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Haridwar News: उपभोक्ता आयोग ने वादकारी के लगातार अनुपस्थित रहने पर शिकायत खारिज की
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- एआरटीओ हरिद्वार के खिलाफ आयोग में वर्ष 2019 को दर्ज कराई गई थी शिकायत
- 26 सितंबर को पीठ के आदेश का पालन भी वादकारी ने नहीं किया
संवाद न्यूज एजेंसी
रोशनाबाद। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने वादकारी जयंत कुमार की शिकायत खारिज कर दी है। यह शिकायत एआरटीओ हरिद्वार और अन्य के खिलाफ उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 के तहत दर्ज की गई थी। आयोग ने शिकायतकर्ता और उनके अधिवक्ता की लगातार अनुपस्थिति को इसका मुख्य कारण बताया।
आयोग के अध्यक्ष गगन कुमार गुप्ता, सदस्य रंजना गोयल और सदस्य डॉ. अमरेश रावत की पीठ ने यह आदेश दिया। इस मामले की सुनवाई के लिए फाइल प्रस्तुत की गई थी। हालांकि, शिकायतकर्ता और उनके अधिवक्ता सुनवाई के दौरान अनुपस्थित रहे। पीठ ने पाया कि शिकायतकर्ता ने 26 सितंबर 2025 के आदेश का पालन नहीं किया था। उन्हें विपक्षी संख्या दो के खिलाफ दोबारा नोटिस भेजने की पैरवी पूरी करनी थी।
इस कार्य के लिए 10 फरवरी 2026 के आदेश से 8 अप्रैल 2026 तक अंतिम अवसर दिया गया था। इसके बावजूद शिकायतकर्ता ने आयोग के आदेश का अनुपालन नहीं किया। शिकायतकर्ता और उनके अधिवक्ता 10 फरवरी 2026 से लगातार अनुपस्थित चल रहे थे। आयोग ने निष्कर्ष निकाला कि शिकायतकर्ता को अपना परिवाद चलाने में कोई रुचि नहीं है।
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ऐसी स्थिति में शिकायत को आगे लंबित रखना उचित नहीं था। शिकायतकर्ता और उनके अधिवक्ता लगातार सुनवाई में अनुपस्थित रहे। इन कारणों से आयोग ने शिकायत को अदम पैरवी में निरस्त कर दिया। मामले की फाइल को अभिलेखागार में संरक्षित करने का आदेश दिया गया।
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- 26 सितंबर को पीठ के आदेश का पालन भी वादकारी ने नहीं किया
संवाद न्यूज एजेंसी
रोशनाबाद। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने वादकारी जयंत कुमार की शिकायत खारिज कर दी है। यह शिकायत एआरटीओ हरिद्वार और अन्य के खिलाफ उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 के तहत दर्ज की गई थी। आयोग ने शिकायतकर्ता और उनके अधिवक्ता की लगातार अनुपस्थिति को इसका मुख्य कारण बताया।
आयोग के अध्यक्ष गगन कुमार गुप्ता, सदस्य रंजना गोयल और सदस्य डॉ. अमरेश रावत की पीठ ने यह आदेश दिया। इस मामले की सुनवाई के लिए फाइल प्रस्तुत की गई थी। हालांकि, शिकायतकर्ता और उनके अधिवक्ता सुनवाई के दौरान अनुपस्थित रहे। पीठ ने पाया कि शिकायतकर्ता ने 26 सितंबर 2025 के आदेश का पालन नहीं किया था। उन्हें विपक्षी संख्या दो के खिलाफ दोबारा नोटिस भेजने की पैरवी पूरी करनी थी।
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इस कार्य के लिए 10 फरवरी 2026 के आदेश से 8 अप्रैल 2026 तक अंतिम अवसर दिया गया था। इसके बावजूद शिकायतकर्ता ने आयोग के आदेश का अनुपालन नहीं किया। शिकायतकर्ता और उनके अधिवक्ता 10 फरवरी 2026 से लगातार अनुपस्थित चल रहे थे। आयोग ने निष्कर्ष निकाला कि शिकायतकर्ता को अपना परिवाद चलाने में कोई रुचि नहीं है।
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ऐसी स्थिति में शिकायत को आगे लंबित रखना उचित नहीं था। शिकायतकर्ता और उनके अधिवक्ता लगातार सुनवाई में अनुपस्थित रहे। इन कारणों से आयोग ने शिकायत को अदम पैरवी में निरस्त कर दिया। मामले की फाइल को अभिलेखागार में संरक्षित करने का आदेश दिया गया।