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पूर्वी शिवालिक पर्वत पर आसीन मां चंडी देवी
अमर उजाला ब्यूरो हरिद्वार
Updated Fri, 31 Mar 2017 11:03 PM IST
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पूर्वी शिवालिक पर्वतमाला पर मां चंडी देवी का भव्य मंदिर स्थित है। इस अति प्राचीन मंदिर में अर्द्धरात्रि के समय सिंह भी मां की पूजा के लिए आते हैं। यह मंदिर विशुद्ध शक्तिपीठ है। यहां शक्ति की आराधना समूचे वर्ष होती है। चंडी देवी के समीप बजरंग बली की मां अंजनी का मंदिर है।
नीचे बह रही गंगा की नीलधारा से होते हुए इस मंदिर तक जाने का कोई सड़क मार्ग कुछ दशक पहले तक नहीं था। तब मंदिर जाने के लिए नाव का सहारा लेना पड़ता था। बिजनौर के रास्ते कच्चा सड़क मार्ग जरूर था। रास्ते में सात गहरे नाले पड़ने से कम लोग ही उधर से आते थे। सत्तर के दशक में चंडी देवी की तलहटी तक नीलधारा के ऊपर करीब एक किलोमीटर लंबा विशाल पुल बन चुका है। चंडी देवी जाने के लिए रज्जू मार्ग भी उपलब्ध है। यह मंदिर प्राचीन काल से तंत्र तथा अघोर शास्त्रियों के लिए भी आकर्षण का केंद्र रहा है। चंडी वन में प्राय: तंत्र साधना करने के लिए साधक और अघोरी आज भी पहुंचते हैं। मां चंडी देवी कृपा की देवी हैं। उन्होंने चंड मुंड जैसे दुर्दांत राक्षसों का वध किया था। पहाड़ी पर स्थित चंडी देवी हरिद्वार की मुख्य पहचान है। इस मंदिर पर वर्ष भर भगवती के भंडारे होते रहे हैं।
नीचे बह रही गंगा की नीलधारा से होते हुए इस मंदिर तक जाने का कोई सड़क मार्ग कुछ दशक पहले तक नहीं था। तब मंदिर जाने के लिए नाव का सहारा लेना पड़ता था। बिजनौर के रास्ते कच्चा सड़क मार्ग जरूर था। रास्ते में सात गहरे नाले पड़ने से कम लोग ही उधर से आते थे। सत्तर के दशक में चंडी देवी की तलहटी तक नीलधारा के ऊपर करीब एक किलोमीटर लंबा विशाल पुल बन चुका है। चंडी देवी जाने के लिए रज्जू मार्ग भी उपलब्ध है। यह मंदिर प्राचीन काल से तंत्र तथा अघोर शास्त्रियों के लिए भी आकर्षण का केंद्र रहा है। चंडी वन में प्राय: तंत्र साधना करने के लिए साधक और अघोरी आज भी पहुंचते हैं। मां चंडी देवी कृपा की देवी हैं। उन्होंने चंड मुंड जैसे दुर्दांत राक्षसों का वध किया था। पहाड़ी पर स्थित चंडी देवी हरिद्वार की मुख्य पहचान है। इस मंदिर पर वर्ष भर भगवती के भंडारे होते रहे हैं।
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