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बहादराबाद थाने में तैनात महिला एसआई ने की खुदखुशी
Updated Fri, 17 Aug 2018 01:01 AM IST
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हरिद्वार/ बहादराबाद। बहादराबाद थाने में तैनात महिला दारोगा आंचल फारसी (29) ने फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली। वर्ष 2015 बैच की सब इंस्पेक्टर आंचल फारसी मूल रूप से देहरादून के गांव गुजराड़ा राजपुर की रहने वाली थी। वे एक साल से बहादराबाद थाने में तैनात थी। महिला सब इंस्पेक्टर के घर में मिले तीन अलग-अलग सुसाइड नोट में आत्महत्या के पीछे मानसिक तनाव की बात सामने आई है। एसएसपी और एसपी सिटी समेत आला अफसरों ने घटनास्थल का निरीक्षण कर पूरे घटनाक्रम का जायजा लिया।
स्वतंत्रता दिवस के दिन बहादराबाद थाने (इब्राहिमपुर रोड) पर ध्वजारोहण का कार्यक्रम था, लेकिन महिला सब इंस्पेक्टर आंचल फारसी ध्वजारोहण में शामिल होने नहीं पहुंची, तब उसके कमरे पर कांस्टेबल अरविंद नेगी, महिला कांस्टेबल डिंपल उसे देखने पहुंचे। कई बार दरवाजा खटखटाने पर भी कोई प्रतिक्रिया नहीं होने पर सिपाही अरविंद ने खिड़की का पर्दा उठाकर अंदर देखा तो उसके होश उड़ गए। महिला दारोगा का शव चुन्नी के फंदे से झूल रहा था।
आनन- फानन में एसएसपी कृष्ण कुमार वीके, एसपी सिटी ममता वोहरा समेत आला अफसर घटनास्थल पर पहुंचे। पुलिस के अनुसार घटनास्थल से तीन अलग- अलग सुसाइड नोट बरामद हुए। सुसाइड नोट में सब इंस्पेक्टर ने दबाव में होने की बात लिखी है, लेकिन वजह नहीं लिखी है। पुलिस ने शव का चिकित्सकों के पैनल से वीडियोग्राफी के बीच पोस्टमार्टम कराया। शाम केको भाई रूपेश एवं परिजन उसके शव को लेकर देहरादून के लिए रवाना हो गए। नगर पुलिस अधीक्षक ममता वोहरा ने बताया कि सुसाइड नोट में महिला दारोगा ने दबाव में होने की बात लिखी है, लेकिन वजह साफ नहीं है।
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थाने में गुजारा पूरा एक साल
बहादराबाद थाने में सब इंस्पेक्टर आंचल फारसी की पहली तैनाती थी। उसने पिछले वर्ष पंद्रह अगस्त को ही बहादराबाद थाने में अपनी आमद दर्ज कराई थी। ठीक एक साल की नौकरी के बाद उसी दिन उसने दुनिया को अलविदा कह दिया। आंचल की मौत से पुलिस महकमे में शोक की लहर है।
आंचल के खुदकुशी का नहीं हो रहा यकीन
वो बहुत दृढ़निश्चय वाली थी। सही बात पर अडिग रहती थी। एक बार भाजपा के एक विधायक से भी महिला एसआई आंचल भिड़ गई थी और अपने कदम पीछे नहीं खींचे थे। पर, अंदर से वह इतनी कमजोर होगी, इसका विश्वास पुलिस महकमे में किसी को भी नहीं हो रहा है। कोई मानने को ही तैयार नहीं है कि, आंचल खुदकुशी कर सकती है। क्योंकि वह हर चुनौती से सामना करने के लिए तैयार रहती थी और अपनी ड्यूटी के प्रति भी पूरी तरह जवाबदेह थी।
स्वतंत्रता दिवस के दिन बहादराबाद थाने (इब्राहिमपुर रोड) पर ध्वजारोहण का कार्यक्रम था, लेकिन महिला सब इंस्पेक्टर आंचल फारसी ध्वजारोहण में शामिल होने नहीं पहुंची, तब उसके कमरे पर कांस्टेबल अरविंद नेगी, महिला कांस्टेबल डिंपल उसे देखने पहुंचे। कई बार दरवाजा खटखटाने पर भी कोई प्रतिक्रिया नहीं होने पर सिपाही अरविंद ने खिड़की का पर्दा उठाकर अंदर देखा तो उसके होश उड़ गए। महिला दारोगा का शव चुन्नी के फंदे से झूल रहा था।
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आनन- फानन में एसएसपी कृष्ण कुमार वीके, एसपी सिटी ममता वोहरा समेत आला अफसर घटनास्थल पर पहुंचे। पुलिस के अनुसार घटनास्थल से तीन अलग- अलग सुसाइड नोट बरामद हुए। सुसाइड नोट में सब इंस्पेक्टर ने दबाव में होने की बात लिखी है, लेकिन वजह नहीं लिखी है। पुलिस ने शव का चिकित्सकों के पैनल से वीडियोग्राफी के बीच पोस्टमार्टम कराया। शाम केको भाई रूपेश एवं परिजन उसके शव को लेकर देहरादून के लिए रवाना हो गए। नगर पुलिस अधीक्षक ममता वोहरा ने बताया कि सुसाइड नोट में महिला दारोगा ने दबाव में होने की बात लिखी है, लेकिन वजह साफ नहीं है।
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थाने में गुजारा पूरा एक साल
बहादराबाद थाने में सब इंस्पेक्टर आंचल फारसी की पहली तैनाती थी। उसने पिछले वर्ष पंद्रह अगस्त को ही बहादराबाद थाने में अपनी आमद दर्ज कराई थी। ठीक एक साल की नौकरी के बाद उसी दिन उसने दुनिया को अलविदा कह दिया। आंचल की मौत से पुलिस महकमे में शोक की लहर है।
आंचल के खुदकुशी का नहीं हो रहा यकीन
वो बहुत दृढ़निश्चय वाली थी। सही बात पर अडिग रहती थी। एक बार भाजपा के एक विधायक से भी महिला एसआई आंचल भिड़ गई थी और अपने कदम पीछे नहीं खींचे थे। पर, अंदर से वह इतनी कमजोर होगी, इसका विश्वास पुलिस महकमे में किसी को भी नहीं हो रहा है। कोई मानने को ही तैयार नहीं है कि, आंचल खुदकुशी कर सकती है। क्योंकि वह हर चुनौती से सामना करने के लिए तैयार रहती थी और अपनी ड्यूटी के प्रति भी पूरी तरह जवाबदेह थी।