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सोना उगल रही है सूक और मोहंड रोह नदी
Haridwar
Updated Tue, 11 Sep 2012 12:00 PM IST
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रुड़की। बंजारेवाला में सूक और मोहंड रोह नदी खनन माफिया के लिए सोना उगल रही है। लेकिन इसका फायदा भी आम आदमी को नहीं, बल्कि चंद माफिया को ही मिल रहा है। माफिया की कमाई के सामने राज्य सरकार को मिल रहा राजस्व ‘ऊंट के मुंह में जीरे’ के समान है। फिर भी प्रशासन ने आंख मूंद रखी हैं। सोमवार को भी सूक नदी से जेसीबी लगाकर 25 ट्रैक्टर ट्रालियों से खनन किया जा रहा था।
बंजारेवाला क्षेत्र में खनन के सच का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि क्षेत्र में उत्तराखंड के 11 और यूपी के छह स्टोन क्रशर स्थापित हैं। जो बड़ी मात्रा में खनन का धंधा कर रहे हैं। स्टोन क्रशराें पर पहाड़ मानिंद खनन सामग्री स्टॉक की गई है। जो कई सालाें से करोड़ों नहीं अरबों वारे के न्यारे कर चुके हैं। सोमवार को भी अमर उजाला की टीम मौके पर पहुंची तो मोहंड रोह नदी से 25 ट्रैक्टर ट्रालियाें से खनन किया जा रहा था। लेकिन जैसे ही माफिया को टीम के पहुंचने की खबर मिली तो सभी ट्रैक्टर ट्रालियों को एक जगह खड़ा कर दिया गया और जेसीबी मशीन ने भी काम करना बंद कर दिया। आसपास के लोगों की माने तो अकेले मोहंड रोह नदी से रोजाना 500 से ऊपर ट्रैक्टर ट्रालियां नदी की कोख खोदकर खनन कर रही हैं। इस काम पर लगे यहां के मजदूरी को बमुश्किल मजदूरी दी जाती है। जबकि माफिया करोड़ों में खेल रहे हैं। प्रशासनिक टीम भी मौके पर पहुंचती है लेकिन कार्रवाई होती दिखाई नहीं देती। जिसके चलते खनन का यह खेल बदस्तूर जारी है।
सफेदपोश की भूमिका हो रही उजागर
खनन के इस खेल में प्रशासनिक अधिकारियों ही नहीं बल्कि सफेदपोशों की भूमिका भी उजागर हो रही है। सूत्राें की माने तो खनन के लिए लगाए स्टोन क्रशरों में कई बड़े मंत्रियों का भी हिस्सा शामिल है। इस खेल में जहां प्रशासनिक अधिकारी अपने प्रभाव का इस्तेमाल करते हैं, वहीं ऊंचे ओहदों पर बैठे सफेदपोश इसे शह देते हैं। कुल मिलाकर सब कुछ मिलजुलकर हो रहा है।
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400 फुट चौड़ी 17 फुट गहरी बनी मोहंड रोह
रुड़की। मोहंड रोह नदी हकीकत को खुद बयां कर रही है। बंजारेवाला गांव के समीप मोहंड रोह नदी का निरीक्षण करें तो पता चलता है कि करीब 400 फुट चौड़ाई में 17 फुट गहराई तक इसकी कोख खोद डाली गई है। इससे आसपास की उपजाऊ भूमि नष्ट होती जा रही है। यह स्थिति नदी में करीब चार किलोमीटर तक है। इसके आगे जाएं तो नदी के वास्तविक स्वरूप का भी पता चलता है। यहां पर नदी एक सपाट प्लेटफार्म की तरह दिखाई देती है।
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बंजारेवाला क्षेत्र में खनन के सच का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि क्षेत्र में उत्तराखंड के 11 और यूपी के छह स्टोन क्रशर स्थापित हैं। जो बड़ी मात्रा में खनन का धंधा कर रहे हैं। स्टोन क्रशराें पर पहाड़ मानिंद खनन सामग्री स्टॉक की गई है। जो कई सालाें से करोड़ों नहीं अरबों वारे के न्यारे कर चुके हैं। सोमवार को भी अमर उजाला की टीम मौके पर पहुंची तो मोहंड रोह नदी से 25 ट्रैक्टर ट्रालियाें से खनन किया जा रहा था। लेकिन जैसे ही माफिया को टीम के पहुंचने की खबर मिली तो सभी ट्रैक्टर ट्रालियों को एक जगह खड़ा कर दिया गया और जेसीबी मशीन ने भी काम करना बंद कर दिया। आसपास के लोगों की माने तो अकेले मोहंड रोह नदी से रोजाना 500 से ऊपर ट्रैक्टर ट्रालियां नदी की कोख खोदकर खनन कर रही हैं। इस काम पर लगे यहां के मजदूरी को बमुश्किल मजदूरी दी जाती है। जबकि माफिया करोड़ों में खेल रहे हैं। प्रशासनिक टीम भी मौके पर पहुंचती है लेकिन कार्रवाई होती दिखाई नहीं देती। जिसके चलते खनन का यह खेल बदस्तूर जारी है।
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सफेदपोश की भूमिका हो रही उजागर
खनन के इस खेल में प्रशासनिक अधिकारियों ही नहीं बल्कि सफेदपोशों की भूमिका भी उजागर हो रही है। सूत्राें की माने तो खनन के लिए लगाए स्टोन क्रशरों में कई बड़े मंत्रियों का भी हिस्सा शामिल है। इस खेल में जहां प्रशासनिक अधिकारी अपने प्रभाव का इस्तेमाल करते हैं, वहीं ऊंचे ओहदों पर बैठे सफेदपोश इसे शह देते हैं। कुल मिलाकर सब कुछ मिलजुलकर हो रहा है।
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400 फुट चौड़ी 17 फुट गहरी बनी मोहंड रोह
रुड़की। मोहंड रोह नदी हकीकत को खुद बयां कर रही है। बंजारेवाला गांव के समीप मोहंड रोह नदी का निरीक्षण करें तो पता चलता है कि करीब 400 फुट चौड़ाई में 17 फुट गहराई तक इसकी कोख खोद डाली गई है। इससे आसपास की उपजाऊ भूमि नष्ट होती जा रही है। यह स्थिति नदी में करीब चार किलोमीटर तक है। इसके आगे जाएं तो नदी के वास्तविक स्वरूप का भी पता चलता है। यहां पर नदी एक सपाट प्लेटफार्म की तरह दिखाई देती है।