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बच्चों पर भारी न पड़ जाए यह लापरवाही
Haridwar
Updated Sat, 21 Sep 2013 05:38 AM IST
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लक्सर। मिड-डे मील को लेकर शिक्षा विभाग की लापरवाही किसी दिन स्कूली बच्चों पर भारी पड़ सकती है। क्षेत्र के कई स्कूलों में मिड-डे मील पकाने के लिए रसोई की व्यवस्था नहीं है। इन स्कूलों में बरामदे और खुले में भोजन पकाया जाता है, जहां हर समय बच्चे आते जाते रहते हैं। ऐसे में रसोई गैस सिलेंडर और प्रेशर कुकर फटने जैसी घटनाओं से बच्चों को नुकसान पहुंच सकता है।
फतवा के प्राइमरी स्कूल में हुई घटना के बाद शिक्षा विभाग के अधिकारियों की लापरवाही उजागर हो गई। यह दुर्घटना और भयावह हो सकती थी यदि आसपास स्कूली बच्चे खड़े होते। बताया जा रहा है कि इस स्कूल में रसोई नहीं है। दोनों भोजन माताएं बरामदे के समीप खुले में भोजन बना रही थीं। इसी दौरान प्रेशर कुकर फटने की घटना हो गई। लक्सर विकासखंड का यह अकेला स्कूल नहीं है जहां इस तरह से भोजन बनता हो। विकासखंड में प्राइमरी स्कूलों की संख्या 144 है, जिनमें से 35 के पास रसोई नहीं। इन 35 स्कूलों में बरामदे या फिर खुले में भोजन बनता है। बरामदे में भोजन बनाने से हमेशा खतरा बना रहता है। कई बार बरामदे के पास ही बच्चों को बिठाकर पढ़ाया जाता है। खुले में बनने वाले भोजन के आसपास भी बच्चे खेलते रहते हैं। ऐसे में किसी दिन बड़ी घटना से इनकार नहीं किया जा सकता। विभाग की ओर से राशन की गुणवत्ता को लेकर तो छापामार कार्रवाई की गई, लेकिन कभी इस ओर अधिकारियों का ध्यान नहीं गया।
कोट...
क्षेत्र के 50 स्कूलों में रसोई निर्माण का प्रस्ताव भेजा गया है, इनमें से कुछ पुरानी रसोई का नवनिर्माण किया जाना है। शिक्षकों को हिदायत दी गई है कि भोजन बरामदे या कक्षों में न बनाएं। यदि कहीं ऐसा होता पाया गया तो कार्रवाई की जाएगी।
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- राजेंद्र कुमार, बीआरसी लक्सर
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फतवा के प्राइमरी स्कूल में हुई घटना के बाद शिक्षा विभाग के अधिकारियों की लापरवाही उजागर हो गई। यह दुर्घटना और भयावह हो सकती थी यदि आसपास स्कूली बच्चे खड़े होते। बताया जा रहा है कि इस स्कूल में रसोई नहीं है। दोनों भोजन माताएं बरामदे के समीप खुले में भोजन बना रही थीं। इसी दौरान प्रेशर कुकर फटने की घटना हो गई। लक्सर विकासखंड का यह अकेला स्कूल नहीं है जहां इस तरह से भोजन बनता हो। विकासखंड में प्राइमरी स्कूलों की संख्या 144 है, जिनमें से 35 के पास रसोई नहीं। इन 35 स्कूलों में बरामदे या फिर खुले में भोजन बनता है। बरामदे में भोजन बनाने से हमेशा खतरा बना रहता है। कई बार बरामदे के पास ही बच्चों को बिठाकर पढ़ाया जाता है। खुले में बनने वाले भोजन के आसपास भी बच्चे खेलते रहते हैं। ऐसे में किसी दिन बड़ी घटना से इनकार नहीं किया जा सकता। विभाग की ओर से राशन की गुणवत्ता को लेकर तो छापामार कार्रवाई की गई, लेकिन कभी इस ओर अधिकारियों का ध्यान नहीं गया।
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कोट...
क्षेत्र के 50 स्कूलों में रसोई निर्माण का प्रस्ताव भेजा गया है, इनमें से कुछ पुरानी रसोई का नवनिर्माण किया जाना है। शिक्षकों को हिदायत दी गई है कि भोजन बरामदे या कक्षों में न बनाएं। यदि कहीं ऐसा होता पाया गया तो कार्रवाई की जाएगी।
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- राजेंद्र कुमार, बीआरसी लक्सर