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कोर्ट ने बंसत भवन नगर निगम के हवाले
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आखिरकार लंबी कानूनी लड़ाई के बाद स्थानीय न्यायालय ने करोड़ों रुपये मूल्य की संपत्ति बसंत भवन खड़खड़ी को नगर निगम के कब्जे में दे दिया। बसंत भवन में रहे रहे दुुकानदारों तथा निवासियों ने भवन को खाली कर दिया है। कोर्ट द्वारा नियुक्त अमीन ने भवन को सील कराकर इसे नगर आयुक्त उदय सिंह राणा की सुपुर्दगी में दे दिया है। इस मौके पर पुलिस फोर्स तैनात थी, लेकिन लोगों ने खुद अपना सामान निकाल कर भवन को खाली कर दिया। भवन को खाली कराने के लिए मौके पर सहायक नगर आयुक्त महेंद्र यादव, कर एवं राजस्व अधीक्षक रमेश रावत, सहायक अभियंता दिनेश उनियाल, मानचित्रकार दिनेश कांडपाल आदि मौजूद थे। जिन कब्जेदारों ने भवन खाली किया, उनमें रोशनलाल, कलावती, श्रवणलाल व अशोक गिरि प्रमुख हैं।
हरिद्वार-ऋषिकेश मुख्य मार्ग पर खड़खड़ी में स्थित बसंत भवन 8000 वर्ग फीट में फैला है। सुप्रीम कोर्ट ने अवैध कब्जेदारों को 31 दिसंबर 2011 तक संपत्ति का कब्जा नगरपालिका को देने का आदेश दे रखा था। इस आदेश के बाद काबिज लोगों ने नगरपालिका की सांठगांठ से अपने को संपत्ति में पुश्तैनी किरायेदार होने का स्थानीय न्यायालय में वाद दायर किया था, लेकिन वे कुछ साबित नहीं कर पाए। 19 जुलाई को स्थानीय न्यायालय ले उनका रिवीजन वाद खारिज कर दिया था और 20 जुलाई को लोअर कोर्ट ने अमीन नियुक्त कर संपत्ति का कब्जा नगर निगम को देने का आदेश दिया था। नगर आयुक्त उदय सिंह राणा ने संपत्ति को कब्जे में लेने की पुष्टि की है।
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हरिद्वार-ऋषिकेश मुख्य मार्ग पर खड़खड़ी में स्थित बसंत भवन 8000 वर्ग फीट में फैला है। सुप्रीम कोर्ट ने अवैध कब्जेदारों को 31 दिसंबर 2011 तक संपत्ति का कब्जा नगरपालिका को देने का आदेश दे रखा था। इस आदेश के बाद काबिज लोगों ने नगरपालिका की सांठगांठ से अपने को संपत्ति में पुश्तैनी किरायेदार होने का स्थानीय न्यायालय में वाद दायर किया था, लेकिन वे कुछ साबित नहीं कर पाए। 19 जुलाई को स्थानीय न्यायालय ले उनका रिवीजन वाद खारिज कर दिया था और 20 जुलाई को लोअर कोर्ट ने अमीन नियुक्त कर संपत्ति का कब्जा नगर निगम को देने का आदेश दिया था। नगर आयुक्त उदय सिंह राणा ने संपत्ति को कब्जे में लेने की पुष्टि की है।
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