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बहादराबाद सीएचसी को खुद ही इलाज की जरूरत.
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बहादराबाद सीएचसी नेत्र परिक्षण कक्ष में चल रहा जच्चा बच्चा वार्ड।
- फोटो : HARIDWAR
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सरकार के स्वास्थ्य सुविधाओं के दावों की पोल खोलने के लिए कस्बा का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र काफी है। चिकित्सकों के अभाव में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र खुद ही बीमार है। अस्पताल में फिजिशियन तक नहीं है। बाल रोग, स्त्री रोग समेत सात विशेषज्ञ चिकित्सकों के पद खाली हैं। इन हालात में गंभीर मरीजों के आने पर उन्हें रेफर कर दिया जाता है।
14 साल पहले कस्बा स्थित पीएचसी का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में अपग्रेड हुआ। यहां 11 डॉक्टरों के पद सृजित हुए लेकिन अस्पताल में फिजिशयन, सर्जन, आर्थो सर्जन, स्त्री रोग, बाल रोग, निश्चेतक, रेडियोलॉजिस्ट तक की तैनाती नहीं है। चिकित्साधीक्षक, एक संविदा चिकित्सक, दो अन्य डॉक्टर अस्पताल में आने वाले मरीजों को खांसी, जुखाम, सर्दी समेत छोटी-मोटी बीमारियों का उपचार और टीवी की दवाओं का वितरण कर रहे हैं। सोमवार को अस्पताल का कुछ ऐसा रहा नजारा...
समय: 12:54
एक कमरे में बैठे रहे पांच स्वास्थ्य कर्मी
सामुदायिक केंद्र में देखने को मिला कि एक कमरे में ही पांच स्वास्थ्य कर्मी बैठे थे। यही नहीं कमरे की छत और दीवारों पर भी सीलन मिली। महिला मरीज पहुंची थी। कुछ पुरुष भी अपनी बीमारी की समस्या लेकर आए थे। ऐसे में महिलाओं को देखने के लिए अलग कक्ष नहीं था। अस्पताल कर्मियों ने बताया कि अलग कक्ष की मांग कर रहे हैं लेकिन कोई सुनने को तैैैयार नहीं है। एक कक्ष में अधिक मरीजों और चिकित्सकों के होने से कोरोना संक्रमण की तीसरी लहर की आशंका के बाद भी शारीरिक दूरियों की धज्जियां उड़ती हुई मिलीं।
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समय: 12:45
नेत्र सहायक के कक्ष को बना दिया जच्चा-बच्चा केंद्र
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में लेबर रूम में जांच पूरी न होने के कारण ताला लगा होने से नेत्र सहायक के कक्ष को ही जच्चा-बच्चा केंद्र बना दिया गया है। इससे गर्भवती महिलाओं को तो लाभ हुआ है लेकिन नेत्र सहायक के बैठने के लिए कोई स्थायी व्यवस्था अस्पताल में देखने को नहीं मिली। नेत्र सहायक अस्पताल परिसर में इधर-उधर घूमती हुई नजर आईं।
समय : 12:14
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में एक्स-रे रूम पर ताला लटका था। बंद एक्स-रे कक्ष को देखकर मरीज लौटते मिले। बताया गया कि छह माह से एक्स-रे मशीन खराब पड़ी हुई है। अभी तक ठीक नहीं कराया जा सका है। मशीन को ठीक कराने के लिए सीएमओ को पत्र भेजा गया है।
