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Haridwar News: शांतिकुंज में दिव्य कलश स्थापना, जन्म शताब्दी समारोह की तैयारियां शुरू
Sun, 23 Nov 2025 08:33 PM IST
देहरादून ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हरिद्वार
संवाद न्यूज एजेंसी, हरिद्वार
Updated Sun, 23 Nov 2025 08:33 PM IST
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- बैरागी द्वीप में त्रिवेणी संगम की तैयारियों में हर दिन हर चरण किए जा रहे हैं पूरे
- जनवरी में वसंत पंचमी तक चलने वाले कार्यक्रम में जुटेंगे विश्वभर के साधक
माई सिटी रिपोर्टर
हरिद्वार। शांतिकुंज परिवार प्रमुखों ने रविवार को शताब्दी नगर पंतद्वीप में पूजित दिव्य कलश स्थापित किया। यह जनवरी में होने वाले जन्म शताब्दी समारोह की तैयारियों का महत्वपूर्ण चरण है। अखिल विश्व गायत्री परिवार के प्रमुख डॉ. प्रणव पण्ड्या और शैलदीदी ने वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच कलश का पूजन कर उसे महिला मंडल को सौंपा। महिला मंडल प्रमुख शैफाली पण्ड्या ने टीम के साथ कलश को वैदिक रीति से समारोह स्थल पर स्थापित किया। कलश स्थापना के साथ सूर्योदय से सूर्यास्त तक होने वाला गायत्री महामंत्र का अखण्ड जप भी प्रारंभ हो गया, जो वसंत पंचमी 2026 तक निरंतर चलेगा। देश-विदेश से आए गायत्री साधकों और शांतिकुंज कार्यकर्ताओं ने इसमें सतत सहभागिता का संकल्प लिया। शैलदीदी ने कहा कि दिव्य कलश में युगऋषि की तप-साधना का पावन अंश प्रतिष्ठित है, जो साधना, सेवा और संस्कार की ऊर्जा का केंद्र है। यह मानवता, विचार-क्रांति और विश्वशांति की दिशा में वैश्विक संकल्प का प्रारंभ बनेगा।
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- जनवरी में वसंत पंचमी तक चलने वाले कार्यक्रम में जुटेंगे विश्वभर के साधक
माई सिटी रिपोर्टर
हरिद्वार। शांतिकुंज परिवार प्रमुखों ने रविवार को शताब्दी नगर पंतद्वीप में पूजित दिव्य कलश स्थापित किया। यह जनवरी में होने वाले जन्म शताब्दी समारोह की तैयारियों का महत्वपूर्ण चरण है। अखिल विश्व गायत्री परिवार के प्रमुख डॉ. प्रणव पण्ड्या और शैलदीदी ने वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच कलश का पूजन कर उसे महिला मंडल को सौंपा। महिला मंडल प्रमुख शैफाली पण्ड्या ने टीम के साथ कलश को वैदिक रीति से समारोह स्थल पर स्थापित किया। कलश स्थापना के साथ सूर्योदय से सूर्यास्त तक होने वाला गायत्री महामंत्र का अखण्ड जप भी प्रारंभ हो गया, जो वसंत पंचमी 2026 तक निरंतर चलेगा। देश-विदेश से आए गायत्री साधकों और शांतिकुंज कार्यकर्ताओं ने इसमें सतत सहभागिता का संकल्प लिया। शैलदीदी ने कहा कि दिव्य कलश में युगऋषि की तप-साधना का पावन अंश प्रतिष्ठित है, जो साधना, सेवा और संस्कार की ऊर्जा का केंद्र है। यह मानवता, विचार-क्रांति और विश्वशांति की दिशा में वैश्विक संकल्प का प्रारंभ बनेगा।