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धर्मनगरी हरिद्वार बनेगी मेट्रो सिटी
अमर उजाला ब्यूरो हरिद्वार
Updated Wed, 17 May 2017 10:05 PM IST
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धर्मनगरी हरिद्वार को अब शीघ्र ही मेट्रो सिटी बनाने की तैयारी है। नगर निगम क्षेत्र का विस्तार इस तरह से प्रस्तावित किया जा रहा है कि यहां मेट्रो सिटी बनने के सारे मानक पूरे हो जाएं। मेट्रो सिटी का दर्जा मिलते ही हरिद्वार के विकास को नए पंख लगेंगे। शहर को विकास की उन सभी योजनाओं का लाभ मिलेगा जो किसी मेट्रो सिटी के लिए तय मानकों के हिसाब से लागू की जाती हैं। शासन सीमा विस्तार के प्रस्ताव पर मुहर लगा देता है तो फिर शिवालिकनगर नगर पालिका का अस्तित्व भी समाप्त हो जाएगा। यह सारा क्षेत्र नगर निगम के क्षेत्र में शामिल हो जाएगा।
नगर निगम पहले ही क्षेत्र के सीमा विस्तार का प्रस्ताव पारित कर चुका है। अब भाजपा सरकार आने के बाद शासन को वर्ष 2012 के सीमा विस्तार के प्रस्ताव का अनुमोदन कर जिलाधिकारी के माध्यम से भिजवाने की तैयारी की जा रही है। करीब पांच साल पहले नगर निगम का दर्जा पाने वाले हरिद्वार के मेट्रो सिटी के रूप में विकसित करने के अभियान को लेकर शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक और मेयर मनोज गर्ग की साझा कार्य योजना काम कर रही है। सीमा विस्तार के वर्ष 2012 के जिस प्रस्ताव को आधार बनाया जा रहा है उस समय नगर पालिका शिवालिकनगर अस्तित्व में नहीं थी। यह नगर पालिका बाद में तत्कालीन कांग्रेस सरकार की ओर से घोषित की गई, जिसका अभी तक धरातल पर कोई विशेष अस्तित्व भी दिखाई नहीं दे रहा है। तर्क दिया जा रहा है कि नगर पालिका शिवालिक नगर का चूंकि अभी तक गठन ही नहीं हुआ है इसलिए उसका होना न होना मायने नहीं रखता है। इसे समाप्त कर इसके अधीन आने वाले क्षेत्रों को सीधे हरिद्वार नगर निगम में शामिल करने की योजना बनाई गई है। वर्ष 2012 में नगर निगम का सीमा विस्तार वर्ष 2011 की जनगणना पर आधारित था। जिसके अनुसार उस समय वर्तमान नगर निगम की आबादी 2 लाख 31 हजार थी और विस्तार में नगरीकरण वाले क्षेत्रों की लगभग 60 हजार की आबादी को सम्मिलित किया गया था। अब यह अनुमान लगाया जा रहा है लगभग पांच साल में नगर निगम विस्तार के पुराने प्रस्तावित क्षेत्र को मिलाकर आबादी चार लाख को पार कर जाएगी। इस प्रकार चार लाख से अधिक आबादी वाला नगर निगम होने पर उसे मेट्रो सिटी के मानकों के अनुसार विकास योजनाओं के लिए वित्तीय मदद मिलने लगेगी। नगर निगम बोर्ड की ओर से मेयर मनोज गर्ग ने पुराने प्रस्ताव को अनुमोदित कर दिया है। शासन ने नगर निगमों के सीमा विस्तार के प्रस्ताव देने के लिए 15 मई की निर्धारित समय सीमा बढ़ाकर 20 मई कर दी थी।
इन क्षेत्रों को शामिल किया जाना है नगर निगम में