समय: 01:12
दस प्रतिशत तक बाहर से दवा
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के बाहर बने मेडिकल स्टोर पर लोग डॉक्टरों की ओर से लिखी गई दवा खरीदते मिले। अस्पताल प्रशासन की ओर से बताया गया कि उन्हीं दवाओं को बाहर से खरीदने के लिए लिखा जाता है, जो यहां नहीं होती हैं। जरूरी सभी दवाओं का स्टॉक है।
समय: 01:34
केंद्र पर आते हैं औसतन सौ मरीज
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में खांसी, जुकाम, दर्द, टीबी की दवा लेने के लिए मरीज पहुंचते हैं। ओपीडी में मरीज लाइन लगाकर डॉक्टरों से परामर्श लेने के लिए खड़े रहे। एक महिला एमबीबीएस डॉक्टर महिला मरीजों की छोटी-मोटी बीमारियों का उपचार करते हुए ओपीडी में मिली। ज्यादा गंभीर बीमारियों से पीड़ित महिलाओं को वह महिला विशेषज्ञों के पास रेफर करती दिखी। बताया गया कि औसतन सौ मरीज आते हैं।
समय: 01:22
लैब पर लटका मिला ताला
एनएचएम कर्मी के हड़ताल पर होने से लैब पर ताला लटका मिला। इसके कारण खून की विभिन्न प्रकार की जांच नहीं हो रही थीं। मरीज लैब बंद होने से लौट रहे थे। उन्हें जिला अस्पताल में भेजा जा रहा था लेकिन कुछ मरीज निजी अस्पताल में जाने को मजबूर होते हुए मिले।
बोले मरीज
हाथ में काफी दिनों से दर्द था। दोबारा दिखाने आई हूं। पहले से आराम है। दवाएं अस्पताल से मिल जाती हैं।
-शकुंतला, अलीपुर
टीबी की बीमारी है। टेस्ट के लिए लिखा है। हड़ताल के कारण बाहर लैब में टेस्ट कराना पड़ेगा।
-राकेश, जमालपुर
खांसी, जुकाम और ठंड का असर है। डॉक्टर ने दवाई लिखी थी। अस्पताल से दवा मिल गई है। अक्सर दवा यहीं से लेता हूं।
-वसीम भारापुर
खांसी, जुकाम की दवा लेने आया था। परिवार के लिए भी यही से दवा ले जाता हूं। आराम हो जाता है। विशेषज्ञ तैनात हो जाएं तो और लाभ मिलेगा।
-मुंतालिब, बोंगला
डॉक्टरों की नियुक्ति से लेकर भवन निर्माण समेत सभी समस्याओं को दूर करने के लिए सीएमओ के माध्यम से शासन को अवगत कराया जा चुका है। इसके बावजूद न तो डॉक्टरों की तैनाती हो रही है और न ही बिल्डिंग बन रही है। इससे मरीजों को स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ दिए जाने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। -सुबोध जोशी, चिकित्सा अधीक्षक
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14 साल पहले कस्बा स्थित पीएचसी का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में अपग्रेड हुआ। यहां 11 डॉक्टरों के पद सृजित हुए लेकिन अस्पताल में फिजिशयन, सर्जन, आर्थो सर्जन, स्त्री रोग, बाल रोग, निश्चेतक, रेडियोलॉजिस्ट तक की तैनाती नहीं है। चिकित्साधीक्षक, एक संविदा चिकित्सक, दो अन्य डॉक्टर अस्पताल में आने वाले मरीजों को खांसी, जुखाम, सर्दी समेत छोटी-मोटी बीमारियों का उपचार और टीवी की दवाओं का वितरण कर रहे हैं। सोमवार को अस्पताल का कुछ ऐसा रहा नजारा...
