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भाई को तिलक लगा की लंबी आयु की कामना
ब्यूरो/अमर उजाला, रुड़की
Updated Sat, 14 Nov 2015 12:03 AM IST
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भैया दूज का त्योहार शहर और देहात में हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। बहनों ने शगुन लेकर पहुंचे भाइयों का अक्षत और रोली से तिलक उनकी लंबी आयु की कामना की।
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पौराणिक कथाओं के अनुसार इस दिन जो भाई अपनी बहन के घर जाकर तिलक लगाकर भोजन ग्रहण करता है। उसे बहन की ओर से की गई प्रार्थना का फल स्वयं भगवान यमराज देते हैं।
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शहर और देहात क्षेत्रों में भैया दूज का पर्व धूमधाम से मनाया गया। भाइयों के पहुंचने केे खुशी में घर-घर में स्वादिष्ट व्यंजन तैयार किए गए थे।
इस दौरान महिलाओं ने घर में भैया दूज की कथा भी पढ़ी और भगवान यमराज से प्रार्थना की कि जिस तरह से उन्होंने अपनी बहन यमुना को प्रसन्न किया। इसी तरह उनके घर आए भाइयों पर भी अपनी दया दृष्टि रखें। इसके अलावा मंदिरों में भी भैया दूज के महात्म्य का वर्णन किया गया। राम मंदिर रामनगर में पंडित कैलाश चंद्र शास्त्री एवं श्री भवानी शंकर आश्रम में गुरुकृपा आध्यात्मिक चेतना संस्थान में महंत रीमा गिरी एवं पूर्वावली स्थित ज्योतिष अनुसंधान केंद्र में श्रद्धालुुओं को संबोधित करते हुए पंडित लोकेश शास्त्री ने बताया कि भाई दूज कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाए जाने वाले पर्व को यम द्वितीया भी कहते हैं।
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उन्होंने पौराणिक कथाओं का उदाहरण देते हुए बताया कि यमुना अपने भाई को घर आकर भोजन के लिए निमंत्रण देती है। यमराज ने सोचा कि मैं तो प्राणों को हरने वाला हूं। मुझे कोई भी अपने घर नहीं बुलाना चाहता। लेकिन बहन की भावना का आदर करना भी मेरा धर्म है।
बहन के घर आते समय यमराज ने नरक निवास करने वाले जीवों को मुक्त कर दिया। यमराज को अपने घर आया देखकर यमुना की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। उसने स्नान कर पूजन करके व्यंजन परोसकर भोजन कराया। यमुना द्वारा किए गए आतिथ्य से यमराज ने प्रसन्न होकर बहन को वर मांगने का आदेश दिया।
यमुना ने कहा कि आप प्रति वर्ष इसी दिन मेरे घर आया करो। मेरी तरह जो बहन इस दिन अपने भाई को आदर सत्कार करके टीका करे, उसे तुम्हारा भय न रहे। यमराज ने तथास्तु कहकर यमुना को अमूल्य वस्त्राभूषण देकर यमलोक की राह की। इसी दिन से पर्व की परंपरा बनी। इस मौके पर रत्नाकर शर्मा, कृष्णा शर्मा, कमलेश माटा, किशन माटा एवं ललित मेहंदीरत्ता, प्रभाकर पंत, सोनू, हिमानी, ऋद्धि, कृष्णा, रजनी आदि मौजूद रहे।