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वर्ष 2012 में सीमा विस्तार के लिए जो सर्वे कर प्रस्ताव तैयार किया गया था उसमें ग्राम जगजीपुर, ग्राम जमालपुरकलां, ग्राम सीतापुर, शिवालिक नगर, सिडकुल, विकास भवन, कलक्ट्रेट मुख्यालय, जिला न्यायालय परिसर, रावली महदूद, न्यू सुभाषनगर आदि को नगर में सम्मिलित किया गया था। जिस गांव सराय में नगर निगम पूरे शहर का कूड़ा कचरा डाल रहा है और सॉलिड वेस्ट मैंनेजमेंट परियोजना का कंपोस्ट प्लांट स्थापित किया गया है उसको नगर निगम से दूर रखा गया है। नगर अभियंता दिनेश शर्मा का कहना है कि गांव सराय में 70 प्रतिशत भूमि पर कृषि वाली है। इसलिए उसको नहीं लिया गया है। उन्हीं गांवों का लिया गया है जिनका नगरीकरण हो चुका है।
मेट्रो सिटी बनने पर ये होंगे लाभ
हरिद्वार अगर मेट्रो सिटी बनने के मानक पूरे करता है तो यहां के विकास को नया आयाम मिलेगा। इससे सफाई का बजट बढे़गा। यातायात की कार्ययोजना नए सिरे से लागू होगी। सड़कें चौड़ी, चौराहों पार्कों का सुंदरीकरण किया जाएगा तथा नए पार्क विकसित होंगे। पेयजल स्ट्रीट लाइटों की सुविधाओं का विस्तार होने के साथ ही शहर और उससे सटे इलाकों का कायाकल्प हो जाएगा।
कई नेताओं के अरमानों पर फिर जाएगा पानी
हरिद्वार अगर मेट्रो सिटी बनता है तो जनता के लिए जहां सुविधाओं का विस्तार तो हो जाएगा लेकिन शिवालिकनगर नगर पालिका का अस्तित्व समाप्त होते ही ऐसे कई नेताओं के अरमान सिरे चढ़ने से पहले ही हवा हो जाएंगे जो नगर पालिका का अध्यक्ष बनने के सपने देख रहे हैं। इस समय भाजपा, और कांग्रेस समेत कई दलों के बीस से ज्यादा नेताओं की नजर शिवालिकनगर नगर पालिका के चेयरमैन की कुर्सी पर है। कई संभावित दावेदार तो अगले साल नगर निगमों के चुनाव के साथ ही शिवालिकनगर नगरपालिका का चुनाव होने की संभावना को देखते हुए अभी से चुनाव की तैयारी में जुटे हुए हैं।
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नगर निगम पहले ही क्षेत्र के सीमा विस्तार का प्रस्ताव पारित कर चुका है। अब भाजपा सरकार आने के बाद शासन को वर्ष 2012 के सीमा विस्तार के प्रस्ताव का अनुमोदन कर जिलाधिकारी के माध्यम से भिजवाने की तैयारी की जा रही है। करीब पांच साल पहले नगर निगम का दर्जा पाने वाले हरिद्वार के मेट्रो सिटी के रूप में विकसित करने के अभियान को लेकर शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक और मेयर मनोज गर्ग की साझा कार्य योजना काम कर रही है। सीमा विस्तार के वर्ष 2012 के जिस प्रस्ताव को आधार बनाया जा रहा है उस समय नगर पालिका शिवालिकनगर अस्तित्व में नहीं थी। यह नगर पालिका बाद में तत्कालीन कांग्रेस सरकार की ओर से घोषित की गई, जिसका अभी तक धरातल पर कोई विशेष अस्तित्व भी दिखाई नहीं दे रहा है। तर्क दिया जा रहा है कि नगर पालिका शिवालिक नगर का चूंकि अभी तक गठन ही नहीं हुआ है इसलिए उसका होना न होना मायने नहीं रखता है। इसे समाप्त कर इसके अधीन आने वाले क्षेत्रों को