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समय: 12:54
एक कमरे में बैठे रहे पांच स्वास्थ्य कर्मी
सामुदायिक केंद्र में देखने को मिला कि एक कमरे में ही पांच स्वास्थ्य कर्मी बैठे थे। यही नहीं कमरे की छत और दीवारों पर भी सीलन मिली। महिला मरीज पहुंची थी। कुछ पुरुष भी अपनी बीमारी की समस्या लेकर आए थे। ऐसे में महिलाओं को देखने के लिए अलग कक्ष नहीं था। अस्पताल कर्मियों ने बताया कि अलग कक्ष की मांग कर रहे हैं लेकिन कोई सुनने को तैैैयार नहीं है। एक कक्ष में अधिक मरीजों और चिकित्सकों के होने से कोरोना संक्रमण की तीसरी लहर की आशंका के बाद भी शारीरिक दूरियों की धज्जियां उड़ती हुई मिलीं।
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समय: 12:45
नेत्र सहायक के कक्ष को बना दिया जच्चा-बच्चा केंद्र
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में लेबर रूम में जांच पूरी न होने के कारण ताला लगा होने से नेत्र सहायक के कक्ष को ही जच्चा-बच्चा केंद्र बना दिया गया है। इससे गर्भवती महिलाओं को तो लाभ हुआ है लेकिन नेत्र सहायक के बैठने के लिए कोई स्थायी व्यवस्था अस्पताल में देखने को नहीं मिली। नेत्र सहायक अस्पताल परिसर में इधर-उधर घूमती हुई नजर आईं।
समय : 12:14
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में एक्स-रे रूम पर ताला लटका था। बंद एक्स-रे कक्ष को देखकर मरीज लौटते मिले। बताया गया कि छह माह से एक्स-रे मशीन खराब पड़ी हुई है। अभी तक ठीक नहीं कराया जा सका है। मशीन को ठीक कराने के लिए सीएमओ को पत्र भेजा गया है।
समय: 01:12
दस प्रतिशत तक बाहर से दवा
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के बाहर बने मेडिकल स्टोर पर लोग डॉक्टरों की ओर से लिखी गई दवा खरीदते मिले। अस्पताल प्रशासन की ओर से बताया गया कि उन्हीं दवाओं को बाहर से खरीदने के लिए लिखा जाता है, जो यहां नहीं होती हैं। जरूरी सभी दवाओं का स्टॉक है।
समय: 01:34
केंद्र पर आते हैं औसतन सौ मरीज
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में खांसी, जुकाम, दर्द, टीबी की दवा लेने के लिए मरीज पहुंचते हैं। ओपीडी में मरीज लाइन लगाकर डॉक्टरों से परामर्श लेने के लिए खड़े रहे। एक महिला एमबीबीएस डॉक्टर महिला मरीजों की छोटी-मोटी बीमारियों का उपचार करते हुए ओपीडी में मिली। ज्यादा गंभीर बीमारियों से पीड़ित महिलाओं को वह महिला विशेषज्ञों के पास रेफर करती दिखी। बताया गया कि औसतन सौ मरीज आते हैं।
समय: 01:22
लैब पर लटका मिला ताला
एनएचएम कर्मी के हड़ताल पर होने से लैब पर ताला लटका मिला। इसके कारण खून की विभिन्न प्रकार की जांच नहीं हो रही थीं। मरीज लैब बंद होने से लौट रहे थे। उन्हें जिला अस्पताल में भेजा जा रहा था लेकिन कुछ मरीज निजी अस्पताल में जाने को मजबूर होते हुए मिले।
बोले मरीज
हाथ में काफी दिनों से दर्द था। दोबारा दिखाने आई हूं। पहले से आराम है। दवाएं अस्पताल से मिल जाती हैं।
-शकुंतला, अलीपुर
टीबी की बीमारी है। टेस्ट के लिए लिखा है। हड़ताल के कारण बाहर लैब में टेस्ट कराना पड़ेगा।
-राकेश, जमालपुर
खांसी, जुकाम और ठंड का असर है। डॉक्टर ने दवाई लिखी थी। अस्पताल से दवा मिल गई है। अक्सर दवा यहीं से लेता हूं।
-वसीम भारापुर
खांसी, जुकाम की दवा लेने आया था। परिवार के लिए भी यही से दवा ले जाता हूं। आराम हो जाता है। विशेषज्ञ तैनात हो जाएं तो और लाभ मिलेगा।
-मुंतालिब, बोंगला
डॉक्टरों की नियुक्ति से लेकर भवन निर्माण समेत सभी समस्याओं को दूर करने के लिए सीएमओ के माध्यम से शासन को अवगत कराया जा चुका है। इसके बावजूद न तो डॉक्टरों की तैनाती हो रही है और न ही बिल्डिंग बन रही है। इससे मरीजों को स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ दिए जाने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। -सुबोध जोशी, चिकित्सा अधीक्षक