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नन्ही हथिनी ने भी तोड़ा दम
Haridwar
Updated Fri, 18 Jan 2013 05:30 AM IST
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हरिद्वार। लैंसडोन से लाए गए हाथी के बच्चे ने बृहस्पतिवार को दम तोड़ दिया। पार्क डाक्टरों के मुताबिक बच्चा ऊपर का दूध हजम नहीं कर पाया। जिसकी वजह से उसे बचाया न जा सका।
पिछले पांच दिनों में भ्रूण समेत कुल चार हाथियों की जान चली गई है। रविवार को ट्रेन हादसे में एक हथिनी की मौत हो गई थीं। जबकि हादसे में जख्मी गर्भवती हथिनी ने सोमवार को दम तोड़ा। दूसरी तरफ रविवार को लैंसडोन वन प्रभाग में मात्र 25 दिन की हथिनी अपने परिवार से बिछुड़ गई थी। पार्क अधिकारी इसे चीला रेंज लेकर पहुंचे। जहां इसे राधा नाम की हथिनी ने स्वीकार भी कर लिया था। पार्क अधिकारियों के अनुसार हथिनी एक माह से कम उम्र की थी। वन्यजीव संस्थान के वैज्ञानिक डा. पराग निगम और पशु चिकित्सा अधिकारी देवेंद्र सिंह बिष्ट ने बताया कि जब तक बच्चे के पेट में उसकी मां का दूध बना रहा तब तक वह ठीक रही। बाद में इसे ऊपर का दूध दिया जाने लगा। लेकिन, वह उसे हजम नहीं कर पाई। जिसके चलते बृहस्पतिवार दोपहर दो बजे इस बच्चे ने दम तोड़ दिया। डाक्टरों के अनुसार बच्चे को बचाने के पूरे प्रयास किए गए। लेकिन सभी प्रयास विफल रहे। पार्क अधिकारियों ने शव का पोस्टमार्टम कर हथिनी को दफना दिया गया है।
वर्जन
बच्चा काफी छोटा था। शुरू से उसकी तबीयत खराब थी। किसी हथिनी का दूध न मिलने के कारण उसे ऊपर का दूध दिया जा रहा था। जिसे वह हजम नहीं कर पाई और मौत हो गई।
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विक्रम सिंह तोमर, वन्यजीव प्रतिपालक चीला रेंज
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मां की याद में रोती रहती थी नन्ही हथिनी
हरिद्वार। लैंसडोन वन प्रभाग से लाए गया बच्चा अपनी मां की याद में रोता रहता था। अधिकारियों के मुताबिक हथिनी राधा भी उसे काफी प्यार करती थी। लेकिन मां की याद में बच्चा रोता रहता था। रोते नन्हे हथिनी को देखकर पार्क अधिकारी समेत अन्य लोगों की आंखों में भी कई बार आंसू निकल आते थे। नन्ही हथिनी की मौत से पार्क अधिकारी और बच्चे दुखी हैं।
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पिछले पांच दिनों में भ्रूण समेत कुल चार हाथियों की जान चली गई है। रविवार को ट्रेन हादसे में एक हथिनी की मौत हो गई थीं। जबकि हादसे में जख्मी गर्भवती हथिनी ने सोमवार को दम तोड़ा। दूसरी तरफ रविवार को लैंसडोन वन प्रभाग में मात्र 25 दिन की हथिनी अपने परिवार से बिछुड़ गई थी। पार्क अधिकारी इसे चीला रेंज लेकर पहुंचे। जहां इसे राधा नाम की हथिनी ने स्वीकार भी कर लिया था। पार्क अधिकारियों के अनुसार हथिनी एक माह से कम उम्र की थी। वन्यजीव संस्थान के वैज्ञानिक डा. पराग निगम और पशु चिकित्सा अधिकारी देवेंद्र सिंह बिष्ट ने बताया कि जब तक बच्चे के पेट में उसकी मां का दूध बना रहा तब तक वह ठीक रही। बाद में इसे ऊपर का दूध दिया जाने लगा। लेकिन, वह उसे हजम नहीं कर पाई। जिसके चलते बृहस्पतिवार दोपहर दो बजे इस बच्चे ने दम तोड़ दिया। डाक्टरों के अनुसार बच्चे को बचाने के पूरे प्रयास किए गए। लेकिन सभी प्रयास विफल रहे। पार्क अधिकारियों ने शव का पोस्टमार्टम कर हथिनी को दफना दिया गया है।
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बच्चा काफी छोटा था। शुरू से उसकी तबीयत खराब थी। किसी हथिनी का दूध न मिलने के कारण उसे ऊपर का दूध दिया जा रहा था। जिसे वह हजम नहीं कर पाई और मौत हो गई।
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विक्रम सिंह तोमर, वन्यजीव प्रतिपालक चीला रेंज
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मां की याद में रोती रहती थी नन्ही हथिनी
हरिद्वार। लैंसडोन वन प्रभाग से लाए गया बच्चा अपनी मां की याद में रोता रहता था। अधिकारियों के मुताबिक हथिनी राधा भी उसे काफी प्यार करती थी। लेकिन मां की याद में बच्चा रोता रहता था। रोते नन्हे हथिनी को देखकर पार्क अधिकारी समेत अन्य लोगों की आंखों में भी कई बार आंसू निकल आते थे। नन्ही हथिनी की मौत से पार्क अधिकारी और बच्चे दुखी हैं।