सीधे हरिद्वार नगर निगम में शामिल करने की योजना बनाई गई है। वर्ष 2012 में नगर निगम का सीमा विस्तार वर्ष 2011 की जनगणना पर आधारित था। जिसके अनुसार उस समय वर्तमान नगर निगम की आबादी 2 लाख 31 हजार थी और विस्तार में नगरीकरण वाले क्षेत्रों की लगभग 60 हजार की आबादी को सम्मिलित किया गया था। अब यह अनुमान लगाया जा रहा है लगभग पांच साल में नगर निगम विस्तार के पुराने प्रस्तावित क्षेत्र को मिलाकर आबादी चार लाख को पार कर जाएगी। इस प्रकार चार लाख से अधिक आबादी वाला नगर निगम होने पर उसे मेट्रो सिटी के मानकों के अनुसार विकास योजनाओं के लिए वित्तीय मदद मिलने लगेगी। नगर निगम बोर्ड की ओर से मेयर मनोज गर्ग ने पुराने प्रस्ताव को अनुमोदित कर दिया है। शासन ने नगर निगमों के सीमा विस्तार के प्रस्ताव देने के लिए 15 मई की निर्धारित समय सीमा बढ़ाकर 20 मई कर दी थी।
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इन क्षेत्रों को शामिल किया जाना है नगर निगम में
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वर्ष 2012 में सीमा विस्तार के लिए जो सर्वे कर प्रस्ताव तैयार किया गया था उसमें ग्राम जगजीपुर, ग्राम जमालपुरकलां, ग्राम सीतापुर, शिवालिक नगर, सिडकुल, विकास भवन, कलक्ट्रेट मुख्यालय, जिला न्यायालय परिसर, रावली महदूद, न्यू सुभाषनगर आदि को नगर में सम्मिलित किया गया था। जिस गांव सराय में नगर निगम पूरे शहर का कूड़ा कचरा डाल रहा है और सॉलिड वेस्ट मैंनेजमेंट परियोजना का कंपोस्ट प्लांट स्थापित किया गया है उसको नगर निगम से दूर रखा गया है। नगर अभियंता दिनेश शर्मा का कहना है कि गांव सराय में 70 प्रतिशत भूमि पर कृषि वाली है। इसलिए उसको नहीं लिया गया है। उन्हीं गांवों का लिया गया है जिनका नगरीकरण हो चुका है।
मेट्रो सिटी बनने पर ये होंगे लाभ
हरिद्वार अगर मेट्रो सिटी बनने के मानक पूरे करता है तो यहां के विकास को नया आयाम मिलेगा। इससे सफाई का बजट बढे़गा। यातायात की कार्ययोजना नए सिरे से लागू होगी। सड़कें चौड़ी, चौराहों पार्कों का सुंदरीकरण किया जाएगा तथा नए पार्क विकसित होंगे। पेयजल स्ट्रीट लाइटों की सुविधाओं का विस्तार होने के साथ ही शहर और उससे सटे इलाकों का कायाकल्प हो जाएगा।
कई नेताओं के अरमानों पर फिर जाएगा पानी
हरिद्वार अगर मेट्रो सिटी बनता है तो जनता के लिए जहां सुविधाओं का विस्तार तो हो जाएगा लेकिन शिवालिकनगर नगर पालिका का अस्तित्व समाप्त होते ही ऐसे कई नेताओं के अरमान सिरे चढ़ने से पहले ही हवा हो जाएंगे जो नगर पालिका का अध्यक्ष बनने के सपने देख रहे हैं। इस समय भाजपा, और कांग्रेस समेत कई दलों के बीस से ज्यादा नेताओं की नजर शिवालिकनगर नगर पालिका के चेयरमैन की कुर्सी पर है। कई संभावित दावेदार तो अगले साल नगर निगमों के चुनाव के साथ ही शिवालिकनगर नगरपालिका का चुनाव होने की संभावना को देखते हुए अभी से चुनाव की तैयारी में जुटे हुए हैं।