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चारधाम से सेनेटाइज, कावड़ यात्रा से कोरोना संक्रमण का खात्मा
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करीब दो साल तक कोरोना संक्रमण की मार झेल रहे बाजार के लिए चारधाम यात्रा संजीवनी साबित हुई है। यात्रा को शुरू हुए अभी पंद्रह दिन ही बीते हैं और देशभर से अब तक लाखों श्रद्धालु चारधाम की यात्रा कर चुके हैं। इतने ही सैलानी हरिद्वार, ऋषिकेश और मसूरी की सैर करके लौट चुके। इसका सीधा लाभ धर्मनगरी के हर छोटे-बड़े कारोबारी को मिला है। खास बात यह है कि अगले पंद्रह दिन तक के लिए भी धर्मनगरी की अधिकांश धर्मशालाएं, लॉज, होटल और व्यवसायिक वाहन एडवांस बुकिंग में हैं।
मालूम हो कि मार्च 2020 में देश में कोरोना के केस सामने आने के बाद संपूर्ण लॉकडाउन लगा दिया गया था। इसी बीच उत्तराखंड के चारधाम के कपाट तो खुले, लेकिन यात्रा करने की अनुमति नहीं मिली। कई महीनों के बाद कुछ पाबंदियों के साथ लॉकडाउन हटाया गया था। तब सावन की कांवड़ यात्रा की भी अनुमति नहीं मिल सकी। इसके बाद 2021 में कोरोना की दूसरी लहर ने कहर बरपा दिया था। इस दौरान कुंभ के कई शाही स्नान भी सांकेतिक ही कराने पड़े थे। कोरोना की पहली और दूसरी लहर ने हर तरह के व्यापार को चौपट कर दिया था। धर्मनगरी का हर कारोबारी एक-एक श्रद्धालु व सैलानी ही राह देखने के लिए तरस गया था।
इस साल कोरोना संक्रमण के केस कम होने के बाद सरकार ने चारधाम यात्रा को हर तरह की पाबंदी से मुक्त कर दिया था। इसका असर देखने को मिल रहा है। 3 मई को गंगोत्री और यमुनोत्री के कपाट खोलने के साथ चारधाम यात्रा शुरू हुई। यात्रा को एक पखवाड़ा हो गया। इस दौरान लाखों श्रद्धालु और सैलानी यहां पहुंचे हैं। हर रोज हजारों श्रद्धालु चारधाम जा रहा और वहां से लौट रहा। अधिकांश यात्री धामों में जाने से पहले और बाद में हरिद्वार जरूर रुकता है। इसके अलावा हर वीकेंड पर बड़ी संख्या में लोग यहां पहुंच रहे हैं। संवाद
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दो स्नान पर्व पर उमड़ी थी लाखों की भीड़
इस बीच में दो स्नान पर्व भी हुए। आठ मई को गंगा सप्तमी स्नान के दिन देशभर के करीब छह लाख श्रद्धालु डुबकी लगाने हरिद्वार आए थे। इसी तरह से बुद्ध पूर्णिमा पर करीब 12 लाख श्रद्धालुओं ने गंगा स्नान किया। इन दो दिनों में ही 18 लाख श्रद्धालु हरिद्वार पहुंचा।
शहर के बाहर के होटलों में नहीं मिली थी जगह
पिछले सप्ताह तो श्रद्धालुओं को ऐसा सैलाब उमड़ा कि शहर के सैकड़ों होटल, धर्मशाला, लॉज कम पड़ गए। भीड़ का आलम यह था कि शहर से बाहर कई किलोमीटर दूर श्यामपुर, बहादराबाद, सिडकुल और शिवालिक नगर के होटल व गेस्ट हाउस में भी कमरे नहीं मिले।
कोरोना काल में दो वर्षों से व्यापारी वर्ग टूट चुका चुका था। अब चारधाम यात्रा से होटल, धर्मशालाएं व अन्य कारोबार उबर रहा है। अब भीड़ के साथ ही व्यापारियों में खुशी की लहर है। वहीं कावंड़ यात्रा भी काफी राहत हरिद्वार के व्यापारियों को देगी।
- संजीव नैयर, व्यापारी नेता
चारधाम यात्रा से जय जयकार हो रही है। इस बार भीड़ से सारे गिले शिकवे दूर हो गए हैं। स्नान पर्व के अलावा वीकेंड पर आने वाली श्रद्धालुओं की भीड़ ने व्यापारियों के चेहरों पर खुशियां ला रही है।
- राजेंद्र वधावन गंगा रत्न केंद्र मूर्ति व नग विक्रेता सुभाष घाट
