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कईं दशकों तक बार-बार हरिद्वार आते रहे अटल जी
Updated Fri, 17 Aug 2018 01:01 AM IST
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हरिद्वार। अटल जी का गंगा नगरी से गहरा रिश्ता रहा है। वे बार-बार हरिद्वार आते रहे। गंगा की आरती उन्हें यहां आने के लिए खींचती रही।
अटल जी ने 60 के दशक से प्रतिवर्ष हरिद्वार आना शुरू किया था। पहले वे बिरला हाउस में ठहरे, लेकिन बाद में जयपुरिया हाउस उनका ठिकाना बन गया। रामघाट स्थित इस भवन से अटल जी हरिद्वार की गलियों में घूमते हुए पैदल ही हरकी पैड़ी जाते थे। मां गंगा के शांत तट पर वे घंटों बैठे रहते। अपने साथी और बाद में निजी सचिव बने शिवकुमार शर्मा उनकी हर यात्रा के गवाह रहे। हरकी पैड़ी स्थित गंगा सभा के कार्यालय में वे तत्कालीन पदाधिकारी आनंद प्रकाश शर्मा, सोमदत्त श्रोत्रिय, पूर्व विधायक और पत्रकार राजकुमार शर्मा, पं. साधु राम त्रिपाठी आदि के साथ घंटों बतियाते रहते। गंगा के बारे में अटल जी की जानकारी पुरोहितों से भी अधिक होती। तत्कालीन युवा पीढ़ी के अशोक त्रिपाठी, रामकिशन मेहता, पं. शिव कुमार सिखौला, शिव कुमार भक्त, नंद किशोर सरैये, पं. विश्वेश्वर मिश्र, राजकुमार अरोड़ा आदि ने उनसे बहुत कुछ सीखा। हरिद्वार में रहने के दौरान वह प्रतिदिन सायंकालीन गंगा आरती में शामिल होते रहे। आरती के बाद भी एकांत तट पर बैठना उन्हें बहुत भाता था।
अटल जी कई बार वैसाखी पर होने वाले गुरुकुल विश्वविद्यालय के जलसे में आते थे। तब यह जलसा 15 दिन चलता। अटल जी पहले ही दिन वहां पहुंच जाते थे। गुरुकुल वाले उसी रात उन्हें सुनने के लिए परिवारों के साथ मैदान में इकट्ठा हो जाते। अटल जी की मधुर और तर्क सम्मत वाणी के दीवाने गुरुकुल के तमाम शिक्षक और कुलपति रहे हैं। जलसे में भाग लेने के लिए देश के अनेक भागों से आए आर्य समाजी अटल जी का भाषण कभी नहीं चूकते थे। अटल जी ने विश्वविद्यालय में दीक्षांत भाषण भी दिया। हरिद्वार के भल्ला मैदान और ज्वालापुर के ज्वालापुर इंटर कालेज में उनकी कई सभाएं हुई। हरिद्वार के पत्रकार राजकुमार शर्मा को अटल जी के साथ नेपाल जाने का सौभाग्य भी प्राप्त हुआ था। तब अटल जी और राजकुमार शर्मा दोनों पत्रकारिता करते थे। हरिद्वार आने पर अटल जी यहां के कुछ महंतों और पुरोहितों से मिलने उनके पास भी जाते थे। बड़े बाजार की हवेली शंकर गिरि में भी अटल जी दो बार गए।
अटल जी ने 60 के दशक से प्रतिवर्ष हरिद्वार आना शुरू किया था। पहले वे बिरला हाउस में ठहरे, लेकिन बाद में जयपुरिया हाउस उनका ठिकाना बन गया। रामघाट स्थित इस भवन से अटल जी हरिद्वार की गलियों में घूमते हुए पैदल ही हरकी पैड़ी जाते थे। मां गंगा के शांत तट पर वे घंटों बैठे रहते। अपने साथी और बाद में निजी सचिव बने शिवकुमार शर्मा उनकी हर यात्रा के गवाह रहे। हरकी पैड़ी स्थित गंगा सभा के कार्यालय में वे तत्कालीन पदाधिकारी आनंद प्रकाश शर्मा, सोमदत्त श्रोत्रिय, पूर्व विधायक और पत्रकार राजकुमार शर्मा, पं. साधु राम त्रिपाठी आदि के साथ घंटों बतियाते रहते। गंगा के बारे में अटल जी की जानकारी पुरोहितों से भी अधिक होती। तत्कालीन युवा पीढ़ी के अशोक त्रिपाठी, रामकिशन मेहता, पं. शिव कुमार सिखौला, शिव कुमार भक्त, नंद किशोर सरैये, पं. विश्वेश्वर मिश्र, राजकुमार अरोड़ा आदि ने उनसे बहुत कुछ सीखा। हरिद्वार में रहने के दौरान वह प्रतिदिन सायंकालीन गंगा आरती में शामिल होते रहे। आरती के बाद भी एकांत तट पर बैठना उन्हें बहुत भाता था।
अटल जी कई बार वैसाखी पर होने वाले गुरुकुल विश्वविद्यालय के जलसे में आते थे। तब यह जलसा 15 दिन चलता। अटल जी पहले ही दिन वहां पहुंच जाते थे। गुरुकुल वाले उसी रात उन्हें सुनने के लिए परिवारों के साथ मैदान में इकट्ठा हो जाते। अटल जी की मधुर और तर्क सम्मत वाणी के दीवाने गुरुकुल के तमाम शिक्षक और कुलपति रहे हैं। जलसे में भाग लेने के लिए देश के अनेक भागों से आए आर्य समाजी अटल जी का भाषण कभी नहीं चूकते थे। अटल जी ने विश्वविद्यालय में दीक्षांत भाषण भी दिया। हरिद्वार के भल्ला मैदान और ज्वालापुर के ज्वालापुर इंटर कालेज में उनकी कई सभाएं हुई। हरिद्वार के पत्रकार राजकुमार शर्मा को अटल जी के साथ नेपाल जाने का सौभाग्य भी प्राप्त हुआ था। तब अटल जी और राजकुमार शर्मा दोनों पत्रकारिता करते थे। हरिद्वार आने पर अटल जी यहां के कुछ महंतों और पुरोहितों से मिलने उनके पास भी जाते थे। बड़े बाजार की हवेली शंकर गिरि में भी अटल जी दो बार गए।
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