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डेंगू के मरीजों ने तोड़ा छह साल का रिकार्ड
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हरिद्वार जनपद में डेंगू नौ साल से लगातार पैर जमाए हुए हैं। इस साल तो डेंगू ने पिछले छह साल के रिकार्ड तोड़ दिए हैं। आंकड़े के अनुसार एलायजा रिपोर्ट में इस साल 568 और संदिग्ध मरीजों की संख्या 1348 तक पहुंची है। जबकि साल साल पहले वर्ष 2013 में एलायजा रिपोर्ट के अनुसार डेंगू के मरीजों की संख्या 468 थी। हालांकि बीच के सालों में डेंगू के मरीजों में जरूर कमी आई थी।
हरिद्वार जिले में डेंगू का डंक 2010 से कहर बरपा रहा है। हालांकि स्वास्थ्य विभाग के पास 2013 के आंकड़े ही उपलब्ध हो पाए हैं। स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के अनुसार 2013 में 468 मरीजों में डेंगू की पुष्टि हुई थी। जबकि इनमें से सात लोगों की मौत भी हुई थी। हालांकि उस वर्ष डेंगू के संदिग्ध मरीजों का आंकड़ा डेढ़ हजार के पार पहुंच गया था। इसके बाद 2017 में डेंगू के मरीजों में कमी आई। इस वर्ष 294 मरीजों में डेंगू की पुष्टि हुई। इसमें से भी 3 मरीजों की मौत हो गई थी। 2018 में स्वास्थ्य विभाग ने फिर डेंगू पर काबू पाया। इस वर्ष जिले में एलायजा रिपोर्ट में 266 मरीज डेंगू से पीड़ित मिले। जबकि 876 मरीज संदिग्ध पाए गए थे। मगर इस साल डेंगू ने जिले में 2013 का का रिकार्ड तोड़ने बुरी तरह कहर बरपाया है। इस साल अभी तक एलायजा रिपोर्ट में 586 मरीजों की पुष्टि हो चुकी है। जबकि संदिग्ध मरीजों की संख्या 1348 तक पहुंच गई। जबकि अभी भी जिले में डेंगू का कहर कम होने का नाम नहीं ले रहा है।
29 मरीजों में डेंगू की पुष्टि, 30 नए संदिग्ध मरीज मिले
हरिद्वार। स्वास्थ्य विभाग की डेंगू की एलायजा रिपोर्ट में 29 मरीजों में डेंगू की पुष्टि हुई है। साथ ही तीस नए संदिग्ध मरीज सामने आए हैं। नए मरीजों के मामले आने से विभागीय अधिकारी चिंतित तो नजर आए, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई काम नहीं कर रहे हैं। जिला स्वास्थ्य विभाग ने शनिवार को 45 मरीजों की एलायजा रिपोर्ट लगाई। इसमें 29 मरीजों में डेंगू की पुष्टि हुई है। इसके अलावा डेंगू के 30 संदिग्ध मरीज नए आए हैं। अब जनपद के स्वास्थ्य विभाग के साथ नगर स्वास्थ्य विभाग भी डेंगू के प्रति संवेदनहीन हो चुका है। किसी भी स्थान पर कोई अभियान नहीं चलाया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग सर्दी बढ़ने के इंतजार में हाथ पर हाथ धरे बैठा है।
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जनपद में कोई ऐसा घर होगा, जिसमें आशाओं के साथ विभाग की टीम न गई होगी। जागरूकता अभियान भी बड़े स्तर पर चलाया गया, लेकिन डेंगू का संक्रमण बड़े स्तर पर फैले होने के चलते हुए मरीजों के मामले सामने आ रहे हैं। कई-कई बार फॉगिंग के साथ कीटनाशकों का छिड़काव भी हुआ। डेंगू से बचाव एकमात्र जागरूकता अभियान है।
- डॉ. सरोज नैथानी, सीएमओ
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हरिद्वार जिले में डेंगू का डंक 2010 से कहर बरपा रहा है। हालांकि स्वास्थ्य विभाग के पास 2013 के आंकड़े ही उपलब्ध हो पाए हैं। स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के अनुसार 2013 में 468 मरीजों में डेंगू की पुष्टि हुई थी। जबकि इनमें से सात लोगों की मौत भी हुई थी। हालांकि उस वर्ष डेंगू के संदिग्ध मरीजों का आंकड़ा डेढ़ हजार के पार पहुंच गया था। इसके बाद 2017 में डेंगू के मरीजों में कमी आई। इस वर्ष 294 मरीजों में डेंगू की पुष्टि हुई। इसमें से भी 3 मरीजों की मौत हो गई थी। 2018 में स्वास्थ्य विभाग ने फिर डेंगू पर काबू पाया। इस वर्ष जिले में एलायजा रिपोर्ट में 266 मरीज डेंगू से पीड़ित मिले। जबकि 876 मरीज संदिग्ध पाए गए थे। मगर इस साल डेंगू ने जिले में 2013 का का रिकार्ड तोड़ने बुरी तरह कहर बरपाया है। इस साल अभी तक एलायजा रिपोर्ट में 586 मरीजों की पुष्टि हो चुकी है। जबकि संदिग्ध मरीजों की संख्या 1348 तक पहुंच गई। जबकि अभी भी जिले में डेंगू का कहर कम होने का नाम नहीं ले रहा है।
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29 मरीजों में डेंगू की पुष्टि, 30 नए संदिग्ध मरीज मिले
हरिद्वार। स्वास्थ्य विभाग की डेंगू की एलायजा रिपोर्ट में 29 मरीजों में डेंगू की पुष्टि हुई है। साथ ही तीस नए संदिग्ध मरीज सामने आए हैं। नए मरीजों के मामले आने से विभागीय अधिकारी चिंतित तो नजर आए, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई काम नहीं कर रहे हैं। जिला स्वास्थ्य विभाग ने शनिवार को 45 मरीजों की एलायजा रिपोर्ट लगाई। इसमें 29 मरीजों में डेंगू की पुष्टि हुई है। इसके अलावा डेंगू के 30 संदिग्ध मरीज नए आए हैं। अब जनपद के स्वास्थ्य विभाग के साथ नगर स्वास्थ्य विभाग भी डेंगू के प्रति संवेदनहीन हो चुका है। किसी भी स्थान पर कोई अभियान नहीं चलाया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग सर्दी बढ़ने के इंतजार में हाथ पर हाथ धरे बैठा है।
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जनपद में कोई ऐसा घर होगा, जिसमें आशाओं के साथ विभाग की टीम न गई होगी। जागरूकता अभियान भी बड़े स्तर पर चलाया गया, लेकिन डेंगू का संक्रमण बड़े स्तर पर फैले होने के चलते हुए मरीजों के मामले सामने आ रहे हैं। कई-कई बार फॉगिंग के साथ कीटनाशकों का छिड़काव भी हुआ। डेंगू से बचाव एकमात्र जागरूकता अभियान है।
- डॉ. सरोज नैथानी, सीएमओ