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ट्रेन में आईआईटी प्रोफेसर की मौत
Haridwar
Updated Fri, 16 Nov 2012 12:00 PM IST
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रुड़की/लक्सर। आईआईटी के अर्थसाइंस डिपार्टमेंट के प्रोफेसर श्रीनिवास की ट्रेन में दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई। वह बृहस्पतिवार को ट्रेन से रुड़की से गोरखपुर जा रहे थे। लेकिन रास्ते में उनकी तबियत अचानक बिगड़ गई। लक्सर रेलवे स्टेशन पर उनके शव को उतारकर परिजनों को सौंप दिया गया। प्रोफेसर श्रीनिवास की मौत से संस्थान के सहयोगी प्रोफेसर और छात्राें में शोक की लहर है।
प्रोफेसर श्रीनिवास पुत्र राम आधार पांडेय पत्नी शशि के साथ बृहस्पतिवार सुबह अपने पैतृक गांव रकहट, जिला गोरखपुर यूपी के लिए घर से निकले थे। श्रीनिवास सुबह 7.30 बजे गोरखपुर के लिए जाने वाली जम्मूतवी-गोरखपुर (लोहित एक्सप्रेस) ट्रेन में सवार हुए थे। रुड़की और लक्सर के बीच रास्ते में उन्हें दिल का दौरा पड़ गया और उनकी मौत हो गई। बदहवास पत्नी ने टीटी को इसकी जानकारी दी तो लक्सर रेलवे स्टेशन पर जीआरपी पुलिस ने शव को उतार लिया। साथ ही आईआईटी के प्रोफेसर और परिजनों को सूचना दी गई। शव लेने के लिए आईआईटी से प्रोफेसर लक्सर रेलवे स्टेशन पहुंचे। पुलिस ने उनके शव का पंचनामा किया और रुड़की सिविल अस्पताल में पोस्टमार्टम कराने के लिए कहा। प्रोफेसर शव को लेकर पहले गंगनहर कोतवाली पहुंचे। लेकिन मामला प्रोफेसर से जुड़ा होने के चलते पुलिस ने बिना पोस्टमार्टम के ही शव परिजनाें को सौंप दिया। शव पहुंचते ही संस्थान में शोक की लहर दौड़ गई।
2002 में हुई थी प्रोफेसर की बाईपास सर्जरी
रुड़की। प्रो. श्रीनिवास की शारीरिक रूप से फिट नहीं थे। 2002 में उनकी बाईपास सर्जरी हुई थी। तभी से चिकित्सकाें ने उन्हें ज्यादा भागदौड़ न करने की सलाह दी थी। बताया जा रहा है कि बृहस्पतिवार को उन्हाेंने दौड़कर लोहित एक्सप्रेस पकड़ी थी। ऐसे में तेज गति से चलने के चलते उनकी तबीयत बिगड़ने का अंदेशा लगाया जा रहा है।
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चार माह पूर्व हुई थी बेटे की मौत
रुड़की। चार माह पूर्व बडे़ बेटे अमित पांडेय की दिल का दौरा पड़ने से मौत हुई और अब खुद श्रीनिवास को इसी बीमारी ने मौत के मुंह में समा लिया। अमित लखनऊ से एमबीए करने के बाद वहीं नौकरी करता था। छोटा बेटा शांतनु पांडेय जर्मनी में पीएचडी करने के बाद नौकरी कर रहा है। एक ही बीमारी से दो-दो लोगाें की मौत के बाद परिवार गमगीन है।
स्वर्णिम उपलब्धियां छोड़ गए श्रीनिवास
रुड़की। आईआईटी रुड़की के अर्थसाइंस डिपार्टमेंट में जियोफिजिक्स के प्रोफेसर श्रीनिवास अब नहीं रहे। लेकिन वे अपने पीछे स्वर्णिम उपलब्धियां छोड़ गए। जो संस्थान में अध्ययनरत छात्रों और सहपाठी प्रोफेसरों के लिए प्रेरणादायक बनती बनती रहेंगी। शोध कार्यों में उल्लेखनीय योगदान के लिए भारत सरकार ने 1991 में उन्हें शांति स्वरूप भटनागर पुरस्कार से नवाजा था।
