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...फर्जी दस्तावेज के आधार पर बैंक से लिया 23 लाख का ऋण
Updated Sat, 18 Aug 2018 12:52 AM IST
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हरिद्वार। दूसरे की संपत्ति को अपनी दर्शाकर उसे बैंक में गिरवी रखकर 23 लाख का ऋण लेने के आरोप में पिता-पुत्र के खिलाफ कोतवाली ज्वालापुर पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया है।
प्रेमनगर आश्रम कैंपस में केनरा बैंक के शाखा प्रबंधक एमएस चौहान ने स्थानीय पुलिस को जानकारी दी कि उनके बैंक से अनिल कुमार और उनके बेटे शुभम कश्यप ने ऋण के लिए आवेदन किया था। आरोप है कि मोहल्ला मालियान के रहने वाले पिता-पुत्र ने अपनी भूमि को उत्तरांचल ग्रामीण बैंक में गिरवी रखकर ऋण लिया हुआ था। आरोपियों ने अपने मकान से सटी संपत्ति के फर्जी दस्तावेज बनाकर उसके बैंक में गिरवी रख दिया और शुभम एग्रो इंडस्ट्रीज कंपनी के नाम पर करीब 23 लाख का ऋण ले लिया। जिस कंपनी के नाम पर ऋण लिया गया उसका प्रोपराइटर शुभम कश्यप है और उसके पिता अनिल कुमार गारंटर बने थे। जब बैंक को किश्त मिलनी बंद हुई तो बैंक ने गिरवी रखी गई संपत्ति पर काबिज होने की प्रक्रिया शुरू की तो पता चला कि उक्त संपत्ति उनकी नहीं है। फर्जी दस्तावेज बनाकर उस संपत्ति को अपना बताकर उनके बैंक से ऋण लिया गया है। कोतवाली प्रभारी अमरजीत सिंह ने बताया कि पिता पुत्र के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है।
भौतिक सत्यापन के बिना ही दे दिया था ऋण
हरिद्वार। 23 लाख के ऋण के प्रकरण में बैंक कर्मचारियों की भूमिका भी संदिग्ध है। स्थानीय पुलिस उसकी भी जांच में जुटी है। हैरानी करने वाली बात यह है कि एक सामान्य व्यक्ति के लिए ऋण प्राप्त करना एक ख्वाब जैसा ही है। बैंक कर्मचारियों के सवाल, दस्तावेज की खानापूर्ति में ही आम व्यक्ति बैंक शाखा की चौखट पर एड़ियां रगड़कर थक जाता है। यहां 23 लाख का ऋण देते हुए भौतिक सत्यापन क्यों नहीं हुआ। यदि भौतिक सत्यापन होता तो हकीकत सामने आ जा जाती है। कोतवाली प्रभारी अमरजीत सिंह की माने तो बैंक कर्मचारियों की भूमिका भी संदिग्ध है, उसकी गहनता से जांच होगी।
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प्रेमनगर आश्रम कैंपस में केनरा बैंक के शाखा प्रबंधक एमएस चौहान ने स्थानीय पुलिस को जानकारी दी कि उनके बैंक से अनिल कुमार और उनके बेटे शुभम कश्यप ने ऋण के लिए आवेदन किया था। आरोप है कि मोहल्ला मालियान के रहने वाले पिता-पुत्र ने अपनी भूमि को उत्तरांचल ग्रामीण बैंक में गिरवी रखकर ऋण लिया हुआ था। आरोपियों ने अपने मकान से सटी संपत्ति के फर्जी दस्तावेज बनाकर उसके बैंक में गिरवी रख दिया और शुभम एग्रो इंडस्ट्रीज कंपनी के नाम पर करीब 23 लाख का ऋण ले लिया। जिस कंपनी के नाम पर ऋण लिया गया उसका प्रोपराइटर शुभम कश्यप है और उसके पिता अनिल कुमार गारंटर बने थे। जब बैंक को किश्त मिलनी बंद हुई तो बैंक ने गिरवी रखी गई संपत्ति पर काबिज होने की प्रक्रिया शुरू की तो पता चला कि उक्त संपत्ति उनकी नहीं है। फर्जी दस्तावेज बनाकर उस संपत्ति को अपना बताकर उनके बैंक से ऋण लिया गया है। कोतवाली प्रभारी अमरजीत सिंह ने बताया कि पिता पुत्र के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है।
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भौतिक सत्यापन के बिना ही दे दिया था ऋण
हरिद्वार। 23 लाख के ऋण के प्रकरण में बैंक कर्मचारियों की भूमिका भी संदिग्ध है। स्थानीय पुलिस उसकी भी जांच में जुटी है। हैरानी करने वाली बात यह है कि एक सामान्य व्यक्ति के लिए ऋण प्राप्त करना एक ख्वाब जैसा ही है। बैंक कर्मचारियों के सवाल, दस्तावेज की खानापूर्ति में ही आम व्यक्ति बैंक शाखा की चौखट पर एड़ियां रगड़कर थक जाता है। यहां 23 लाख का ऋण देते हुए भौतिक सत्यापन क्यों नहीं हुआ। यदि भौतिक सत्यापन होता तो हकीकत सामने आ जा जाती है। कोतवाली प्रभारी अमरजीत सिंह की माने तो बैंक कर्मचारियों की भूमिका भी संदिग्ध है, उसकी गहनता से जांच होगी।
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