंत्रालय ने इस रिपोर्ट के आधार पर खनन पट्टों को हरी झंडी भी दे दी। इसकी जानकारी मिलने पर मातृसदन ने आपत्ति जताई। बाद में बरसात का सीजन शुरू होने के कारण भी पट्टे नहीं खुल पाए।
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अब समाजसेवी डा. विजय वर्मा ने पूरे मामले को एनजीटी कोर्ट में उठाया। साथ ही एफआरआई देहरादून को भी पक्षकार बनाया गया। संस्थान ने एनजीटी में अपना शपथ पत्र दाखिल कर बताया कि उन्होंने सिर्फ ड्राफ्ट रिपोर्ट बनाई थी। फाइनल रिपोर्ट के बिना पर्यावरणीय आंकलन कैसे किया जा सकता है। इसके अलावा मामले में गड़बड़ी की ऐसी कई परतें अब खुलकर सामने आ रही हैं। जिससे वन विकास निगम से लेकर राज्य व केंद्र के कई विभागों, नौकरशाहों और नेताओं की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं।
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पहले किर्लोस्कर के नाम से फर्जी निकली रिपोर्ट
हरिद्वार। खनन पट्टे के लिए पर्यावरणीय आंकलन रिपोर्ट का खेल इससे पहले प्राइवेट कंपनी के नाम से शुरू हुआ। पिछले साल इन खनन पट्टे के लिए गढ़वाल मंडल विकास निगम ने वर्ष 2012-13 में किर्लोस्कर कंपनी से ली गई पर्यावरणीय आंकलन रिपोर्ट का हवाला दिया था। इसकी एक प्रति मातृसदन को भी भेजी गई थी। रिपोर्ट में गंगा में पत्थर बहकर आने की बात पढ़कर स्वामी शिवानंद ने कंपनी से पत्राचार किया। जिसमें तथ्य साबित न होने पर कंपनी को ब्लैकलिस्ट करने तक की चेतावनी दी गई। इस पर कंपनी ने खुद स्वामी शिवानंद को फोन किया और बताया कि उन्हें ऐसी किसी रिपोर्ट के लिए हायर ही नहीं किया गया। जवाब चौंकाने वाला था। फर्जी रिपोर्ट का खुलासा होने के बाद कंपनी का कुछ पता नहीं चला। इसके बाद दो अन्य कंपनियों से भी रिपोर्ट बनवाने की बात सामने आई।

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चंगेज खां की तरह गंगा को लूट रहे नेता : शिवानंद
- कहा मंत्री की शहर पर हुआ फर्जीवाड़ा
अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार। स्वामी शिवानंद ने रविवार को पत्रकार वार्ता में कहा कि चंगेज खां ने जिस तरह भारत के मंदिरों से सोना चांदी लूटा था, आज के नेता खनन के लिए गंगा को उससे भी ज्यादा बुरी तरह से लूट रहे हैं। स्वामी शिवानंद ने कहा कि गंगा की निर्मलता अविरलता पर तथाकथित संत मौन हैं या फिर उन्हीं की भाषा में बोलते हैं। यह हरिद्वार का ही नहीं बल्कि धर्म का दुर्भाग्य है। स्वामी शिवानंद ने आरोप लगाया कि प्रदेश सरकार में एक मंत्री के बेटे का श्यामपुर क्षेत्र में क्रशर चल रहा है। मंत्री के बेटे को फायदा पहुंचाने के लिए मंत्री ने अपने विभाग के अधिकारियों से पूरा फर्जीवाड़ा कराया। स्वामी शिवानंद ने केंद्र सरकार में गंगा से जुड़े मंत्रालयों की कमान संभालने वाली उमा भारती और ड्राफ्ट रिपोर्ट के आधार पर पट्टों की एनओसी देने वाले पर्यावरण मंत्रालय के प्रकाश जावड़ेकर पर भी जुबानी हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस-भाजपा सहित सभी पार्टियां गंगा को लूटने में लगी हैं।

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