प्रोफेसर श्रीनिवास ने 1974 में बनारस हिंदु विश्वविद्यालय से पीएचडी की उपाधि हासिल की। इसके बाद 1990 में रुड़की विवि (अब आईआईटी रुड़की) में जियोफिजिक्स के प्रोफेसर पद पर नियुक्ति प्राप्त की। इस दौरान उन्होंने कई उपलब्धियां हासिल कीं। 1991 में उन्हें शोध के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए भारत सरकार के शांति स्वरूप भटनागर पुरस्कार से नवाजा गया। 1987 में रुड़की विश्वविद्यालय का प्रतिष्ठित खोसला इंटरनेशनल अवार्ड भी उन्हें मिला। इसके अलावा श्रीनिवासन ने देश के विभिन्न प्रदेशाें में 32 तकनीक शोध पर जियोलॉजिकल सर्वे रिपोर्ट तैयार की। साथ राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय जनरलाें में 82 शोध प्रपत्र प्रकाशित हुए और एमटेक के 89 डिजर्टेशन में गाइड की भूमिका निभाई। इंडियन एसोसिएशन आफ हाइड्रोलॉजिस्ट, इंडियन जियोलॉजिकल कांग्रेस रुड़की के लाइफ मेंबर तथा सोसायटी आफ एक्सप्लोरेशन जियोफिजिसिस्ट यूएसए के एक्टिव मेंबर रहे हैं।
सहयोगी प्रोफेसरों ने बताई अपूर्णीय क्षति
प्रोफेसर श्रीनिवास के निधन पर समूचे संस्थान में शोक की लहर है। संस्थान के निदेशक प्रो. प्रदीप्त बनर्जी ने उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है। इसके अलावा विभाग के प्रोफेसर एके सराफ, प्रो. आरएन बालागन, डा. नागेंद्र कुमार, डा. एके अवस्थी, डा. सुनील वाजपेयी, डा. गोविंद चक्रपाणी, डा. मोहम्मद इजरायल, डा. आनंद जोशी, डा. आर कृष्णमूर्ति, डा. संदीप सिंह एवं डा. हर्ष सिंह्वल ने उनकी मौत को अपूर्णीय क्षति बताया है।
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प्रोफेसर श्रीनिवास पुत्र राम आधार पांडेय पत्नी शशि के साथ बृहस्पतिवार सुबह अपने पैतृक गांव रकहट, जिला गोरखपुर यूपी के लिए घर से निकले थे। श्रीनिवास सुबह 7.30 बजे गोरखपुर के लिए जाने वाली जम्मूतवी-गोरखपुर (लोहित एक्सप्रेस) ट्रेन में सवार हुए थे। रुड़की और लक्सर के बीच रास्ते में उन्हें दिल का दौरा पड़ गया और उनकी मौत हो गई। बदहवास पत्नी ने टीटी को इसकी जानकारी दी तो लक्सर रेलवे स्टेशन पर जीआरपी पुलिस ने शव को उतार लिया। साथ ही आईआईटी के प्रोफेसर और परिजनों को सूचना दी गई। शव लेने के लिए आईआईटी से प्रोफेसर लक्सर रेलवे स्टेशन पहुंचे। पुलिस ने उनके शव का पंचनामा किया और रुड़की सिविल अस्पताल में पोस्टमार्टम कराने के लिए कहा। प्रोफेसर शव को लेकर पहले गंगनहर कोतवाली पहुंचे। लेकिन मामला प्रोफेसर से जुड़ा होने के चलते पुलिस ने बिना पोस्टमार्टम के ही शव परिजनाें को सौंप दिया। शव पहुंचते ही संस्थान में शोक की लहर दौड़ गई।
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2002 में हुई थी प्रोफेसर की बाईपास सर्जरी
