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खास रणनीति के तहत जिले भर से जुटाए कांग्रेसी
मेहताब आलम हरिद्वार
Updated Fri, 27 Jan 2017 10:39 PM IST
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मुख्यमंत्री हरीश रावत ने अपने नामांकन के बहाने जिलेभर के कांग्रेसियों को जुटाकर भाजपा पर मनोवैज्ञानिक बढ़त बनाने का प्रयास किया। सीएम ने सरकार गिराने, स्टिंग, सीबीआई जांच व दल बदल जैसे जख्मों को गिनाकर भाजपा पर प्रहार किए और कार्यकर्ताओं में जोश भरा। वहीं कार्यकर्ताओं को नसीहत देना भी हरीश रावत नहीं भूले। उन्होंने कहा कि कार्यकर्ता यह मत देखें कि उम्मीदवार कौन है, सिर्फ कांग्रेस के लिए काम करें।
मुख्यमंत्री हरीश रावत के हरिद्वार ग्रामीण विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने का साफ असर जिले की कांग्रेस में दिखाई देने लगा है। राजनीतिक हल्कों में भी इस बात की चर्चाएं जोरों पर हैं कि सीएम के आने से हरिद्वार जिले में कांग्रेस दोबारा जिंदा हो गई है। शुक्रवार को सीएम के नामांकन के दौरान कांग्रेस गुटों के बजाय सैलाब के रूप में नजर आई। खास बात यह रही कि जिले के अधिकांश प्रत्याशियों के अलावा उनके सामने टिकट मांग रहे नेता भी समर्थकों की भीड़ लेकर नामांकन में हाजिर हुए। वहीं लंबे समय से निष्क्रिय चल रहे पुराने कांग्रेसी नेता भी सीएम के सामने अपनी वफादारी साबित करने नामांकन में पहुंचे। हाल यह रहा कि कांग्रेस ने मुख्यमंत्री के नामांकन के लिए केवल एक हजार समर्थकों और 25 झंडों की अनुमति चुनाव आयोग से ली थी। लेकिन शिवालिकनगर चौक से लेकर जिला मुख्यालय तक वाहनों की कतारें और हजारों कार्यकर्ता व समर्थक हाथ में कांग्रेस के झंडे बैनर लिए दिखाई दिए।
कार्यकर्ताओं और समर्थकों की भीड़ से उत्साहित मुख्यमंत्री हरीश रावत ने प्रदेश में सरकार की उठापटक से लेकर दल बदल तक के तमाम प्रकरणों को छुआ और उनमें जोश का संचार किया। सीएम ने यह कहकर भी एकजुटता की अपील की कि इस बार जोर लगा दिया तो 2020 तक हर जगह तुम ही तुम नजर आओगे। यहां सीएम का इशारा भविष्य के निकाय व पंचायत चुनाव से था। मुख्यमंत्री ने टिकट न मिलने से असंतुष्ट दावेदारों और उनके समर्थकों को भी कांग्रेस के लिए मन से काम करने की भावुक अपील की।
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समर्थकों को नापनी पड़ी पांच किमी सड़क
सीएम के नामांकन में पहुंचे समर्थकों की बसों को शिवालिकनगर चौक के आसपास ही रोक दिया गया। यहां से सैकड़ों समर्थक पैदल ही कलेक्ट्रेट पहुंचे। नामांकन के लिए जाने के दौरान कार्यकर्ता व समर्थक जोश में नारेबाजी करते हुए आसानी से कचहरी चौक पहुंच गए। लेकिन वापसी में कार्यकर्ता अपने अपने नेताओं की गाड़ियों में सवार होकर सीएम के काफिले में शामिल हो गए।
मुख्यमंत्री हरीश रावत के हरिद्वार ग्रामीण विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने का साफ असर जिले की कांग्रेस में दिखाई देने लगा है। राजनीतिक हल्कों में भी इस बात की चर्चाएं जोरों पर हैं कि सीएम के आने से हरिद्वार जिले में कांग्रेस दोबारा जिंदा हो गई है। शुक्रवार को सीएम के नामांकन के दौरान कांग्रेस गुटों के बजाय सैलाब के रूप में नजर आई। खास बात यह रही कि जिले के अधिकांश प्रत्याशियों के अलावा उनके सामने टिकट मांग रहे नेता भी समर्थकों की भीड़ लेकर नामांकन में हाजिर हुए। वहीं लंबे समय से निष्क्रिय चल रहे पुराने कांग्रेसी नेता भी सीएम के सामने अपनी वफादारी साबित करने नामांकन में पहुंचे। हाल यह रहा कि कांग्रेस ने मुख्यमंत्री के नामांकन के लिए केवल एक हजार समर्थकों और 25 झंडों की अनुमति चुनाव आयोग से ली थी। लेकिन शिवालिकनगर चौक से लेकर जिला मुख्यालय तक वाहनों की कतारें और हजारों कार्यकर्ता व समर्थक हाथ में कांग्रेस के झंडे बैनर लिए दिखाई दिए।
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कार्यकर्ताओं और समर्थकों की भीड़ से उत्साहित मुख्यमंत्री हरीश रावत ने प्रदेश में सरकार की उठापटक से लेकर दल बदल तक के तमाम प्रकरणों को छुआ और उनमें जोश का संचार किया। सीएम ने यह कहकर भी एकजुटता की अपील की कि इस बार जोर लगा दिया तो 2020 तक हर जगह तुम ही तुम नजर आओगे। यहां सीएम का इशारा भविष्य के निकाय व पंचायत चुनाव से था। मुख्यमंत्री ने टिकट न मिलने से असंतुष्ट दावेदारों और उनके समर्थकों को भी कांग्रेस के लिए मन से काम करने की भावुक अपील की।
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सीएम के नामांकन में पहुंचे समर्थकों की बसों को शिवालिकनगर चौक के आसपास ही रोक दिया गया। यहां से सैकड़ों समर्थक पैदल ही कलेक्ट्रेट पहुंचे। नामांकन के लिए जाने के दौरान कार्यकर्ता व समर्थक जोश में नारेबाजी करते हुए आसानी से कचहरी चौक पहुंच गए। लेकिन वापसी में कार्यकर्ता अपने अपने नेताओं की गाड़ियों में सवार होकर सीएम के काफिले में शामिल हो गए।