चारधाम यात्रा के 15 दिनों ने किसी प्यासे आदमी के मुंह में गंगाजल डालने का काम किया है। चारधाम के साथ ही कांवड़ यात्रा में भी हरिद्वार के कारोबारियों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
- आशुतोष शर्मा, अध्यक्ष होटल एसोसिएशन हरिद्वार
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मालूम हो कि मार्च 2020 में देश में कोरोना के केस सामने आने के बाद संपूर्ण लॉकडाउन लगा दिया गया था। इसी बीच उत्तराखंड के चारधाम के कपाट तो खुले, लेकिन यात्रा करने की अनुमति नहीं मिली। कई महीनों के बाद कुछ पाबंदियों के साथ लॉकडाउन हटाया गया था। तब सावन की कांवड़ यात्रा की भी अनुमति नहीं मिल सकी। इसके बाद 2021 में कोरोना की दूसरी लहर ने कहर बरपा दिया था। इस दौरान कुंभ के कई शाही स्नान भी सांकेतिक ही कराने पड़े थे। कोरोना की पहली और दूसरी लहर ने हर तरह के व्यापार को चौपट कर दिया था। धर्मनगरी का हर कारोबारी एक-एक श्रद्धालु व सैलानी ही राह देखने के लिए तरस गया था।
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इस साल कोरोना संक्रमण के केस कम होने के बाद सरकार ने चारधाम यात्रा को हर तरह की पाबंदी से मुक्त कर दिया था। इसका असर देखने को मिल रहा है। 3 मई को गंगोत्री और यमुनोत्री के कपाट खोलने के साथ चारधाम यात्रा शुरू हुई। यात्रा को एक पखवाड़ा हो गया। इस दौरान लाखों श्रद्धालु और सैलानी यहां पहुंचे हैं। हर रोज हजारों श्रद्धालु चारधाम जा रहा और वहां से लौट रहा। अधिकांश यात्री धामों में जाने से पहले और बाद में हरिद्वार जरूर रुकता है। इसके अलावा हर वीकेंड पर बड़ी संख्या में लोग यहां पहुंच रहे हैं। संवाद
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दो स्नान पर्व पर उमड़ी थी लाखों की भीड़
इस बीच में दो स्नान पर्व भी हुए। आठ मई को गंगा सप्तमी स्नान के दिन देशभर के करीब छह लाख श्रद्धालु डुबकी लगाने हरिद्वार आए थे। इसी तरह से बुद्ध पूर्णिमा पर करीब 12 लाख श्रद्धालुओं ने गंगा स्नान किया। इन दो दिनों में ही 18 लाख श्रद्धालु हरिद्वार पहुंचा।
शहर के बाहर के होटलों में नहीं मिली थी जगह
पिछले सप्ताह तो श्रद्धालुओं को ऐसा सैलाब उमड़ा कि शहर के सैकड़ों होटल, धर्मशाला, लॉज कम पड़ गए। भीड़ का आलम यह था कि शहर से बाहर कई किलोमीटर दूर श्यामपुर, बहादराबाद, सिडकुल और शिवालिक नगर के होटल व गेस्ट हाउस में भी कमरे नहीं मिले।
कोरोना काल में दो वर्षों से व्यापारी वर्ग टूट चुका चुका था। अब चारधाम यात्रा से होटल, धर्मशालाएं व अन्य कारोबार उबर रहा है। अब भीड़ के साथ ही व्यापारियों में खुशी की लहर है। वहीं कावंड़ यात्रा भी काफी राहत हरिद्वार के व्यापारियों को देगी।
- संजीव नैयर, व्यापारी नेता
चारधाम यात्रा से जय जयकार हो रही है। इस बार भीड़ से सारे गिले शिकवे दूर हो गए हैं। स्नान पर्व के अलावा वीकेंड पर आने वाली श्रद्धालुओं की भीड़ ने व्यापारियों के चेहरों पर खुशियां ला रही है।
- राजेंद्र वधावन गंगा रत्न केंद्र मूर्ति व नग विक्रेता सुभाष घाट
चारधाम यात्रा के 15 दिनों ने किसी प्यासे आदमी के मुंह में गंगाजल डालने का काम किया है। चारधाम के साथ ही कांवड़ यात्रा में भी हरिद्वार के कारोबारियों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
- आशुतोष शर्मा, अध्यक्ष होटल एसोसिएशन हरिद्वार