रुड़की। प्रो. श्रीनिवास की शारीरिक रूप से फिट नहीं थे। 2002 में उनकी बाईपास सर्जरी हुई थी। तभी से चिकित्सकाें ने उन्हें ज्यादा भागदौड़ न करने की सलाह दी थी। बताया जा रहा है कि बृहस्पतिवार को उन्हाेंने दौड़कर लोहित एक्सप्रेस पकड़ी थी। ऐसे में तेज गति से चलने के चलते उनकी तबीयत बिगड़ने का अंदेशा लगाया जा रहा है।
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चार माह पूर्व हुई थी बेटे की मौत
रुड़की। चार माह पूर्व बडे़ बेटे अमित पांडेय की दिल का दौरा पड़ने से मौत हुई और अब खुद श्रीनिवास को इसी बीमारी ने मौत के मुंह में समा लिया। अमित लखनऊ से एमबीए करने के बाद वहीं नौकरी करता था। छोटा बेटा शांतनु पांडेय जर्मनी में पीएचडी करने के बाद नौकरी कर रहा है। एक ही बीमारी से दो-दो लोगाें की मौत के बाद परिवार गमगीन है।
स्वर्णिम उपलब्धियां छोड़ गए श्रीनिवास
रुड़की। आईआईटी रुड़की के अर्थसाइंस डिपार्टमेंट में जियोफिजिक्स के प्रोफेसर श्रीनिवास अब नहीं रहे। लेकिन वे अपने पीछे स्वर्णिम उपलब्धियां छोड़ गए। जो संस्थान में अध्ययनरत छात्रों और सहपाठी प्रोफेसरों के लिए प्रेरणादायक बनती बनती रहेंगी। शोध कार्यों में उल्लेखनीय योगदान के लिए भारत सरकार ने 1991 में उन्हें शांति स्वरूप भटनागर पुरस्कार से नवाजा था।
प्रोफेसर श्रीनिवास ने 1974 में बनारस हिंदु विश्वविद्यालय से पीएचडी की उपाधि हासिल की। इसके बाद 1990 में रुड़की विवि (अब आईआईटी रुड़की) में जियोफिजिक्स के प्रोफेसर पद पर नियुक्ति प्राप्त की। इस दौरान उन्होंने कई उपलब्धियां हासिल कीं। 1991 में उन्हें शोध के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए भारत सरकार के शांति स्वरूप भटनागर पुरस्कार से नवाजा गया। 1987 में रुड़की विश्वविद्यालय का प्रतिष्ठित खोसला इंटरनेशनल अवार्ड भी उन्हें मिला। इसके अलावा श्रीनिवासन ने देश के विभिन्न प्रदेशाें में 32 तकनीक शोध पर जियोलॉजिकल सर्वे रिपोर्ट तैयार की। साथ राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय जनरलाें में 82 शोध प्रपत्र प्रकाशित हुए और एमटेक के 89 डिजर्टेशन में गाइड की भूमिका निभाई। इंडियन एसोसिएशन आफ हाइड्रोलॉजिस्ट, इंडियन जियोलॉजिकल कांग्रेस रुड़की के लाइफ मेंबर तथा सोसायटी आफ एक्सप्लोरेशन जियोफिजिसिस्ट यूएसए के एक्टिव मेंबर रहे हैं।
सहयोगी प्रोफेसरों ने बताई अपूर्णीय क्षति
प्रोफेसर श्रीनिवास के निधन पर समूचे संस्थान में शोक की लहर है। संस्थान के निदेशक प्रो. प्रदीप्त बनर्जी ने उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है। इसके अलावा विभाग के प्रोफेसर एके सराफ, प्रो. आरएन बालागन, डा. नागेंद्र कुमार, डा. एके अवस्थी, डा. सुनील वाजपेयी, डा. गोविंद चक्रपाणी, डा. मोहम्मद इजरायल, डा. आनंद जोशी, डा. आर कृष्णमूर्ति, डा. संदीप सिंह एवं डा. हर्ष सिंह्वल ने उनकी मौत को अपूर्णीय क्षति बताया है।