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अन्य राज्यों में हो संस्कृत का प्रचार-प्रसार
ब्यूरो/अमर उजाला, हरिद्वार
Updated Fri, 27 Nov 2015 11:54 PM IST
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हरिद्वार। उत्तराखंड संस्कृत अकादमी की ओर से अखिल भारतीय संस्कृत शोध सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन में 18 प्रदेशों के प्रतिभागी शामिल हुए। मुख्य अतिथि विधायक मदन कौशिक ने कहा कि उत्तराखंड की तर्ज पर अन्य राज्यों में भी संस्कृत का प्रचार-प्रसार होना चाहिए।
संस्कृत के क्षेत्र में शोध की नई प्रविधि के लिए शोध सम्मेलन का आयोजन किया गया। मुख्य अतिथि पूर्व कैबिनेट मंत्री और वर्तमान शहर विधायक मदन कौशिक ने कहा कि संस्कृत एकता और अखंडता सिखाती है। संस्कृत हमारे मानवीय विचारों की जननी है। उन्होंने कहा कि जिस तरह उत्तराखंड में संस्कृत को द्वितीय राजभाषा का दर्जा दिया और संस्कृत विभाग भी खोला गया। उसी तरह देश के दूसरे प्रदेशों में किया जाना चाहिए। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए गुरुकुल कांगडी विश्वविद्यालय के कुलपति डा. सुरेंद्र कुमार ने कहा कि प्राचीन ज्ञान विज्ञान को जानने के लिए संस्कृत को जानना जरूरी है। विशिष्ट अतिथि छत्तीसगढ़ संस्कृति शिक्षा मंडल के अध्यक्ष कैबिनेट मंत्री गणेश कौशिक ने कहा कि संस्कृत पूरी दुनिया को जोड़ सकती है। अकादमी के सचिव डा. सुरेश चरण बहुगुणा ने बताया कि पुराण साहित्य को लेकर 12 विषयों में शोध पत्र प्रस्तुत किए गए। सम्मेलन के विभिन्न प्रदेशों के 200 प्रतिभागी हिस्सा ले रहे हैं। सृष्टि विज्ञान, दार्शनिक चिंतन, कर्म सिद्घांत और विश्व बंधुत्व आदि पर 40 शोध पत्र पढ़े गए। कार्यक्रम में डा. श्रीकृष्ण सेमवाल, डा. भोला झा, डा. हरीश गुरुरानी, डा. ज्ञानेंद्र पांडेय, डा. मनुदेव बंधु आदि मुख्य रुप से उपस्थित रहे।
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संस्कृत के क्षेत्र में शोध की नई प्रविधि के लिए शोध सम्मेलन का आयोजन किया गया। मुख्य अतिथि पूर्व कैबिनेट मंत्री और वर्तमान शहर विधायक मदन कौशिक ने कहा कि संस्कृत एकता और अखंडता सिखाती है। संस्कृत हमारे मानवीय विचारों की जननी है। उन्होंने कहा कि जिस तरह उत्तराखंड में संस्कृत को द्वितीय राजभाषा का दर्जा दिया और संस्कृत विभाग भी खोला गया। उसी तरह देश के दूसरे प्रदेशों में किया जाना चाहिए। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए गुरुकुल कांगडी विश्वविद्यालय के कुलपति डा. सुरेंद्र कुमार ने कहा कि प्राचीन ज्ञान विज्ञान को जानने के लिए संस्कृत को जानना जरूरी है। विशिष्ट अतिथि छत्तीसगढ़ संस्कृति शिक्षा मंडल के अध्यक्ष कैबिनेट मंत्री गणेश कौशिक ने कहा कि संस्कृत पूरी दुनिया को जोड़ सकती है। अकादमी के सचिव डा. सुरेश चरण बहुगुणा ने बताया कि पुराण साहित्य को लेकर 12 विषयों में शोध पत्र प्रस्तुत किए गए। सम्मेलन के विभिन्न प्रदेशों के 200 प्रतिभागी हिस्सा ले रहे हैं। सृष्टि विज्ञान, दार्शनिक चिंतन, कर्म सिद्घांत और विश्व बंधुत्व आदि पर 40 शोध पत्र पढ़े गए। कार्यक्रम में डा. श्रीकृष्ण सेमवाल, डा. भोला झा, डा. हरीश गुरुरानी, डा. ज्ञानेंद्र पांडेय, डा. मनुदेव बंधु आदि मुख्य रुप से उपस्थित रहे।
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