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..नगर निगम के तीन कर अधीक्षकों का वेतन रोका
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ब्यूरो/अमर उजाला, हरिद्वार
नगर निगम के तीन कर एवं राजस्व अधीक्षकों के वेतन भुगतान पर रोक लगा दी गई है। यह कार्रवाई उनकी ओर से बार-बार पत्राचार किए जाने के बाद भी वित्तीय वर्ष 2014 से 2018 तक की ऑडिट आपत्तियों का निस्तारण नहीं कराने पर की गई हैै। इससे पूर्व नगर आयुक्त ने तीनों कर अधीक्षकों को 11 फरवरी को ऑडिट आपत्तियों के निस्तारण के लिए अंतिम चेतावनी नोटिस दिया था।
नगर निगम के हर साल होने वाले ऑडिट के दौरान बार बार यह बात सामने आती रही है कि कई कर्मचारी निगम के आवासों में रहने के साथ ही आवासीय भत्ता भी ले रहे हैं। वर्ष 2014 में भी लेखा परीक्षा मुख्यालय की ऑडिट रिपोर्ट में इसका उल्लेख किया गया था कि कर्मचारियों पर आवास किराये का लगभग 13 लाख रुपया बकाया है जिसकी वसूली नहीं की जा रही है। यह तथ्य हर साल ऑडिट रिपोर्ट में सामने आने पर कर अधीक्षक सुनीता सक्सेना, रमेश रावत और राहुल कैंथोला को ऑडिट आपत्तियों के निस्तारण के लिए नोटिस जारी किया गया। मगर बार-बार नोटिस देने के बावजूद उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। ऐसे में लेखा संपरीक्षा विभाग ने इसको गबन माना है। इसके बाद तीनों कर अधीक्षकों को 11 फरवरी को नोटिस दिया गया। इसका भी जवाब न देने पर शासन ने नगर निगम के मुख्य नगर लेखा परीक्षक रत्नेश कुमार को कार्रवाई के निर्देश दिए। शासन के निर्देश पर मुख्य नगर लेखा परीक्षक ने तीनों कर अधीक्षकों का वेतन रोक लिया। ऐसे में कर अधीक्षकों को जनवरी का वेतन नहीं मिल पाया है। नगर आयुक्त आलोक कुमार पांडेय का कहना है कि कर अधीक्षकों को कर्मचारियों से वसूली करने के निर्देश दिए गए हैं।
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नगर निगम के तीन कर एवं राजस्व अधीक्षकों के वेतन भुगतान पर रोक लगा दी गई है। यह कार्रवाई उनकी ओर से बार-बार पत्राचार किए जाने के बाद भी वित्तीय वर्ष 2014 से 2018 तक की ऑडिट आपत्तियों का निस्तारण नहीं कराने पर की गई हैै। इससे पूर्व नगर आयुक्त ने तीनों कर अधीक्षकों को 11 फरवरी को ऑडिट आपत्तियों के निस्तारण के लिए अंतिम चेतावनी नोटिस दिया था।
नगर निगम के हर साल होने वाले ऑडिट के दौरान बार बार यह बात सामने आती रही है कि कई कर्मचारी निगम के आवासों में रहने के साथ ही आवासीय भत्ता भी ले रहे हैं। वर्ष 2014 में भी लेखा परीक्षा मुख्यालय की ऑडिट रिपोर्ट में इसका उल्लेख किया गया था कि कर्मचारियों पर आवास किराये का लगभग 13 लाख रुपया बकाया है जिसकी वसूली नहीं की जा रही है। यह तथ्य हर साल ऑडिट रिपोर्ट में सामने आने पर कर अधीक्षक सुनीता सक्सेना, रमेश रावत और राहुल कैंथोला को ऑडिट आपत्तियों के निस्तारण के लिए नोटिस जारी किया गया। मगर बार-बार नोटिस देने के बावजूद उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। ऐसे में लेखा संपरीक्षा विभाग ने इसको गबन माना है। इसके बाद तीनों कर अधीक्षकों को 11 फरवरी को नोटिस दिया गया। इसका भी जवाब न देने पर शासन ने नगर निगम के मुख्य नगर लेखा परीक्षक रत्नेश कुमार को कार्रवाई के निर्देश दिए। शासन के निर्देश पर मुख्य नगर लेखा परीक्षक ने तीनों कर अधीक्षकों का वेतन रोक लिया। ऐसे में कर अधीक्षकों को जनवरी का वेतन नहीं मिल पाया है। नगर आयुक्त आलोक कुमार पांडेय का कहना है कि कर अधीक्षकों को कर्मचारियों से वसूली करने के निर्देश दिए गए हैं।
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