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तीन माह में 16 फैक्ट्रियों ने लिया सीईटीपी कनेक्शन
ब्यूरो, अमर उजाला/हरिद्वार
Updated Thu, 09 Jul 2015 01:19 AM IST
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पॉलुशन कंट्रोल बोर्ड और एनजीटी (नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल) की सख्ती के बाद भी सिडकुल के अधिकतर फैक्ट्री प्रबंधक सीईटीपी (संयुक्त उत्प्रवाह संशोधन संयंत्र) कनेक्शन लेने में दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं। यह हाल तब है जब सिडकुल प्रशासन ने उद्यमियों को कनेक्शन के लिए तीन माह का समय दिया था, लेकिन इस बीच महज 16 प्रबंधकों ने ही कनेक्शन लिए।
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118 फैक्ट्रियों का पानी अब तक भी नाले में बह रहा है। सिडकुल में इस समय 600 फैक्ट्रियों में उत्पादन हो रहा है। इनमें से 134 फैक्ट्रियां ऐसी थी जिन्होंने सीईटीपी का कनेक्शन नहीं लिया था। सभी उद्यमी कनेक्शन ले इसके लिए सिडकुल प्रशासन ने उद्यमियों के साथ सात अप्रैल को बैठक की।
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उसमें उद्यमियों ने कनेक्शन लेने के लिए हामी भरी थी। प्रशासन ने कनेक्शन शुल्क में भी संशोधन किया था। लेकिन तीन माह के बाद भी 16 फैक्ट्रियां सीईटीपी कनेक्शन से जुड़ी। शेष फैक्ट्रियों का अपशिष्ट अब भी नाले में बह रहा हैं।
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बहादराबाद और हरिद्वार में लगे सीईटीपी
सिडकुल इंटर प्रीन्योर्स वेलफेयर एसोसिएशन के महासचिव हीमेश कपूर ने कहा कि सरकार को हरिद्वार और बहादराबाद में भी सीईटीपी (संयुक्त उत्प्रवाह संशोधन संयंत्र) भी लगाने चाहिए। उन्होंने कहा कि नियम सबके लिए समान होने चाहिए। हरिद्वार और बहादराबाद में भी कई फैक्ट्रियों से अपशिष्ट निकलता है।
उन्होंने बताया कि एमएसएमई (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उपक्रम ) को कनेक्शन शुल्क में रियायत देने के बाद सिडकुल के अधिकतर छोटे उद्यमियों की ओर से सीईटीपी कनेक्शन के लिए आवेदन किया है। उनमें से कई फैक्ट्रियों में कनेक्शन लग गए हैं।